हाइकोर्ट ने नही दी रेलवे अतिक्रमण को राहत

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नैनीताल एसकेडी डॉट कॉम

रेलवे की अतिक्रमण पर गंभीर होते हुए हाईकोर्ट ने हल्द्वानी के रेलवे स्टेशन के समीप रह रहे 4000 से अधिक अतिक्रमणकारियों को कोई राहत नहीं देते हुए यह मामला न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ की अदालत को भेज दिया है। रेलवे की भूमि पर अतिक्रमण कर रह रहे लोगों की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति संजय कुमार व आरसीखुल्बे की अदालत ने सुनवाई करते हुए यह मामला आगे भेज दिया है तथा इस पर किसी किशन की राहत देने से इनकार किया है।

कोर्ट मामले में दाखिल पांचों जनहित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर रही है। इन याचिकाओं को न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की अगुवाई वाली खण्डपीठ को भेज दिया गया है।

बुधवार को रेलवे भूमि पर काबिज मुस्तफा हुसैन, मोहम्मद गुफरान, टीकाराम पांडे, मदरसा गुसाईं गरीब नवाज और भूपेन्द्र आर्य व अन्य अतिक्रमणकारियों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई हुई। जिसमें कहा गया है कि सरकार उन्हें हटाने के साथ ही उनका पुनर्वास करे।

हालांकि अदालत ने याचिकाकर्ताओं को राहत नहीं दी और सभी जनहित याचिकाओं को शरद कुमार शर्मा की अगुवाई वाली खण्डपीठ को भेज दिया। आज मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश संजय कुमार मिश्रा व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खण्डपीठ में हुई।

नौ नवम्बर 2016 को हाईकोर्ट ने रविशंकर जोशी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए 10 हफ्तों के भीतर रेलवे की जमीन से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि जितने भी अतिक्रमणकारी है, उनको रेलवे पीपीएक्ट के तहत नोटिस देकर जनसुवाईयां करें। रेलवे की तरफ से कहा गया कि हल्द्वानी में रेलवे की 29 एकड़ भूमि पर अतिक्रमण किया गया है, जिनमें करीब 4365 परिवार मौजूद हैं। हाई कोर्ट के आदेश पर इन लोगों को पीपीएक्ट में नोटिस दिया जा चुका है।

किसी भी व्यक्ति के पास जमीन के वैध कागजात नहीं पाए गए। दिसम्बर 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को दिशा निर्देश दिए थे कि अगर रेलवे की भूमि पर अतिक्रमण किया गया है तो पटरी के आसपास रहने वाले लोगों को दो सप्ताह और उसके बाहर रहने वाले लोगों को छह सप्ताह के भीतर जमीन खाली करने के नोटिस दिए गए थे ताकि रेलवे को अतिक्रमण से मुक्त किया जा सके।

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