मुख्तार को लोकसभा एवं राज्यसभा मे तवज्जो नहीं देने के बाद कही उपराष्ट्रपति पद पर बिठाने की तैयारी तो नहीं !

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भाजपा मे प्रवक्ता के तौर पर मुख्तार अब्बास नकवी हमेशा अल्पसंख्यक मामलों में पार्टी की ओर से जोरदार पैरवी करते आए हैं लेकिन यहां पार्टी में उनकी पैरवी कमजोर होती दिखाई दे रही है।

पहले राज्यसभा के लिए घोषित प्रत्याशियों में उनका नाम गायब रहा वहीं दूसरी ओर जब लोकसभा उपचुनाव के लिए देशभर के कई सीटों पर नामों की घोषणा हुई तो उस समय ऐसा लग रहा था कि रामपुर लोकसभा सीट जो आजम खान के इस्तीफा दे दिए जाने के कारण रिक्त हुई है उस पर मुख्तार अब्बास नकवी को चुनाव लड़ाया जाएगा लेकिन यहां भी नकवी के नाम पर भाजपा आलाकमान ने मुहर नहीं लगाई।

एक जमाने में भारतीय जनता पार्टी में सिकंदर बख्त भाजपा के मुस्लिम चेहरे के तौर पर प्रोजेक्ट किए जाते हैं उसके बाद अटल बिहारी वाजपेई के कार्यकाल के दौरान वर्ष 1998 में चार अब्बास नकवी को लोकसभा का टिकट दिया गया वहां उन्होंने आजम खान को चित कर दिया इसके बाद मुख्तार अब्बास नकवी जिन्हें रामपुर में कोई नहीं जानता था वह रामपुरी ही नहीं बल्कि पूरे देश में भाजपा के मुस्लिम चेहरे के तौर पर जाने जाने लगे वाजपेई सरकार में उन्हें इसका इनाम देते हुए सूचना प्रसारण मंत्री बनाया गया इसके बाद वह लगातार दो चुनाव भी हार गए जिनमें वर्ष 1999 और 2004 का चुनाव है।

भाजपा ने उन्हें तीन बार राज्यसभा का सदस्य भी बनाया है। इसी जून में उनका राज्यसभा का तीसरा कार्यकाल भी पूरा हो रहा है उनका राज्यसभा के लिए नाम नहीं आने से उनके समर्थकों ने कई तरह के कयास लगाए। लेकिन लोकसभा का टिकट भी उनके नाम पर फाइनल नहीं हुआ तो उनके समर्थकों में बेचैनी भी दिखाई दी।

हालांकि आंतरिक सूत्रों के अनुसार यह खबर भी आ रही है कि मुख्तार अब्बास नकवी को भाजपा उपराष्ट्रपति का प्रत्याशी बना सकती है जिससे वह अल्पसंख्यकों को यह कहकर साधने की कोशिश करेगी कि उन्होंने देश के सर्वोच्च पदों में से एक पर अल्पसंख्यक को बिठा दिया है। मुस्लिम वर्ग जो भाजपा का धुर विरोधी हुआ करता है वह कहीं न कहीं अब भाजपा की ओर उठता जा रहा है जिसका लाभ भाजपा राजनीतिक तौर पर भी उठाना चाहती है इसीलिए इस बात में कोई शंका भी नहीं हो सकती है कि उन्हें उपराष्ट्रपति का दावेदार भी घोषित किया जा सकता है।

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