केंद्र सरकार का बड़ा ऐलान! बेटियों और महिला कर्मचारियों को मिली 2 बड़ी खुशखबरी

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केंद्र सरकार ने परिवार पेंशन (Family Pension) के नियमों में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए देश की बेटियों और महिला सरकारी कर्मचारियों को बहुत बड़ी राहत दी है। बदलती सामाजिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पेंशन व्यवस्था को ज्यादा सुगम और लचीला बना दिया है। केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने इन नए बदलावों की घोषणा करते हुए कहा कि पिछले कुछ सालों में पेंशन नियमों को ज्यादा से ज्यादा व्यावहारिक बनाने की दिशा में काम किया गया है।

पहली खुशखबरी: तलाकशुदा और अलग रह रही बेटियों को बड़ी राहत

परिवार पेंशन के नए नियमों का सबसे बड़ा फायदा तलाकशुदा और अपने पतियों से अलग रह रही (Separated) बेटियों को मिलने जा रहा है। सरकार के नए प्रावधान के अनुसार, यदि कोई बेटी वैवाहिक परिस्थितियों के कारण दोबारा अपने माता-पिता के परिवार पर निर्भर होती है और आवश्यक पात्रता शर्तें पूरी करती है, तो उसे परिवार पेंशन का हक दिया जाएगा। सरकार के इस कदम से ऐसी बेटियों को न केवल सामाजिक संबल मिलेगा, बल्कि उनके लिए आर्थिक सुरक्षा का रास्ता भी साफ हो गया है।

दूसरी खुशखबरी: अब पति नहीं, बेटा या बेटी भी हो सकेंगे नामांकित

महिला सरकारी कर्मचारियों के अधिकारों को मजबूत करते हुए केंद्र सरकार ने एक और क्रांतिकारी फैसला लिया है। नए नियमों के तहत अब पात्र महिला सरकारी कर्मचारी अपने पति के स्थान पर अपने बेटे या बेटी को परिवार पेंशन के लिए नामांकित (Nominate) कर सकती हैं। इस बदलाव से महिलाओं को अपनी पारिवारिक परिस्थितियों के हिसाब से फैसला लेने की पूरी आजादी मिलेगी और परिवार पेंशन व्यवस्था में उनका अधिकार और मजबूत होगा।

कर्मचारी की मृत्यु पर परिवार को मिलेगी 50% तक बढ़ी हुई पेंशन

सरकार ने नौकरी के दौरान किसी कर्मचारी की असमय मृत्यु होने पर उसके परिवार को मजबूती देने के लिए पेंशन दर में बढ़ोतरी का प्रावधान किया है। नए दिशानिर्देशों के तहत, पात्र परिवार को एक तय समयसीमा के लिए बढ़ी हुई दर पर परिवार पेंशन मिलेगी, जो कर्मचारी के अंतिम वेतन (Last Drawn Salary) का 50 प्रतिशत तक हो सकती है। इसका मुख्य उद्देश्य कम उम्र में कर्मचारी के चले जाने के बाद परिवार को अचानक आने वाले वित्तीय संकट से बचाना है।

7 साल की न्यूनतम सेवा शर्त खत्म, तुरंत मिलेगा वित्तीय कवच

पेंशन नियमों में एक और बड़ा सुधार न्यूनतम सेवा की शर्त को लेकर किया गया है। पहले नौकरी के दौरान मृत्यु होने पर बढ़ी हुई परिवार पेंशन पाने के लिए कम से कम 7 साल की सेवा अनिवार्य थी, लेकिन सरकार ने इस 7 साल की शर्त को पूरी तरह से हटा दिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर किसी कर्मचारी की मृत्यु कम सेवा अवधि के दौरान भी हो जाती है, तो भी उसका परिवार नियमानुसार पूरी आर्थिक सहायता और परिवार पेंशन का हकदार होगा।

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