राजनीति में बड़ा खेल शुरू! भाजपा की इस नई चाल से विपक्ष के उड़े तोते, 21 जून को होने जा रहा है बड़ा धमाका
गुजरात के सियासी गलियारों में इस समय जबरदस्त हलचल मची हुई है। राज्य में विकास कार्यों, पार्टी संगठनों की अंदरूनी बैठकों और आने वाले वक्त की बड़ी राजनीतिक रणनीतियों को लेकर सियासी पारा अचानक से सातवें आसमान पर पहुंच गया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में सूबे की भाजपा सरकार इस समय रिकॉर्ड तोड़ बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) और भारी-भरकम निवेश परियोजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए पूरा जोर लगा रही है। अपनी साख मजबूत करने के लिए सरकार जनता के बीच जाकर लगातार अपनी बड़ी-बड़ी उपलब्धियों का ब्योरा दे रही है और यह जताने की कोशिश कर रही है कि विकास के मामले में उसका कोई मुकाबला नहीं है।
स्थानीय निकाय चुनावों में बंपर जीत के बाद भाजपा का मेगा प्लान
हाल ही में गुजरात में संपन्न हुए स्थानीय निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने जो प्रचंड जीत हासिल की थी, उसने पार्टी के हौसले बुलंद कर दिए हैं। इस बड़ी कामयाबी से गदगद भाजपा का शीर्ष संगठन अभी से हाथ पर हाथ धरकर नहीं बैठा है। पार्टी के रणनीतिकार आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए एक ऐसा चक्रव्यूह तैयार करने में जुट गए हैं जिसे भेदना विपक्ष के लिए नामुमकिन हो जाए।
भाजपा की इस ताबड़तोड़ तैयारी को देख विपक्षी खेमे में भारी बेचैनी और छटपटाहट साफ महसूस की जा सकती है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (आप) भी राज्य में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने और अपने कमजोर होते जनाधार को फिर से मजबूत करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही हैं। दोनों ही दल अंदरूनी तौर पर रणनीति बदल रहे हैं ताकि भाजपा के इस अजेय रथ को रोका जा सके।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की एंट्री से मचेगा हड़कंप, इस तारीख को आ रहे हैं गुजरात
इस पूरे सियासी ड्रामे के बीच सबसे बड़ी खबर यह आ रही है कि देश के गृह मंत्री और भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह 21 जून को गुजरात के दौरे पर पहुंच रहे हैं। वे यहां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के भव्य कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होने आ रहे हैं। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि अमित शाह के कदम रखते ही गुजरात की राजनीति में चल रही गतिविधियां और ज्यादा तेज हो जाएंगी। उनके इस दौरे के दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बंद कमरे में कई अहम बैठकें भी हो सकती हैं, जो राज्य की भावी राजनीति की दिशा और दशा दोनों तय करेंगी।
मौसम के बदले मिजाज ने बढ़ाई चिंता, सियासत में भी आया ‘बारिश का अलर्ट’
राजनीतिक उठापटक के बीच गुजरात में कुदरत का मिजाज भी तेजी से बदल रहा है। राज्य में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और मौसम विभाग ने कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट (रेड और ऑरेंज अलर्ट) जारी कर दिया है। इस प्राकृतिक चुनौती से निपटने के लिए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने तुरंत एक्शन लेते हुए पूरे प्रशासनिक अमले और आपदा प्रबंधन की टीमों को चौबीसों घंटे पूरी तरह सतर्क रहने के सख्त निर्देश दिए हैं।
हैरानी की बात यह है कि मौसम से जुड़े ये गंभीर मुद्दे और जलभराव जैसी समस्याएं भी इस समय सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं का एक बड़ा हिस्सा बन चुकी हैं, जहां विपक्ष सरकार को घेरने की फिराक में है। इन सब के बीच, गुजरात विधानसभा और भाजपा संगठन के भीतर आने वाले महीनों की चुनावी रणनीति, नई विकास योजनाओं और जनता से सीधे जुड़ने के लिए बड़े जनसंपर्क अभियानों को लेकर मैराथन बैठकों का दौर लगातार जारी है।
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