नाबालिग किशोर-किशोरी का विवाह रुकवाने पहुंची पुलिस, परिजनों ने किया हंगामा

एक नाबालिग किशोरी और किशोर की शादी की सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई करते हुए विवाह रुकवा दिया। इस दौरान मौके पर तनाव की स्थिति बन गई और परिजनों ने कार्रवाई का विरोध करते हुए हंगामा किया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बाल विवाह कानूनन अपराध है और बच्चों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।
जानकारी के अनुसार, देहरादून के लक्ष्मण चौक क्षेत्र में 14 वर्षीय किशोरी और उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर निवासी 17 वर्षीय किशोर के विवाह की तैयारी चल रही थी। सूचना मिलने पर राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग, पुलिस, चाइल्डलाइन और समर्पण संस्था की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और शादी रुकवा दी।
बताया गया कि दोनों नाबालिग विवाह करने की इच्छा जता रहे थे और उनके परिजन भी इसके पक्ष में थे। हालांकि अधिकारियों ने उन्हें समझाया कि कानूनी रूप से बालिग होने से पहले विवाह की अनुमति नहीं है और ऐसा करना बच्चों के अधिकारों के साथ-साथ उनके भविष्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
कार्रवाई के दौरान परिजनों और टीम के बीच काफी देर तक बहस और हंगामा चलता रहा। बाद में पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया और कानूनी प्रक्रिया शुरू की।
रेस्क्यू के बाद किशोरी को नारी निकेतन भेजा गया, जबकि किशोर को पुलिस संरक्षण में रखा गया है। दोनों के परिजनों से पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, दोनों नाबालिगों को संबंधित प्राधिकरण के समक्ष पेश किया जाएगा, जहां उनकी काउंसलिंग कर आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।
उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य बबीता सहोत्रा ने कहा कि बाल विवाह बच्चों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है और ऐसे मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी। वहीं आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने बताया कि दोनों नाबालिगों और उनके अभिभावकों की काउंसलिंग कराई जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
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