1 वोट से मिली जीत, सरपंच वोट के लिए अमेरिका से आए ससुर
चुनाव में एक वोट की कीमत वही जानता है, जिसने हार का सामना किया हो। एक वोट के चलते राजस्थान का मुख्यमंत्री बनने से सीपी जोशी चूक गए थे। एक ही वोट से अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार गिर गई थी। एक वोट से जीत होने का मतलब सपने को चार चाँद लगना है। इंडिया में चुनाव लड़ना भी अपने आप में एक कीर्तिमान स्थापित करना होता है। चुनाव लड़ते ही आधे सरपंच तो बन जाते हैं।
तेलंगाना के निर्मल जिले में एक रोचक मामला सामने आया है. यहां एक गांव में सरपंच पद की उम्मीदवार ने सिर्फ एक वोट के अंतर से जीत हासिल की, जिससे चुनावों में हर एक वोट का महत्व पता चलता है.
जिले की लोकेश्वरम मंडल स्थित ग्राम पंचायत बागापुर की यहां बात हो रही है. मुत्याला श्रीवेधा इस गांव की सरपंच बनी हैं. पंचायत चुनाव का नतीजा तब चर्चा में आया जब पता चला कि उनके ससुर मुत्याला इंद्रकरण रेड्डी खास तौर पर उनके पक्ष में वोट डालने के लिए अमेरिका से अपने पैतृक गांव आए थे.
चुनाव अधिकारियों के अनुसार, 426 रजिस्टर्ड वोटरों में से 378 ने वोट डाले. श्रीवेधा को 189 वोट मिले, जबकि उनकी सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी हर्षस्वाथी को 188 वोट मिले. एक वोट अमान्य घोषित किया गया.
इस घटना ने वोटर की भागीदारी के महत्व पर चर्चा शुरू कर दी है, खासकर स्थानीय निकाय चुनावों में, जहां एक भी वोट नतीजे तय कर सकता है.
सबसे पहले ख़बरें पाने के लिए -
👉 सच की तोप व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें



नारायण मनराल के आगे नही चली विरोधियों की निर्विरोध बने पनियाली के उप प्रधान
खनन एवं वन विभाग की जुगलबंदी से अस्तित्व में आएगा संजीवनी वन