हो जाइए तैयार, बदले जाएंगे भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले ये नोट; आरबीआई ने कर दिया बड़ा एलान
RBI Plastic Note: प्लास्टिक नोटों को पॉलीमर नोट कहा जाता है. ये आम प्लास्टिक पर नहीं, बल्कि एक खास, मज़बूत प्लास्टिक फिल्म पर प्रिंट होते हैं. इस फिल्म पर प्रिंटिंग के लिए सफेद कोटिंग की जाती है
RBI Plastic Note: UPI का जमाना है. लोग कैश कम ही रखते हैं. वजह सही है, क्योंकि कागज के नोट जल्दी खराब हो जाते हैं और आसानी से फट जाते हैं. हालांकि, यह प्रॉब्लम अब सॉल्व होने वाली है, क्योंकि भविष्य में आपकी जेब में जो नोट होगा वह प्लास्टिक का हो सकता है.
RBNNMPL, जो रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया की नोट प्रिंटिंग विंग है, ने प्लास्टिक नोट बनाने के लिए एक ग्लोबल टेंडर जारी किया है. कंपनी ने दुनिया भर की कंपनियों से पॉलीमर शीट बनाने और सप्लाई करने के लिए एक्सप्रेशन ऑफ़ इंटरेस्ट (EOI) मंगाए हैं, जिसका मतलब है कि पहली बार नोट छापने के लिए ज़रूरी प्लास्टिक मटीरियल खरीदने का प्रोसेस ऑफिशियली शुरू होता दिख रहा है. शुरुआती दौर में, 10 और 20 रुपये के नोट पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लॉन्च किए जा सकते हैं.
प्लास्टिक नोट असल में क्या होते हैं?
प्लास्टिक नोटों को पॉलीमर नोट कहा जाता है. ये आम प्लास्टिक पर नहीं, बल्कि एक खास, मज़बूत प्लास्टिक फिल्म पर प्रिंट होते हैं. इस फिल्म पर प्रिंटिंग के लिए सफेद कोटिंग की जाती है. नोट में एक ट्रांसपेरेंट विंडो भी होती है, जिसे इसका सबसे ज़रूरी सिक्योरिटी फीचर माना जाता है. यही वजह है कि ऐसे नोटों की नकली बनाना बहुत मुश्किल होता है.
कौन से नोट सबसे पहले बदले जा सकते हैं?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर पायलट प्रोजेक्ट शुरू होता है, तो 10 और 20 रुपये के नोट पॉलीमर से बनने वाले पहले नोट हो सकते हैं. वजह साफ़ है: ये सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होते हैं और सबसे जल्दी खराब होते हैं.
RBI का यह कदम कितना अहम है?
BRBNMPL वही कंपनी है जो मैसूर और सालबोनी में अपने प्रेस में इंडियन करेंसी प्रिंट करती है. यह कंपनी पॉलीमर शीट खरीदने के लिए ग्लोबल कंपनियों से प्रपोज़ल मांग रही है, यह सिर्फ़ एक आइडिया नहीं है, बल्कि तैयारी का एक पक्का संकेत है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अगले महीने मार्केट में प्लास्टिक के नोट मिल जाएंगे. यह प्रोसेस अभी शुरुआती स्टेज में है.
5 जून, 2026 को मॉनेटरी पॉलिसी के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में, RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि पॉलीमर नोट के प्रपोज़ल पर विचार किया जा रहा है. उन्होंने साफ़ किया कि कोई आखिरी फ़ैसला नहीं हुआ है और सेंट्रल बैंक इसके फ़ायदे और नुकसान देख रहा है.
भारत में पॉलीमर नोट का आइडिया
भारत में पॉलीमर नोट का आइडिया लगभग 14 साल पुराना है. इस पर पहली बार 2009 के आसपास चर्चा हुई थी. 2012 में, सरकार ने 10 रुपये के 1 बिलियन पॉलीमर नोटों के फील्ड ट्रायल को मंज़ूरी दी.
2014 में, कोच्चि, मैसूर, जयपुर, शिमला और भुवनेश्वर में अलग-अलग मौसम में इनका टेस्ट करने का फ़ैसला किया गया. 2016 में, सरकार ने घोषणा की कि सामान खरीदने का प्रोसेस शुरू हो गया है, लेकिन टेक्निकल और ऑपरेशनल कारणों से प्लान आगे नहीं बढ़ सका और प्रोजेक्ट को रोक दिया गया.
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