जब अपनों ने ही खोल दिया मोर्चा! बीजेपी नेताओं के बच्चों का यह विरोध प्रदर्शन बना पार्टी के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द

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राजनीति की दुनिया में कब क्या हो जाए, इसका अंदाजा लगाना नामुमकिन है। लेकिन जरा सोचिए, जब किसी सत्तारूढ़ पार्टी के दिग्गज नेताओं के अपने ही घरों के चिराग सरकार के खिलाफ बगावत का झंडा उठा लें, तो राजनीतिक गलियारों में भूचाल आना तो तय है। हाल ही में पेपर लीक के खिलाफ युवाओं और छात्रों के नेतृत्व में उठे इस जबरदस्त विरोध प्रदर्शन ने भारतीय जनता पार्टी की नींद उड़ा दी है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस आंदोलन की आंच अब सीधे बीजेपी के अपने ही नेताओं के घरों तक पहुंच चुकी है, जो पार्टी के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बन गई है।

जब नेताओं की बेटियों ने संभाला मोर्चा

पिछले हफ्ते केंद्र की सत्ताधारी पार्टी पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को उनके पद से हटाने के लिए भारी दबाव बना हुआ था। इस दबाव को स्वीकार करने के पीछे एक बहुत बड़ा कारण यह भी था कि विरोध की यह आग अब अपनों के घरों तक सुलगने लगी थी। असम गण परिषद के एक मंत्री, ओडिशा की एक वरिष्ठ बीजेपी सांसद और उत्तर प्रदेश के एक पूर्व विधायक की बेटियों का इस आंदोलन में कूदना बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय बन गया है।

असम के कैबिनेट मंत्री केशव महंता की बेटी दिबिसा ने 23 जुलाई को गुवाहाटी में हुए प्रदर्शन में खुलकर हिस्सा लिया। वहीं दूसरी ओर, भुवनेश्वर से बीजेपी सांसद अपराजिता सारंगी की बेटी अर्चिता सचिन रहर और उत्तर प्रदेश के पूर्व बीजेपी विधायक विक्रम सिंह की बेटी यशस्विनी राजे सिंह ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी ही पार्टी और सरकार पर तीखे हमले किए। ये सभी लड़कियां ‘जेन जी’ (Gen Z) यानी आधुनिक पीढ़ी से ताल्लुक रखती हैं, जिनका जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ है।

सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक गरमाया मामला

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए धरने और छात्रों के प्रदर्शन के समर्थन में उतरीं असम के मंत्री की बेटी दिबिसा के तीखे तेवर कैमरे में कैद हो गए। विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे लगाते और छात्रों के साथ हुए लाठीचार्ज व आंसू गैस छोड़े जाने की घटना पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए साफ सुना गया। उन्होंने कहा कि छात्रों का यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण था, जिसे जबरन दबाने की कोशिश की गई, लेकिन इन बहादुर छात्रों ने उन्हें भी यहां आने के लिए प्रेरित किया।

इस बीच, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस पूरे मामले पर बेहद बेबाक अंदाज में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनके बच्चे क्या कहते हैं, इसके लिए वे कैसे जवाबदेह हो सकते हैं? उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब बच्चे बालिग हो जाते हैं, तो उनके कामों और बयानों को उनके माता-पिता से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर भविष्य में उनका बेटा भी कुछ ऐसा कहे जो उन्हें पसंद न हो, तो किसी को हैरान होने की जरूरत नहीं है।

वायरल इंस्टाग्राम पोस्ट और नेताओं की सफाई

उधर, बीजेपी सांसद अपराजिता सारंगी की बेटी अर्चिता की एक इंस्टाग्राम स्टोरी ने सोशल मीडिया पर सनसनी फैला दी। इस स्टोरी में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का जश्न मनाते हुए तंज कसा गया था। हालांकि, बाद में इस पोस्ट को डिलीट कर दिया गया। जब इस बारे में सांसद अपराजिता सारंगी से सवाल किया गया, तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उनकी बेटी ‘जेन जी’ पीढ़ी से है और उसने अपने दोस्तों के साथ नासमझी में वह स्टोरी पोस्ट कर दी थी। जब उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ, तो उन्होंने उसे तुरंत डिलीट भी कर दिया। सांसद ने खुद भी सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर धर्मेंद्र प्रधान के नैतिक जिम्मेदारी लेने के फैसले की सराहना की थी।

पूर्व विधायक की बेटी ने भी सरकार को घेरा

इस विरोध की फेहरिस्त में उत्तर प्रदेश के फतेहपुर से दो बार विधायक रह चुके विक्रम सिंह की बेटी यशस्विनी राजे सिंह का नाम भी शामिल है। यशस्विनी ने पिछले कुछ हफ्तों से लगातार सोशल मीडिया पर पेपर लीक और 20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार और शीर्ष नेतृत्व की खुलकर आलोचना की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर तीखा तंज कसते हुए लिखा कि सार्वजनिक हार के बाद शीर्ष नेतृत्व इस स्थिति से कैसे निपटेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।

क्यों बीजेपी के लिए असहज स्थिति है यह?

इससे पहले नागरिक संशोधन कानून (CAA) या किसान आंदोलन के समय हुए विरोध प्रदर्शनों से बीजेपी ने राजनीतिक रूप से मुकाबला कर लिया था, लेकिन छात्रों और युवाओं के इस मौजूदा आंदोलन ने पार्टी को अंदर से हिलाकर रख दिया है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि इस बार सड़कों पर उतरे इन युवाओं और विरोध करने वाले बच्चों में पार्टी के अपने ही नेताओं और समर्थकों के परिवारों के चेहरे शामिल हैं, जिसने पार्टी के लिए एक नई और गंभीर राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है।

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