हल्द्वानी-आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाने पर वार्ड-9 के पार्षद का चुनाव निरस्त, तीन माह में होंगे दोबारा चुनाव

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हल्द्वानी। नैनीताल जिला एवं सत्र न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में नगर निगम के वार्ड संख्या-9 तल्ली बमौरी से निर्वाचित पार्षद राजेंद्र सिंह जीना के निर्वाचन को अवैध घोषित कर दिया है। अदालत के आदेश के बाद अब इस वार्ड में तीन माह के भीतर पुनः चुनाव कराए जाएंगे। साथ ही राजेंद्र सिंह जीना आगामी उपचुनाव में प्रत्याशी भी नहीं बन सकेंगे।

दरअसल, 23 जनवरी 2025 को हुए नगर निगम चुनाव में वार्ड संख्या-9 से भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी गिरीश नैनवाल, राजेंद्र सिंह जीना और जितेंद्र जोशी मैदान में थे। 25 जनवरी 2025 को घोषित परिणामों में राजेंद्र सिंह जीना को 836 वोट मिले थे, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी गिरीश नैनवाल को 771 और जितेंद्र जोशी को 111 मत प्राप्त हुए थे।

चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद गिरीश नैनवाल ने न्यायालय में चुनाव याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि राजेंद्र सिंह जीना ने नामांकन पत्र में अपने विरुद्ध दर्ज आपराधिक मुकदमों की जानकारी छिपाई और स्वयं को स्वच्छ छवि वाले प्रत्याशी के रूप में प्रस्तुत किया।

करीब एक वर्ष पांच महीने तक चली सुनवाई के बाद जिला न्यायाधीश प्रशांत जोशी की अदालत ने राजेंद्र सिंह जीना के निर्वाचन को अवैध करार देते हुए सीट को रिक्त घोषित कर दिया।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि नामांकन पत्र के साथ आपराधिक मामलों की जानकारी न देना भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आता है। न्यायालय ने राज्य निर्वाचन आयोग और जिला निर्वाचन अधिकारी को वार्ड-9 में तीन माह के भीतर पुनः चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में प्रत्याशियों को नामांकन पत्र के साथ अपने विरुद्ध दर्ज सभी आपराधिक मामलों का अनिवार्य रूप से उल्लेख करना होगा। निर्वाचन अधिकारी नामांकन की जांच के दौरान इन तथ्यों का परीक्षण कर विधिसम्मत निर्णय लेंगे।

फैसले के बाद गिरीश नैनवाल ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और यह निर्णय वार्ड-9 की जनता के विश्वास की जीत है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोपरि है।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला स्थानीय निकाय चुनावों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण नजीर साबित हो सकता है। साथ ही यह संदेश भी देता है कि चुनावी प्रक्रिया में तथ्यों को छिपाने वालों के खिलाफ न्यायिक कार्रवाई संभव है।