दिग्गज नेता अचानक दिल्ली तलब, कांग्रेस हाईकमान का बड़ा संदेश आया सामने

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mp congress on alert top leaders called to delhi
केरलम के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र…

होने वाले राज्यसभा चुनाव ने कांग्रेस संगठन की धड़कनें तेज कर दी हैं।

भोपाल: मध्यप्रदेश में होने वाले राज्यसभा चुनाव ने कांग्रेस संगठन की धड़कनें तेज कर दी हैं। पार्टी आलाकमान इस बार कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रहा। दूसरे राज्यों में क्रॉस वोटिंग से मिले सियासी झटकों ने कांग्रेस नेतृत्व को इतना सतर्क कर दिया है कि अब दिल्ली खुद मैदान में उतर चुकी है। संदेश साफ है…किसी भी कीमत पर राज्यसभा की सीट नहीं गंवानी है।

इसी रणनीति के तहत प्रदेश के बड़े नेताओं को लगातार दिल्ली बुलाया जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बाद अब पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव को भी अचानक दिल्ली तलब किया गया है। यह सिर्फ औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि विधायकों की नब्ज टटोलने और संगठन की मजबूती का आकलन करने की कवायद मानी जा रही है।

सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस हाईकमान ने प्रदेश नेतृत्व को दो टूक संदेश दिया है कि चुनाव के दौरान एक भी विधायक टूटना नहीं चाहिए। पार्टी को आशंका है कि यदि कहीं भी असंतोष या सेंधमारी की गुंजाइश बची, तो उसका सीधा असर राज्यसभा की तीसरी सीट पर पड़ सकता है। यही वजह है कि विधायकों की गतिविधियों पर भी बारीकी से नजर रखी जा रही है।

दरअसल, बिहार, हरियाणा और ओडिशा जैसे राज्यों में हुए राज्यसभा चुनाव कांग्रेस के लिए किसी चेतावनी से कम नहीं रहे। क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक प्रबंधन की कमजोरियों ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया था। अब मध्यप्रदेश में वैसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए दिल्ली दरबार ने पूरी चुनावी प्रक्रिया को अपने नियंत्रण में ले लिया है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस के भीतर यह असामान्य सक्रियता सिर्फ एक सीट बचाने की कवायद नहीं, बल्कि संगठनात्मक अनुशासन की भी परीक्षा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि दिल्ली की सख्त निगरानी और नेताओं की लगातार बैठकों का असर कितना पड़ता है। फिलहाल इतना तय है कि मध्यप्रदेश का राज्यसभा चुनाव कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा और प्रबंधन दोनों की बड़ी परीक्षा बन चुका है।