सिर्फ एक जगह BJP ने सबको पछाड़ा, जानिए क्यों खास है नयागांव

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पूरे पंजाब में AAP के दबदबे के बावजूद नयागांव नगर परिषद में बीजेपी ने 21 में से 16 वार्ड जीतकर विपक्ष और सत्ताधारी दल दोनों को पीछे छोड़ा

Nayagaon Municipal Council: पंजाब के शहरी निकाय चुनावों में आम आदमी पार्टी (AAP) ने 102 स्थानीय निकायों में शानदार प्रदर्शन करते हुए लगभग आधे वार्डों पर कब्जा जमाया और आठ में से पांच नगर निगमों में जीत हासिल की। कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही, जबकि बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल (SAD) का संयुक्त प्रदर्शन भी कांग्रेस के बराबर नहीं पहुंच सका।

AAP की इस बड़ी जीत के बीच एक ऐसा परिणाम सामने आया जिसने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर खींचा। यह परिणाम था मोहाली जिले के नयागांव नगर परिषद का, जहां बीजेपी ने न सिर्फ जीत दर्ज की बल्कि विपक्ष और सत्ताधारी दल दोनों का लगभग सफाया कर दिया।

नयागांव में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत

नयागांव नगर परिषद की 21 सीटों में से बीजेपी ने 16 वार्ड जीतकर दो-तिहाई से अधिक बहुमत हासिल किया। वहीं सत्तारूढ़ AAP और मुख्य विपक्षी कांग्रेस को सिर्फ एक-एक सीट मिली। तीन सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे।

सबसे बड़ा झटका शिरोमणि अकाली दल को लगा, जिसने 17 वार्डों में उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन एक भी सीट नहीं जीत सकी। गौरतलब है कि 2021 के चुनाव में अकाली दल ने इसी निकाय में 10 सीटें जीती थीं।

पूरे पंजाब में बीजेपी को केवल दो स्थानीय निकायों में स्पष्ट बहुमत मिला एक अबोहर नगर निगम और दूसरा नयागांव नगर परिषद। हालांकि अबोहर में AAP ने 20 सीटें जीतकर मजबूत चुनौती दी, लेकिन नयागांव में बीजेपी की जीत पूरी तरह एकतरफा रही। यही कारण है कि इसे पंजाब में बीजेपी का सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन माना जा रहा है।

कांग्रेस और अकाली दल का गढ़ रहा है नयागांव

नयागांव की राजनीतिक अहमियत उसकी भौगोलिक स्थिति और इतिहास से जुड़ी हुई है। मोहाली जिले में स्थित यह क्षेत्र चंडीगढ़ की सीमा से सटा हुआ है और पंजाब-हरियाणा के मुख्यमंत्रियों के आधिकारिक आवास, सचिवालय, हाईकोर्ट और कैपिटल कॉम्प्लेक्स के बेहद करीब है।

यहां बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त नौकरशाह, न्यायिक अधिकारी, राजनेता और अन्य प्रभावशाली लोग निवास करते हैं। लंबे समय तक यह क्षेत्र कांग्रेस और अकाली दल का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है।

2006 में तत्कालीन कांग्रेस नेता और मंत्री जगमोहन सिंह कंग के प्रयासों से इसे ग्राम पंचायत से नोटिफाइड एरिया कमेटी बनाया गया था। बाद में 2017 में अकाली दल सरकार ने इसे नगर परिषद का दर्जा दिया।

2021 के चुनाव में किसान आंदोलन की पृष्ठभूमि में बीजेपी को यहां केवल तीन सीटें मिली थीं, जबकि अकाली दल ने 10 और कांग्रेस ने छह सीटें जीती थीं। ऐसे में 2026 का परिणाम बीजेपी के लिए बड़ा राजनीतिक उलटफेर माना जा रहा है।

बीजेपी की जीत के पीछे क्या रहे कारण?

नयागांव नगर परिषद चुनाव में कुल 87 उम्मीदवार मैदान में थे और 44,984 मतदाताओं में से 26,203 लोगों ने मतदान किया।

स्थानीय बीजेपी नेताओं के अनुसार, इस जीत के पीछे दो प्रमुख कारण रहे। पहला, देश के अन्य राज्यों में बीजेपी सरकारों के कामकाज को लेकर मतदाताओं में सकारात्मक धारणा। दूसरा, नयागांव में बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों से आकर बसे मतदाता, जिनके पास स्थानीय वोटर पहचान पत्र हैं।

बीजेपी नयागांव मंडल अध्यक्ष और वार्ड नंबर-14 से विजेता भूपिंदर सिंह का कहना है कि लोगों ने विकास की उम्मीद में बीजेपी को चुना। उनका तर्क था कि जब पंचकूला और चंडीगढ़ विकसित हो सकते हैं, तो नयागांव क्यों नहीं।

मतदाताओं ने अनुभवी चेहरों पर भी भरोसा जताया। बीजेपी की वरिष्ठ पार्षद तरनजीत कौर लगातार तीसरी बार जीतीं, जबकि श्याम लाल गुर्जर चौथी बार पार्षद बने। सुरिंदर कौशिश और ममता कौशिश दंपती ने भी दूसरी बार जीत हासिल की।

AAP के गढ़ मोहाली में बीजेपी का अकेला किला

मोहाली जिले में जिन सात शहरी निकायों के चुनाव हुए, उनमें नयागांव बीजेपी की अकेली बड़ी जीत बनकर उभरा। AAP ने मोहाली नगर निगम, जीरकपुर, डेराबस्सी, लालड़ू और बनूड़ में शानदार जीत दर्ज की। कुराली में भी AAP सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और निर्दलीयों के समर्थन से सत्ता हासिल करने की स्थिति में है।

नयागांव वर्तमान में आनंदपुर साहिब लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है, जहां से AAP के सांसद मालविंदर सिंह कांग प्रतिनिधित्व करते हैं। वहीं खरड़ विधानसभा सीट से AAP विधायक अनमोल गगन मान निर्वाचित हैं। ऐसे में बीजेपी की यह जीत AAP के प्रभाव वाले क्षेत्र में उसकी संगठनात्मक ताकत का संकेत मानी जा रही है।