ट्रक ड्राइवर की बेटी ने रचा इतिहास: किराए के घर में रहने वाले ट्रक ड्राइवर की बेटी बनी अफसर, UPSC में गाड़ा सफलता का झंडा

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कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों, तो तंगहाली भी रास्ता नहीं रोक सकती। उत्तराखंड के पिरान कलियर की रहने वाली फैरुज फातिमा ने इस बात को सच कर दिखाया है। एक ट्रक ड्राइवर की बेटी ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर देश की सबसे कठिन परीक्षा ‘सिविल सेवा’ को पास कर न केवल अपने परिवार का, बल्कि पूरे इलाके का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।

पिरान कलियर निवासी इकबाल त्यागी ट्रक चलाकर अपने परिवार का गुजारा करते हैं। उनकी बेटी फैरुज फातिमा ने अपनी शुरुआती शिक्षा और इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई यूपी बोर्ड से पूरी की। इसके बाद आंखों में बड़े सपने लेकर वह दिल्ली चली गईं। हालांकि, शुरुआती कोशिशों में उन्हें नाकामी हाथ लगी, लेकिन फैरुज ने हार मानने के बजाय अपनी कमियों पर काम किया और लगातार मेहनत जारी रखी।

नौकरी के साथ जारी रखा संघर्ष

फैरुज की प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2024 में उनका चयन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) में सहायक प्रबंधक (Assistant Manager) के पद पर हो गया था। वर्तमान में वह आरबीआई में सहायक महाप्रबंधक (Assistant General Manager) के रूप में तैनात हैं। इतनी बड़ी जिम्मेदारी संभालने के बावजूद उन्होंने अपना असली लक्ष्य नहीं छोड़ा। नौकरी के साथ-साथ वह सिविल सेवा की तैयारी करती रहीं और आखिरकार शुक्रवार को जारी हुए नतीजों में उन्होंने 708वीं रैंक हासिल कर अपनी मंजिल पा ली।

बधाइयों का लगा तांता

फैरुज की इस शानदार उपलब्धि पर पूरे इलाके में खुशी की लहर है। नगर पंचायत पिरान कलियर की चेयरमैन समीना, सभासद नाजिम त्यागी, राशिद अली, अमजद मलिक और अन्य गणमान्य लोगों ने उनके घर पहुंचकर बधाई दी। डॉ. शहजाद, गुलफाम साबरी, दानिश साबरी और अकरम प्रधान समेत क्षेत्र के कई दिग्गजों ने फैरुज को भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं।

बेटे की मौत के बाद बेटी को बनाया सहारा

फैरुज का यह सफर आसान नहीं था। उनकी मां एक गृहिणी हैं और पिता सीमित संसाधनों के बीच घर चलाते हैं। परिवार आज भी कलियर में किराए के मकान में रहता है। कुछ साल पहले एक सड़क हादसे में इकबाल त्यागी ने अपने बेटे को खो दिया था, लेकिन इस दुख के बावजूद उन्होंने अपनी इकलौती बेटी को ही बेटा मानकर उसके सपनों में कभी कमी नहीं आने दी। फैरुज ने अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता के त्याग और विश्वास को दिया है।