त्रिवेंद्र पर सीबीआई जांच का खतरा मंडराया, धामी सरकार वापस लेगी याचिका

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उत्तराखंड से आज की बड़ी खबर आ रही है। ये खबर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता त्रिवेंद्र सिंह रावत को परेशान कर सकती है वहीं राज्य के युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सियासी चातुर्य को भी बता रही है। दरअसल उत्तराखंड सरकार ने त्रिवेंद्र के खिलाफ सीबीआई जांच को रोकने के लिए डाली गई एसएलपी को वापस लेने का मन बना लिया है। जाहिर है कि ये एसएलपी वापस ली गई तो त्रिवेंद्र की मुश्किलें बढ़ना तय है।


आगे बढ़ें इससे पहले इस पूरे मामले का बैकग्राउंड समझ लीजिए। दरअसल त्रिवेंद्र सिंह रावत जिस समय मुख्यमंत्री थे उस दौरान पत्रकार उमेश कुमार ने त्रिवेंद्र को लेकर एक खुलासा किया। आरोप लगा कि त्रिवेंद्र ने झारखंड का बीजेपी प्रदेश प्रभारी रहते हुए पैसों का बड़ा लेनदेन किया है।


उमेश कुमार के इस खुलासे के बाद हड़कंप मच गया। हालात ये हुए कि त्रिवेंद्र सरकार ने उमेश कुमार पर सरकार को अस्थिर करने और राजद्रोह का मुकदमा कर दिया। मामला कोर्ट में पहुंचा। उधर उमेश कुमार ने कोर्ट में इस मामले की सीबीआई जांच की मांग रख दी। इसके साथ ही अपने खिलाफ हुए एफआईआर को खारिज करने की मांग भी की। नैनीताल हाईकोर्ट ने उमेश कुमार की दोनों मांगें मान लीं और एफआईआर खारिज करते हुए सीबीआई जांच के आदेश दे दिए। इसके बाद तत्कालीन त्रिवेंद्र सरकार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट चली गई। सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने सीबीआई जांच रोकने के लिए एक SLP दायर कर दी।


अब SLP वापस लेगी सरकार
उत्तराखंड सरकार ने अब इस एसएलपी को वापस लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी डाल दी है। सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी वापस लेने का मतलब है कि नैनीताल हाईकोर्ट के सीबीआई जांच के आदेश पर अब सरकार को कोई आपत्ति नहीं होगी। अब इस मामले में त्रिवेंद्र को आगे आने होगा और अपने खिलाफ जांच रोकने की अर्जी लगानी होगी। ऐसे में अगर सुप्रीम कोर्ट उनके तर्क से सहमत हुआ तो ठीक है वरना सीबीआई जांच तय है।


धामी का एक दांव और त्रिवेंद्र चित
पिछले कुछ दिनों से त्रिवेंद्र और धामी के बीच के संबंध ठीक नहीं दिख रहे थे। त्रिवेंद्र लगातार धामी सरकार को लेकर बयानबाजी कर रहे थे। यही नहीं उन्होंने स्मार्ट सिटी के मसले पर धामी सरकार की जमकर खिंचाई की और मीडिया में बयान दिए। इसी से समझा जा रहा था कि दोनों के बीच रिश्तों में तल्खी आने लगी है। हालांकि दिलचस्प ये भी है कि भले ही त्रिवेंद्र लगातार बयानबाजी करते रहें हों

लेकिन सीएम धामी ने कभी भी त्रिवेंद्र के खिलाफ कोई बयान नहीं दिया। वो लगातार ऐसे सवालों को टालते रहे लेकिन धामी सरकार का एसएलपी वापस लेने का फैसला बता रहा है कि सूबे का पॉवर सेंटर न सिर्फ चेंज हुआ है बल्कि धामी के दांव से फिलहाल त्रिवेंद्र चित भी हुए हैं।

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