PM मोदी की अपील और सरकार का बड़ा कदम, क्या भारत में अचानक धड़ाम से गिरने वाले हैं सोने के दाम?

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सोने की कीमतों में पिछले काफी समय से लगातार उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। इस साल जनवरी के महीने में सोना अपने उच्चतम शिखर पर पहुंच गया था, लेकिन उसके बाद से इसमें एक बड़ी गिरावट देखी जा चुकी है। आज यानी सोमवार को भी सोने के भाव में गिरावट दर्ज की गई और यह और नीचे लुढ़क गया। इस गिरावट ने उन लोगों के मन में सवाल खड़े कर दिए हैं जो सोने में निवेश करने की सोच रहे हैं।

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक, इस साल मई के महीने में वैश्विक स्तर पर जहां सोने की कीमतों में गिरावट आई है, वहीं भारतीय बाजार में इसके उलट तेजी देखने को मिली है। हालांकि, सोने की कीमतों का इतिहास गवाह है कि जब भी इसमें कोई जबरदस्त तेजी आती है, तो उसके ठीक बाद एक बड़ी गिरावट भी दस्तक देती है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या आने वाले समय में भारतीय बाजार में भी सोना सस्ता होने वाला है? वैसे आपको बता दें कि इस साल अब तक भारतीय घरेलू बाजार में सोने ने निवेशकों को काफी शानदार रिटर्न दिया है।

दुनिया और भारत के बाजारों में कितना है अंतर?

हाल ही में आई वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की एक रिपोर्ट, जिसका शीर्षक ‘गोल्ड मार्केट कमेंट्री: हाइकिंग अप अ वोल्केनो’ है, के मुताबिक मई के महीने में वैश्विक स्तर पर सोने के दाम में 1.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके विपरीत, इसी अवधि के दौरान भारत में सोने की कीमतों में 4.1 प्रतिशत की जोरदार तेजी देखी गई। रिपोर्ट में बताया गया है कि मई के अंत में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,546 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर बंद हुआ था। अगर भारतीय घरेलू बाजार की बात करें, तो इस साल अब तक सोने ने अपने निवेशकों को करीब 20 प्रतिशत का बंपर रिटर्न कमा कर दिया है।

आखिर भारत में क्यों बढ़ गए सोने के दाम?

अब आपके मन में यह सवाल जरूर उठ रहा होगा कि जब पूरी दुनिया में सोना सस्ता हो रहा था, तो भारत में इसके दाम क्यों बढ़ रहे थे? दरअसल, भारत में सोने की कीमतों में आई इस तेजी की मुख्य वजह पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और सर्राफा बाजारों में मची भारी उथल-पुथल है।

इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में राष्ट्र को संबोधित करते हुए देश के नागरिकों से एक खास अपील की थी। पीएम मोदी ने लोगों से कहा था कि वे फिलहाल कुछ समय के लिए सोने की खरीदारी को टाल दें। प्रधानमंत्री की इस अपील और बाजार में पहले से मौजूद ऊंची कीमतों के असर के कारण भारत, दक्षिण कोरिया और जापान जैसे भौतिक बाजारों में सोने की मांग में थोड़ी नरमी देखी गई और कुछ डिस्काउंट भी दिया गया। इस अपील के बाद सरकार ने देश के भुगतान संतुलन पर पड़ रहे दबाव को कम करने और सोने के अंधाधुंध आयात को रोकने के लिए इस पर आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) बढ़ा दिया था। सरकार के इसी फैसले का सीधा असर सोने की कीमतों पर पड़ा और घरेलू बाजार में इसके दाम बढ़ गए।

क्या कहता है सोने की कीमतों का इतिहास?

अगर हम पिछले दो दशकों यानी 20 सालों के मूल्य इतिहास पर नजर डालें, तो एक साफ पैटर्न नजर आता है। इतिहास का इशारा है कि जब भी सोने में कोई बड़ी और रिकॉर्ड तोड़ तेजी आती है, तो उसके बाद बाजार में एक बड़ी गिरावट भी देखने को मिलती है। सितंबर 2022 से शुरू हुई सोने की रिकॉर्ड तोड़ रैली इसी साल 29 जनवरी को अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर यानी 5,594.82 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई थी। इस पूरी अवधि के दौरान सोने ने निवेशकों को करीब 245 प्रतिशत का छप्परफाड़ रिटर्न दिया।

हालांकि, इस ऐतिहासिक शिखर को छूने के बाद से ही सोने की कीमतों में नरमी का रुख बना हुआ है। इंटरनेशनल मार्केट में सोना अपने ऑल-टाइम हाई से करीब 22 प्रतिशत तक टूटकर सोमवार सुबह 4,368 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। इतिहास के पुराने ट्रेंड और पैटर्न को समझें तो आने वाले महीनों या सालों में सोने की कीमतों में अभी और भी बड़ी गिरावट आ सकती है। जानकारों का मानना है कि इस बड़ी गिरावट के बाद ही सोना एक बार फिर से बढ़त की राह पर लौटेगा।