ईरान युद्ध के बीच मोदी सरकार का बड़ा धमाका! पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी सीधे 0%, देखें नई दरें

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नई दिल्ली: ईरान युद्ध के चलते पूरी दुनिया में मचे हाहाकार और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बीच मोदी सरकार ने देश की जनता को बड़ी राहत देने के लिए एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने ज्यादा एथेनॉल मिक्स वाले पेट्रोल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। सरकार द्वारा जारी आधिकारिक नोटिफिकेशन के मुताबिक, अब 22% से लेकर 30% तक एथेनॉल मिले पेट्रोल पर कोई एक्साइज ड्यूटी नहीं देनी होगी।

बाजार के जानकारों का मानना है कि सरकार के इस कदम से आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को काबू में रखने और उन्हें स्थिर बनाने में बहुत बड़ी मदद मिल सकती है। इसके साथ ही देश में एथेनॉल की मांग में जबरदस्त तेजी आएगी, जिसका सीधा फायदा हमारे देश के अन्नदाता यानी किसानों को होगा।

कच्चे तेल का संकट और सरकार की नई रणनीति

दरअसल, ईरान युद्ध के कारण ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में आग लगी हुई है। क्रूड ऑयल के दाम 114 डॉलर प्रति बैरल के डरावने स्तर तक पहुंच गए थे। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है और वह दुनिया में क्रूड ऑयल का तीसरा सबसे बड़ा आयातक और उपभोक्ता देश है। तेल महंगा होने से देश का आयात बिल लगातार बढ़ रहा है, जिसका बुरा असर हमारे चालू खाते के घाटे (CAD) पर पड़ रहा है।

इतना ही नहीं, इस संकट की वजह से डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में भी काफी गिरावट देखी जा रही है। यही वजह है कि सरकार अब विदेशी तेल पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए तेजी से वैकल्पिक ईंधन (Alternative Fuel) को बढ़ावा दे रही है, ताकि देश का कीमती पैसा बाहर जाने से बचाया जा सके।

क्या है आम जनता का डर और इंजन खराब होने का खतरा?

सरकार ने ज्यादा एथेनॉल वाले पेट्रोल पर टैक्स तो खत्म कर दिया है, लेकिन टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) की एक रिपोर्ट में एक बड़ी चिंता भी जताई गई है। आशंका है कि सरकार एथेनॉल ब्लेंडिंग का लेवल बढ़ाने का कोई जबरन आदेश नहीं देगी, बल्कि फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों को खरीदने का फैसला पूरी तरह ग्राहकों की मर्जी पर छोड़ सकती है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि कई एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि E20 से E25 (25% एथेनॉल) पेट्रोल पर बहुत तेजी से शिफ्ट होने के कारण सड़क पर चल रही पुरानी गाड़ियों के इंजन खराब हो सकते हैं।

अगर आंकड़ों को देखें, तो साल 2012 से मार्च 2023 के बीच बनी ज्यादातर कारें और बाइक E10 (10% एथेनॉल) के लिए ही बनी थीं। इसके बाद अप्रैल 2023 से बनने वाली गाड़ियां E20 के अनुकूल आईं, लेकिन अप्रैल 2025 से बिकने वाली गाड़ियां ही पूरी तरह से 20% एथेनॉल झेलने के लिए तैयार हैं। अब सरकार E22, E25, E27 और E30 के लिए नए स्टैंडर्ड तैयार कर रही है, जिससे पेट्रोल में 30% तक एथेनॉल मिलाया जा सके। इसके अलावा E25 ईंधन वाली गाड़ियों का ट्रायल भी शुरू किया जा रहा है।

एक्सपर्ट्स की चेतावनी और ऑटो इंडस्ट्री की तैयारी

ऑटो सेक्टर के दिग्गजों और तकनीकी एक्सपर्ट्स का साफ कहना है कि देश में दौड़ रहीं ज्यादातर पुरानी पेट्रोल गाड़ियां E20 फ्यूल के हिसाब से भी पूरी तरह फिट नहीं हैं। ऐसे में अगर सरकार ने एथेनॉल मिक्सिंग को अनिवार्य रूप से बढ़ाया, तो गाड़ियों का माइलेज तो कम होगा ही, साथ ही गाड़ियों के मेंटेनेंस और रिपेयरिंग का खर्च भी जेब पर भारी पड़ेगा। इससे देश के करोड़ों वाहन मालिक सीधे तौर पर प्रभावित हो सकते हैं।

हालांकि, ऑटो इंडस्ट्री भविष्य की फ्लेक्स फ्यूल (Flex Fuel) गाड़ियां बाजार में उतारने के लिए पूरी तरह कमर कस चुकी है। मारुति सुज़ुकी और हीरो मोटोकॉर्प जैसी बड़ी कंपनियों की फ्लेक्स फ्यूल गाड़ियां पहले ही सड़कों पर दौड़ रही हैं और बाकी कंपनियां भी अपने नए मॉडल लॉन्च करने की तैयारी में हैं। ऑटो इंडस्ट्री ने सरकार को सलाह दी है कि इस बदलाव को धीरे-धीरे लागू किया जाए। दूसरी तरफ, जिन राज्यों में गन्ने की पैदावार सबसे ज्यादा होती है और जो देश की ताकतवर शुगर लॉबी है, वे इस फैसले को जल्द से जल्द लागू करने की वकालत कर रहे हैं क्योंकि इससे चीनी मिलों और गन्ना किसानों की बंपर कमाई होने वाली है।