हमारी थाली में ‘जहर’ परोस रहे मिलावटखोर! संसद में सरकार का बड़ा खुलासा
नई दिल्ली
लोकसभा में 24 जुलाई 2026 को सांसद राजाभाऊ पराग प्रकाश वाजे द्वारा पूछे गए एक बेहद अहम सवाल के जवाब में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव (Prataprao Jadhav) ने यह चौंकाने वाला डाटा पेश किया। सरकार के इस खुलासे ने साफ कर दिया है कि फूड सेफ्टी के मामले में अभी भी जमीनी स्तर पर बहुत कुछ किया जाना बाकी है।
उत्तर प्रदेश बना मिलावट का ‘हब’, राजस्थान और तमिलनाडु भी पीछे नहीं
संसद में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, बीते पांच वित्तीय वर्षों (Financial Years) में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) लगातार सबसे ज्यादा ‘नॉन-कन्फॉर्मिंग’ (Non-conforming) यानी तय मानकों पर खरे न उतरने वाले सैंपलों के मामले में टॉप पर बना हुआ है। इसके बाद राजस्थान और तमिलनाडु का नंबर आता है।
आइए एक नज़र डालते हैं पिछले पांच सालों में टॉप-3 राज्यों के फेल हुए फूड सैंपलों की ईयर-वाइज़ (Year-wise) रिपोर्ट पर:
| वित्तीय वर्ष (Financial Year) | उत्तर प्रदेश (UP) | राजस्थान (Rajasthan) | तमिलनाडु (Tamil Nadu) |
| 2021-22 | 13,153 | (डेटा टॉप-3 में नहीं) | 3,778 |
| 2022-23 | 18,108 | 3,965 | 7,924 |
| 2023-24 | 16,183 | 3,493 | 2,237 |
| 2024-25 | 16,500 | 3,788 | 2,240 |
| 2025-26 (प्रोविजनल) | 20,427 | 4,594 | 3,984 |
डेटा विश्लेषण: इन आंकड़ों से साफ है कि उत्तर प्रदेश हर साल इस लिस्ट में सबसे ऊपर रहा है। हालांकि, सरकार और अधिकारियों का यह भी तर्क है कि इन राज्यों (विशेषकर यूपी) में आबादी और फूड सैंपलिंग की संख्या अन्य राज्यों के मुकाबले काफी ज्यादा रही है, जिसकी वजह से फेल होने वाले सैंपलों की संख्या भी स्वाभाविक रूप से ज्यादा दिखाई देती है। लेकिन, फिर भी 20 हजार से ज्यादा सैंपलों का फेल होना एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता का विषय है।
मिलावटखोरों पर एक्शन: 5 साल में 11 हज़ार से ज्यादा लाइसेंस रद्द
सवाल यह उठता है कि क्या सरकार सिर्फ आंकड़े जुटा रही है या इन मिलावटखोरों पर कोई ठोस कार्रवाई भी हो रही है? FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) के नियमों के अनुसार, लगभग 98 प्रतिशत फूड बिजनेस ऑपरेटर्स (FBOs) राज्य या केंद्र शासित प्रदेशों के फूड सेफ्टी अथॉरिटीज के दायरे में आते हैं। इसलिए, सीधा एक्शन लेने की मुख्य जिम्मेदारी भी राज्य सरकारों की ही होती है।
सरकार ने बताया कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की गई है। पिछले 5 सालों में पूरे देश में कुल 4,461 फूड लाइसेंस सस्पेंड किए गए और 11,493 लाइसेंस पूरी तरह से रद्द (Cancel) कर दिए गए।
लाइसेंस सस्पेंशन और कैंसिलेशन का आंकड़ा (2021 से 2026):
- 2021-22: 1,097 सस्पेंड, 1,830 कैंसिल
- 2022-23: 1,100 सस्पेंड, 1,715 कैंसिल
- 2023-24: 791 सस्पेंड, 1,505 कैंसिल
- 2024-25: 769 सस्पेंड, 1,679 कैंसिल
- 2025-26: 704 सस्पेंड, 4,764 कैंसिल
खास बात (Key Insight): वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों पर गौर करें तो सस्पेंशन की संख्या सबसे कम (704) रही, लेकिन कैंसिलेशन का आंकड़ा पांच साल में सबसे ज्यादा (4,764) तक पहुंच गया। यह दर्शाता है कि अब विभाग सिर्फ ‘चेतावनी’ देकर नहीं छोड़ रहा है, बल्कि गंभीर मिलावटखोरों के कारोबार पर स्थायी रूप से ताला लगाने (Permanent Action) की रणनीति अपना रहा है।
तीन सालों में फूड इंस्पेक्शन में 46% का भारी उछाल
सरकार के मुताबिक, मिलावट के इस ‘सिंडिकेट’ को तोड़ने के लिए फूड बिजनेस ऑपरेटर्स के खिलाफ चेकिंग अभियान में लगातार तेजी लाई जा रही है। पिछले तीन सालों के इंस्पेक्शन (निरीक्षण) के आंकड़े इस प्रकार हैं:
- 2023-24: 3,57,072 इंस्पेक्शन
- 2024-25: 4,01,391 इंस्पेक्शन
- 2025-26 (प्रोविजनल): 5,20,566 इंस्पेक्शन
यानी 2023-24 के मुकाबले 2025-26 में इंस्पेक्शन के नंबर में करीब 46 परसेंट का भारी इजाफा हुआ है। यह बढ़ोतरी FSSAI के चार क्षेत्रीय कार्यालयों (Regional Offices) और राज्य फूड सेफ्टी अथॉरिटीज द्वारा सालभर चलाए जा रहे विशेष प्रवर्तन (Enforcement) और निगरानी अभियानों का सीधा नतीजा है।
मिलावट से निपटने के लिए सरकार और FSSAI के मास्टर प्लान
संसद में स्वास्थ्य राज्य मंत्री ने बताया कि मिलावट रोकने, फूड सेफ्टी को मजबूत बनाने और आम जनता को जागरूक करने के लिए कई आधुनिक कदम उठाए जा रहे हैं:
- टेस्टिंग लैब्स का जाल: खाने-पीने की चीजों के सैंपल चेक करने के लिए देशभर में 259 NABL अप्रूव्ड लैब्स और अपील सैंपलों के लिए 24 रेफरल फूड लैब्स नोटिफाई की गई हैं।
- फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स (FSW): इस योजना के तहत फिलहाल 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 305 ‘मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब्स’ (चलती-फिरती लैब्स) तैनात हैं, जो दूर-दराज के इलाकों में जाकर सैंपल्स की जांच करती हैं।
- मैजिक बॉक्स (Magic Box): आम उपभोक्ताओं के लिए यह किट वरदान है। इसके जरिए दूध, कुकिंग ऑयल, मसालों और अनाज जैसी सात फूड कैटेगरीज में मिलावट की जांच लोग घर बैठे खुद कर सकते हैं।
- DART बुक: ‘डार्ट’ (Detect Adulteration with Rapid Test) बुक के जरिए 44 ऐसे नॉर्मल टेस्ट बताए गए हैं, जिन्हें घर की रसोई में पानी और आयोडीन टिंचर जैसी आम चीजों के इस्तेमाल से किया जा सकता है।
- RAFT किट्स: अब तक 88 रैपिड एनालिटिकल फूड टेस्टिंग (RAFT) किट्स को अप्रूवल मिल चुका है, जो कुछ ही मिनटों में सटीक परिणाम दे देती हैं।
- जागरूकता अभियान: ‘नो टू अडल्टरेशन’ (No to Adulteration) और ‘हर लेबल कुछ कहता है’ जैसे अभियानों के जरिए ग्राहकों को एक्सपायरी डेट, न्यूट्रिशनल वैल्यू और मिलावट पहचानने के तरीके सिखाए जा रहे हैं।
सरकार का यह स्पष्ट कहना है कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 (FSSAI Act 2006) के तहत मिलावट रोकना केंद्र और राज्य दोनों की संयुक्त जिम्मेदारी (Joint Responsibility) है। शिकायतों के त्वरित निपटारे के लिए ‘फूड सेफ्टी कनेक्ट पोर्टल’, मोबाइल ऐप और हेल्पलाइन नंबर जैसी व्यवस्थाएं 24×7 एक्टिव हैं।
हालांकि, इंस्पेक्शन और कैंसिलेशन की स्पीड बढ़ने के बावजूद, हर साल लाखों सैंपलों का मिलावटी पाया जाना इस बात की ओर गंभीर इशारा करता है कि ग्राउंड लेवल पर मिलावट की जड़ें बहुत गहरी हैं। त्योहारी सीज़न हो या आम दिन, मुनाफाखोर चंद रुपयों के लालच में जनता की सेहत से खिलवाड़ करने से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा बचाव यही है कि उपभोक्ता स्वयं जागरूक बनें, ब्रांडेड और प्रमाणित (FSSAI Mark) उत्पाद ही खरीदें, और किसी भी प्रकार का संदेह होने पर तुरंत फूड सेफ्टी पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।
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