हल्द्वानी में गौला नदी ने काश्तकारों बढ़ाई चिंताः कई एकड़ जमीन नदी में समाया; सुरक्षात्मक उपाय शुरू,

पिछले दिनों पहाड़ों पर हुई मूसलाधार बारिश के चलते गौला नदी के रौद्र रूप ने स्थानीय किसानों और ग्रामीणों को भारी नुकसान पहुंचाया है। नदी के तेज बहाव के कारण हल्द्वानी के बिंदुखत्ता तटीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर भू-कटाव हुआ है। इस भीषण कटाव की चपेट में आकर ग्रामीणों की कई बीघा उपजाऊ कृषि भूमि और लहलहाती फसलें नदी के तेज प्रवाह में समा गई हैं, जिससे क्षेत्र के किसानों में गहरी चिंता व्याप्त है।
घरों पर मंडराया खतरा, सहमे ग्रामीण
नदी का जलस्तर और कटाव इस कदर बढ़ा है कि कई परिवारों के मकान भी अब सीधे गौला नदी की जद में आ गए हैं। अपना घर और जमीन आंखों के सामने बहते देख ग्रामीण दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं। प्रभावित ग्रामीणों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश सरकार से तत्काल राहत और आर्थिक मदद की गुहार लगाई है।
चिड़ियाघर की 2 एकड़ जमीन और दर्जनों पेड़ बहे
गौला नदी का कहर सिर्फ रिहायशी और कृषि इलाकों तक ही सीमित नहीं रहा। नदी ने प्रस्तावित गौलापार चिड़ियाघर की जमीन को भी खासा नुकसान पहुंचाया है। नदी के उफान में चिड़ियाघर की 2 एकड़ से अधिक जमीन समा गई है। इसके साथ ही शीशम, खैर और अन्य प्रजातियों के दर्जनों छोटे-बड़े पेड़ जड़ से उखड़कर बह गए हैं।
सुरक्षात्मक उपाय शुरू, सिंचाई विभाग को निर्देश
घटना के बाद वन विभाग और सिंचाई विभाग एक्शन मोड में आ गए हैं। तराई पूर्वी डिवीजन के डीएफओ दीपक सिंह ने बताया कि बिंदुखत्ता क्षेत्र में गौला के तेज बहाव से हुए भू-कटाव को रोकने के लिए तात्कालिक और दीर्घकालिक सुरक्षात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। किसानों की जमीन और फसलों को और अधिक नुकसान से बचाने के लिए सिंचाई विभाग को नदी के अंदर बहाव को चैनलाइज करने के निर्देश दिए गए हैं, जिस पर काम शुरू कर दिया गया है। संवेदनशील क्षेत्रों को चिह्नित कर वहां विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने को कहा गया है, ताकि सुरक्षा दीवारें और चेक डैम बनाकर भविष्य में होने वाले नुकसान को रोका जा सके।
सबसे पहले ख़बरें पाने के लिए -
👉 सच की तोप व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें


