दोस्तों ने की हैवानियत की हदें पार, शराब पीने के बाद ‘प्राइवेट पार्ट’ के साथ की ऐसी घिनौनी हरकत, झकझोर देगी रूह

पूर्णिया. दोस्ती भी दगा दे जाती है. आजकल की दोस्ती भी भरोसे लायक नहीं होती. कब क्या हो जाए कहना मुश्किल है. ऐसा ही एक मामला पूर्णिया के इस शख्स का है जिसे दोस्ती निभाना काफी भारी पड़ गया और दोस्तों ने ही इसके साथ दगा कर दी. 4 मार्च को होली के दौरान उसने अपने दोस्तों का साथ शराब पार्टी की. पार्टी के दौरान उसके दोस्तों ने उसके साथ ऐसी गंदी हरकत कर दी जिसने सबको झकझोर कर रख दिया है.
बता दें कि बीते कुछ महीने पहले पूर्णिया अमौर के तालबाड़ी चौक बनगांव वार्ड नंबर 8 के निवासी काली चरण उम्र 45 साल अपने दोस्तों के साथ महाराष्ट्र कमाने गए थे. सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन दोस्ती मुसीबत तब बनी जब उन्होंने अपने सभी दोस्तों के साथ बीते 4 मार्च को होली के दौरान जमकर शराब पार्टी की. वहीं कुछ देर बाद जब उनके दोस्तों को नशा चढ़ा तो उनके दोस्त उनसे उलझ गए और बहुत कहासुनी और मारपीट हो गई. जिसके बाद बाकी सभी दोस्तों ने मिलकर उनके साथ अभद्र व्यवहार करते हुए उनके गुदा मार्ग यानी (पाखाना के रास्ते) में शराब पीने वाला स्टील का गिलास डाल फरार हो गए. फिर किसी तरह वह अपनी जान बचाकर 3 दिन की लंबी ट्रेन यात्रा कर पूर्णिया पहुंचे.
डॉ तारकेश्वर कुमार ने बचाई जान
विशेष जानकारी देते हुए मरीज के परिजन श्रवण कुमार ने बताया कि जब उन लोगों ने इसकी स्थिति देखी तो पूरी तरह डर गए और मरीज की जान बचाने के लिए परेशान होने लगे. कई डॉक्टरों को दिखाया लेकिन सबने हाथ खड़े कर दिए. फिर जाकर उन्हें पूर्णिया के चर्चित जाने माने सर्जन डॉ तारकेश्वर कुमार के बारे में पता चला. बिना देर किए उन्होंने पूर्णिया के कप्तान पाड़ा समीप राम चरित्र यादव मल्टी स्पेशल हॉस्पिटल में डॉ से मिलकर मरीज की जान बचाने के खातिर डॉक्टर के पैरों में गिर गए. जिसके बाद डॉ तारकेश्वर कुमार ने मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए परिजनों को धैर्य देते हुए सफल इलाज करने की बात कही और मरीज को भर्ती कर इलाज शुरू किया और कुछ घंटों बाद ही सफल ऑपरेशन कर मरीज की जान बचाई.
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इस संदर्भ में विशेष जानकारी देते हुए पूर्णिया के जाने माने अस्पताल आर सी यादव मल्टी स्पेशल हॉस्पिटल के संचालक सर्जन डॉ तारकेश्वर कुमार ने बताया कि यह ऑपरेशन किसी बड़े चैलेंज से कम नहीं था. हालांकि, उन्होंने कहा कि शायद बिहार भर में यह पहला केस हो जिसमें दोस्तों ने अपने दोस्त के बेरहमी से गुदा मार्ग में स्टील गिलास डाल दिया.
जबकि उन्होंने कहा कि मरीज की सूझबूझ और डॉक्टर के भरपूर से 7 दिन बाद मरीज के गुदा मार्ग से गिलास को निकाला गया. वहीं उन्होंने कहा कि यहां सिग्मोइडोस्कोपी करने पर रेक्टम में स्टील का गिलास फंसा हुआ पाया गया. जिसके बाद डॉ तारकेश्वर कुमार और डॉ विकास के सहयोग से मरीज को स्पाइनल एनेस्थीसिया देकर इस फंसे हुए गिलास को सफलतापूर्वक निकाला गया. अब मरीज पूरी तरह स्वस्थ हैं और डॉक्टर की निगरानी में हैं
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