हल्द्वानी की रेलवे अतिक्रमण को लेकर कोर्ट की सुनवाई से अतिक्रमणकारियों की धड़कनें हुई तेज कई के प्रार्थना पत्र हुए निरस्त फैसले का काउंट डाउन शुरू #highcortrejectsomeappel

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नैनीताल एसकेटी डॉटकॉम

रेलवे की अतिक्रमण को लेकर हाईकोर्ट में फास्ट्रेक सुनवाई शुरू हो गई है जिसके चलते पहले दिन माननीय न्यायालय में प्रार्थना प्रथम को निरस्त कर दिया इसके साथ ही ऐसे लोगों के याचिकाओं पर सुनवाई हो रही है उन्होंने अपने आप को सरकार का लीज होल्डर बताया है. उनसे इस संबंध में प्रमाण पत्र मांग लिए हैं.

जिस तरह से कोर्ट इस मामले के फैसले की ओर बढ़ रही है उससे 4368 अतिक्रमणकारियों के दिलों की धड़कनें बढ़ गई है इस शायरी जमीन को सरकार और रेलवे की ओर से अपनी संपत्ति बताया है जिस पर इन सभी अतिक्रमणकारियों को बेदखली का नोटिस देने के बाद यह स्थान खाली कराना है.

गौरतलब है कि हल्द्वानी के गौलापार निवासी याचिकाकर्ता रवि शंकर जोशी ने इस मामले में हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर रेलवे की जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने की मांग की थी.

हाई कोर्ट ने इस संबंध में 17 नवंबर 2016 को अतिक्रमणकारियों से यह भूमि खाली करवाने को कहा था लेकिन इस मामले को लेकर कुछ अतिक्रमण कारी सुप्रीम कोर्ट में चले गए थे जहां से इन्हें राहत मिली और उनके सारे मामलों को सुनने के बाद 3 महीने में कार्रवाई करने का निर्णय दिया गया. 3 महीने समाप्त होने के बाद 16 मार्च को हाईकोर्ट ने फिर एक बार अतिक्रमणकारियों को हटाने का आदेश दिया

रेलवे समय की मांग को लेकर हाईकोर्ट में आई जिसके बाद हाईकोर्ट ने रेलवे को 3 वर्ष का समय दिया तथा 3 वर्ष में पूरी सुनवाई करने के बाद इसका हलफनामा कोर्ट में पेश करने को कहा.इसके बाद भी कारवाही नहीं होने के बाद फिर अदालत की अवमानना करने की याचिका दाखिल की गई सुनवाई के बाद भी कार्रवाई नहीं करने से खिन्न याचिकाकर्ता ने फिर से कोर्ट में याचिका लगाई जिसके बाद कोर्ट ने फैसला सुनाया और अन्य लोगों में भी याचिका दायर की उसके बाद अब इस पर फास्टट्रैक की तर्ज पर सुनवाई शुरू हो गई है.

इसी बीच यह मामला राजनीतिक गलियारों में तेजी से था रेलवे के प्रशासन पर सहयोग नहीं करने के आरोप लगाए. प्रशासन ने इसके लिए पूरी तैयारियांकी. इस मामले पर होने वाले खर्च करीब 3 करोड़ का प्रस्ताव रेलवे को भेज दिया

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