बड़ी खबर- इंसानियत हुई तार-तार: गरीबी की मार ने मासूम बचपन को बना दिया सौदे की चीज!
यह घटना समाज के उस कड़वे सच को उजागर करती है, जहां गरीबी, मजबूरी और संवेदनहीनता मिलकर मासूम जिंदगियों को खरीद-फरोख्त की वस्तु बना देती हैं। सकरा थाना क्षेत्र में सामने आया बच्चियों की बिक्री का यह मामला न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी पर भी गहरी चोट करता है।
जानकारी के मुताबिक, एक 6 वर्षीय मासूम बच्ची को ‘गोद लेने’ के नाम पर महज 20 हजार रुपये में बेच दिया गया। इस अमानवीय सौदे में भरथीपुर इलाके की एक चाय दुकानदार महिला ने दलाल की भूमिका निभाई। पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन की संयुक्त कार्रवाई में दो बच्चियों को रेस्क्यू किया गया, जिससे इस पूरे गिरोह का पर्दाफाश हुआ।
दरअसल, इन बच्चियों के पिता की कुछ समय पहले मृत्यु हो चुकी थी। इसके बाद उनकी मां तीनों बच्चों—दो बेटियों और एक बेटे—को ननिहाल में छोड़कर उत्तर प्रदेश के एक व्यक्ति से दूसरी शादी कर ली। ननिहाल में पहले से ही गरीबी और बदहाली का आलम था। नानी और मामा के लिए बच्चों की परवरिश आर्थिक रूप से असंभव होती जा रही थी। इसी मजबूरी का फायदा उठाकर साल 2025 में मझौलिया गांव के एक निःसंतान दंपति ने चाय दुकानदार महिला के जरिए बच्ची को 20 हजार रुपये देकर अपने साथ ले लिया।
शुरुआत में बच्ची को नए घर में पिता जैसा स्नेह तो मिला, लेकिन घर की महिला द्वारा उसके साथ लगातार मारपीट और प्रताड़ना की जाने लगी। हिंसा से तंग आकर मासूम कई बार घर से भागकर सड़कों पर भटकती मिली। स्थानीय लोगों ने कई बार समझाने की कोशिश की, लेकिन जब हालात नहीं सुधरे तो अंततः मामला पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन तक पहुंचा।
सूचना मिलते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बच्ची को वहां से मुक्त कराया। साथ ही उसकी दूसरी बहन, जिसे ननिहाल के ही एक अन्य रिश्तेदार ने अपने पास रखा था, उसे भी रेस्क्यू कर लिया गया। फिलहाल दोनों बच्चियों को श्रम संसाधन विभाग के संरक्षण गृह में सुरक्षित रखा गया है।
इस पूरे मामले की पुष्टि करते हुए मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने साफ शब्दों में कहा कि यह बच्चियों की सीधी खरीद-बिक्री का मामला है। उन्होंने बताया कि प्रशासन पीड़ित परिवार को समाज कल्याण विभाग की विभिन्न योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया में जुटा है। साथ ही पुनर्वास के तहत 25 हजार रुपये की सहायता राशि देने की तैयारी की जा रही है।
पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस सौदे में और कौन-कौन लोग शामिल थे और क्या इससे पहले भी इस तरह की घटनाएं हुई हैं। प्रशासन का कहना है कि दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
मुजफ्फरपुर की यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या आज भी गरीबी इतनी बड़ी सजा है कि उसमें मासूम बचपन कुर्बान कर दिया जाए। यह मामला सिर्फ कानून का नहीं, बल्कि समाज की संवेदनाओं की भी कड़ी परीक्षा
सबसे पहले ख़बरें पाने के लिए -
👉 सच की तोप व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें



खनन एवं वन विभाग की जुगलबंदी से अस्तित्व में आएगा संजीवनी वन