भारत में फिर लौटा कोरोना से भी भयानक वायरस, इसका नहीं है इलाज और ना ही कोई वैक्सीन

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नारी डेस्क:  निपाह वायरस ने एक बार फिर देश को डराना शुरू कर दिया है।  पुणे के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वाइरोलॉजी (NIV) ने पश्चिम बंगाल से भेजे गए दो नमूनों में निपाह वायरस संक्रमण की पुष्टि की है। संक्रमित मरीजों के संपर्क में आए दो लोगों को निगरानी के लिए कोलकाता में बेलेघाटा के संक्रामक रोग (आईडी) हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। पीड़ितों में से एक नर्स है और दूसरा डॉक्टर है। दोनों फिलहाल अस्पताल में चिकित्सा निगरानी में हैं और जांच के लिए उनके लार के नमूने लिए गये हैं। 

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नर्स और डॉक्टर का चल रहा है ईलाज

 निपाह संक्रमण को लेकर चिंता बढ़ने पर स्वास्थ्य अधिकारियों ने संक्रमित नर्सों द्वारा देखी गई जगहों और उनके संपर्क में आये लोगों की पहचान करने के लिए जांच शुरू कर दी है। इस प्रक्रिया के जरिए, एक नर्स और एक डॉक्टर को हाई-रिस्क कॉन्टैक्ट के तौर पर चिह्नित किया गया है। सूत्रों के अनुसार संक्रमित मरीज़ों के संपर्क में आई नर्स को बर्दवान से बेलेघाटा आईडी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दक्षिण 24 परगना के रहने वाले डॉक्टर होम आइसोलेशन में थे, लेकिन तबीयत खराब होने पर एहतियात के तौर पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। दोनों आईडी अस्पताल में चिकित्सकों की निगरानी में हैं।

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संपर्क में आए 120 लोगों की हुई पहचान

 सूत्रों ने बताया कि दोनों संक्रमित नर्सें कुछ दिन पहले बर्दवान गयी थीं। उनके संपर्क में आए 120 से अधिक लोगों की पहचान की है। इनमें परिवार के सदस्य, डॉक्टर, नर्स, एम्बुलेंस चालक और अन्य स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं। सभी पहचाने गए संपर्कों को घर में आइसोलेशन में रहने की सलाह दी गई है और अधिक लोगों का पता लगाने के प्रयास जारी हैं। राज्य सरकार ने लोगों से घबराने के बजाय सावधान रहने की अपील की है और एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है। निपाह वायरस के प्रसार के मद्देनजर अधिकारियों ने बेलेघाटा आईडी अस्पताल को किसी भी आपातकालीन स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार रखने का फैसला किया है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, 10 आपातकालीन बेड और 68 वाडर् बेड तैयार रखे गए हैं। साथ ही पर्याप्त वेंटिलेटर सपोटर् भी उपलब्ध है। 
 

क्या है निपाह वायरस?

निपाह वायरस एक ज़ूनोटिक वायरस है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैलता है। इसका मुख्य स्रोत फल खाने वाले चमगादड़ माने जाते हैं। संक्रमित जानवरों या उनके संपर्क में आई चीज़ों से यह इंसानों तक पहुंच सकता है। इसके अलावा, संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी यह फैल सकता है, जिससे इसका खतरा और बढ़ जाता है। अब तक निपाह वायरस के लिए कोई स्वीकृत वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। कोई एंटीवायरल दवा नहीं है जो इसे पूरी तरह खत्म कर सके। इलाज केवल सपोर्टिव ट्रीटमेंट तक सीमित है, यानी बुखार और दर्द को नियंत्रित करना, सांस लेने में दिक्कत हो तो वेंटिलेटर सपोर्ट, दिमाग में सूजन होने पर ICU में इलाज साफ शब्दों में कहें तो डॉक्टर केवल लक्षणों को संभालते हैं, वायरस को मारने की दवा नहीं है।


इसके लक्षण क्या हैं?

निपाह वायरस के शुरुआती लक्षण आम फ्लू जैसे हो सकते हैं, लेकिन जल्दी ही यह गंभीर रूप ले लेता है:

-तेज बुखार
-सिरदर्द
-उल्टी, चक्कर
-सांस लेने में परेशानी
-दिमाग में सूजन (एन्सेफेलाइटिस)
-बेहोशी या कोमा

 कई मामलों में संक्रमण 24–48 घंटे में जानलेवा साबित हो सकता है।

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जब वैक्सीन और इलाज नहीं है, तो सावधानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। बीमार व्यक्ति के संपर्क से बचें, बिना धोए फल न खाएं। चमगादड़ों द्वारा खाए गए फल न खाएं।  संक्रमण के मामलों में आइसोलेशन का पालन करें। हाथों की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। निपाह वायरस का सबसे डरावना पहलू यही है कि इसका कोई इलाज और वैक्सीन नहीं है। ऐसे में समय पर पहचान, तुरंत आइसोलेशन और सतर्कता ही जान बचा सकती है। जब इलाज नहीं हो, तब बचाव ही सबसे बड़ी दवा बन जाता है।

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