सावधान! इनकम टैक्स को लेकर बदल गए नियम? ITR भरने से पहले जान लें ये जरूरी तारीखें, वरना भरना पड़ेगा भारी जुर्माना
नया वित्त वर्ष शुरू होते ही आम आदमी के लिए सिर्फ कमाई और खर्च का हिसाब जरूरी नहीं होता, बल्कि टैक्स की उलझनों को सुलझाना भी बड़ी जिम्मेदारी बन जाती है। अगर आप चाहते हैं कि पूरे साल टैक्स को लेकर कोई भागदौड़ न करनी पड़े या आपकी जेब पर पेनल्टी का बोझ न आए, तो टैक्स कैलेंडर की इन अहम तारीखों को अभी से नोट कर लें। टैक्स की पूरी प्रक्रिया एक निश्चित टाइमलाइन पर चलती है, जिसे समझना हर टैक्सपेयर के लिए बेहद जरूरी है।
अप्रैल से शुरू हो जाता है टैक्स का खेल
साल की शुरुआत यानी अप्रैल के महीने से ही टैक्स से जुड़े कामों की रफ्तार बढ़ जाती है। इस दौरान पिछले वित्त वर्ष के खास ट्रांजैक्शन से जुड़े TDS सर्टिफिकेट जारी करने की डेडलाइन महीने के बीच तक रहती है। इसके साथ ही, मार्च महीने का TDS और TCS सरकारी खजाने में जमा करना और उससे जुड़े फॉर्म भरना महीने के आखिरी तक अनिवार्य है। अगर ये शुरुआती काम समय पर हो जाएं, तो आगे का रास्ता काफी आसान हो जाता है।
मई और जून: TDS और एडवांस टैक्स की बारी
अप्रैल के बाद मई में भी टैक्स का काम थमता नहीं है। इस महीने पिछले महीने का TDS जमा करने के साथ सर्टिफिकेट जारी करने की जिम्मेदारी निभानी होती है। वहीं जून का महीना थोड़ा ज्यादा टेंशन वाला हो सकता है, क्योंकि इसमें न सिर्फ मई का टैक्स जमा करना होता है, बल्कि ‘एडवांस टैक्स’ की पहली किस्त भी देनी पड़ती है। जून में ही कुछ जरूरी स्टेटमेंट और रिपोर्ट्स भी फाइल करनी होती हैं, जो आपकी पारदर्शिता को दर्शाती हैं।
जुलाई: नौकरीपेशा लोगों के लिए ‘अग्निपरीक्षा’ का महीना
जुलाई का महीना मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों के लिए सबसे बड़ा होता है। इसी महीने के अंत में इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की डेडलाइन आती है। अगर आपका अकाउंट ऑडिट के दायरे में नहीं आता, तो आपको 31 जुलाई तक अपना रिटर्न फाइल कर देना चाहिए। अगर कोई टैक्स बकाया है, तो उसका भुगतान भी इसी समय सीमा के अंदर करना जरूरी है, वरना ब्याज की मीटर चालू हो सकती है।
एडवांस टैक्स और ऑडिट का पूरा चक्र
साल के दूसरे हिस्से यानी सितंबर से लेकर मार्च तक एडवांस टैक्स की अगली किस्तें भरनी होती हैं। सितंबर तक कुल टैक्स का एक हिस्सा, फिर दिसंबर और अंत में मार्च तक पूरा टैक्स क्लियर करना जरूरी होता है। यह सिस्टम खासतौर पर बिजनेस करने वालों और मोटी कमाई वालों के लिए बनाया गया है। वहीं, जिन लोगों के खातों का ऑडिट होना जरूरी है या जिनका इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन है, उनके लिए ITR फाइलिंग की डेडलाइन थोड़ी आगे (अक्टूबर-नवंबर) तक रहती है।
पेनल्टी से बचने का आखिरी मौका
अगर किसी कारणवश आप जुलाई की डेडलाइन मिस कर देते हैं, तो भी साल के अंत तक ‘बिलेटेड’ या ‘रिवाइज्ड’ रिटर्न भरने का मौका मिलता है, हालांकि इसमें आपको लेट फीस देनी पड़ सकती है। इसके अलावा, टैक्स बचाने के लिए निवेश (जैसे 80C आदि) करने का आखिरी मौका 31 मार्च तक रहता है। अगर आप महीने-दर-महीने इस टैक्स सिस्टम को समझकर चलेंगे, तो न केवल पेनल्टी से बचेंगे बल्कि आपकी फाइनेंशियल प्लानिंग भी सुपरहिट रहेगी। बस थोड़ा सा ध्यान और सही समय पर एक्शन, आपको साल भर टेंशन फ्री रख सकता है।
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