क्या फिर बदलेगा देश का राजनीतिक नक्शा? मोदी सरकार के इस बड़े कदम से दक्षिण भारत में मची खलबली!
दक्षिणी राज्यों की चिंताओं को दूर करने के लिए कानून मंत्रालय नए मसौदे पर कर रहा काम, संसद का विशेष सत्र बुलाने के विकल्प पर भी विचार।
नई दिल्ली: देश की सियासी सरजमीं पर एक बार फिर बड़े नीतिगत और विधायी बदलावों की आहट सुनाई देने लगी है। केंद्र की सत्ताधारी नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस सरकार ने देश के राजनीतिक भविष्य को प्रभावित करने वाले सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक, परिसीमन पर फिर से कवायद शुरू कर दी है। इस बार सरकार की रणनीति केवल कानून लागू करने की नहीं, बल्कि सहयोगियों और विपक्षी दलों के बीच एक व्यापक सहमति बनाने की है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय कानून मंत्रालय ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए परिसीमन के पुराने मसौदे की समीक्षा शुरू कर दी है और एक नए संशोधित ड्राफ्ट पर काम किया जा रहा है। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य पूर्व में उठाई गई क्षेत्रीय चिंताओं को दूर करना और एक ऐसा प्रस्ताव तैयार करना है जो राजनीतिक व संवैधानिक रूप से पूरी तरह टिकाऊ हो।
आने वाले हफ्तों में देश की राजधानी नई दिल्ली में जबरदस्त राजनीतिक सरगर्मी देखने को मिल सकती है। यह हलचल ऐसे समय में होने जा रही है जब भारतीय जनता पार्टी अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलावों की तैयारी कर रही है। सत्ताधारी गठबंधन एक बेहद महत्वपूर्ण राजनीतिक दौर में प्रवेश करने से पहले अपने कुनबे को और विस्तार देने की संभावनाओं को सरगर्मी से तलाश रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार परिसीमन जैसे गंभीर विषय पर फूंक-फूंक कर कदम आगे बढ़ा रही है। माना जा रहा है कि इस विधायी प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाने के लिए सरकार संसद के विशेष सत्र को बुलाने के विकल्प पर भी गंभीरता से विचार कर रही है, ताकि देश के सामने एक स्पष्ट और सर्वसम्मत नीति रखी जा सके।
इस नए राजनीतिक घटनाक्रम की शुरुआत नई दिल्ली में होने वाली एनडीए की एक हाई-प्रोफाइल बैठक से होने जा रही है। यह बैठक इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि इसमें एनडीए नेता सरकार की 12वीं सालगिरह मनाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगातार कार्यकाल में सबसे लंबे समय तक चुने हुए प्रधानमंत्री रहने के मामले में जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ने का जश्न मनाने के लिए जुट रहे हैं। इस महत्वपूर्ण बैठक में एनडीए के करीब 35 सहयोगी दलों के लगभग 75 प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। दिलचस्प बात यह है कि यह बैठक विपक्षी खेमे यानी ‘इंडिया’ ब्लॉक की बैठक के ठीक दो दिन बाद हो रही है, जिससे इस रणनीतिक बैठक का महत्व और अधिक बढ़ गया है।
इस पूरी कवायद के केंद्र में संसद के भीतर जरूरी संख्या बल जुटाना है। परिसीमन जैसे बड़े बदलाव के लिए किसी भी भावी विधायी कदम को पास कराने हेतु सरकार को एक मजबूत राजनीतिक गणित की आवश्यकता होगी। यही कारण है कि बीजेपी के रणनीतिकार और एनडीए के शीर्ष नेता व्यापक आम सहमति बनाने के लिए क्षेत्रीय दलों को साधने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। विशेष रूप से तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही आंतरिक गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है, वहीं द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम जैसी दक्षिण भारत की मजबूत क्षेत्रीय ताकतों को भी इस चर्चा के दायरे में लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि परिसीमन को लेकर दक्षिण भारत के राज्यों में पहले भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। डीएमके दक्षिणी राज्यों की सीटों और प्रतिनिधित्व पर परिसीमन के संभावित प्रतिकूल असर को लेकर सबसे मुखर आलोचक के रूप में उभरी है। दक्षिण के राज्यों की मुख्य चिंता यह है कि जनसंख्या नियंत्रण के उनके सफल प्रयासों के कारण कहीं संसद में उनका प्रतिनिधित्व कम न हो जाए। इसी चिंता को भांपते हुए कानून मंत्रालय संशोधित ड्राफ्ट में ऐसे सुरक्षात्मक उपाय तलाश रहा है जिससे किसी भी राज्य को राजनीतिक नुकसान न हो। इसके साथ ही महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जहां नए गठबंधनों की संभावनाओं और एनडीए के विस्तार को लेकर रणनीतिक बिसात बिछाई जा रही है।
इस बड़े नीतिगत कदम के समानांतर, बीजेपी अपने संगठन को भी एक नया रूप देने जा रही है। पार्टी के भीतर निरंतरता बनाए रखने और नई पीढ़ी को नेतृत्व में आगे लाने के बीच एक महीन संतुलन बनाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। जल्द ही नितिन नवीन की अगुवाई में बीजेपी की नई संगठनात्मक टीम की घोषणा होने की उम्मीद है, जिसमें अनुभवी नेताओं के साथ-साथ युवा चेहरों को भी अहम जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी। इसके अतिरिक्त, कई राज्यों में खाली पड़े संगठन मंत्रियों के पदों को भरने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ विचार-विमर्श का दौर अंतिम चरण में पहुंच चुका है। परिसीमन की कानूनी प्रक्रिया, एनडीए के विस्तार की कोशिशें और संगठन में बदलाव के ये तमाम घटनाक्रम स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि आने वाले दिनों में देश का सियासी पारा बेहद गर्म रहने वाला है।
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