कुमाऊँ-इलाज का खर्चा कौन देगा… मर गया तो जिम्मेदारी कौन लेगा? उत्तराखंड में निजी अस्पताल का अमानवीय चेहरा आया सामने

रुद्रपुर के एक निजी अस्पताल ने सड़क हादसे में गंभीर घायल साइकिल सवार का इलाज करने से इन्कार कर दिया। अस्पताल ने खर्च और जिम्मेदारी का हवाला दिया, जबकि …और पढ़ें
रुद्रपुर के मेडिसिटी अस्पताल ने घायल का इलाज ठुकराया।
अस्पताल ने इलाज के खर्च और जिम्मेदारी पर सवाल उठाए।
राहगीरों ने घायल को जिला अस्पताल पहुंचाया, आक्रोश व्याप्त।
रूद्रपुर। रविवार रात रुद्रपुर में एक बार फिर निजी अस्पतालों की संवेदनहीनता और अमानवीय चेहरा सामने आया, जिसने न सिर्फ कानून बल्कि इंसानियत को भी कठघरे में खड़ा कर दिया।
सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल एक साइकिल सवार को जब राहगीर इलाज के लिए नजदीकी निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, तो वहां इलाज शुरू करने के बजाय पैसों और मौत की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर दिए गए।
प्रत्यक्षदर्शी भदोहीपुरा निवासी आकाश यादव ने बताया कि रविवार शाम भदोहीपुरा मोड़ पर एक तेज रफ्तार ट्रक ने साइकिल सवार को जोरदार टक्कर मार दी।
टक्कर इतनी भीषण थी कि साइकिल सवार सड़क पर गिर पड़ा और अधिक खून बहने लगा। स्थिति नाजुक देख आसपास मौजूद लोगों ने एक पल भी गंवाए बिना घायल को मात्र 100 मीटर दूर स्थित निजी अस्पताल पहुंचाया। लेकिन यहां जो हुआ, उसने सभी को सन्न कर दिया।
आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने घायल को देखकर हाथ खड़े कर दिए।
अस्पताल कर्मियों ने इलाज शुरू करने के बजाय यह कहकर मना कर दिया कि ‘इसके इलाज का खर्च कौन देगा?’ और ‘अगर यह मर गया तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?’
इंसान की जेब और उसकी मौत की गारंटी पहले देखता है?
राहगीरों ने बताया कि घायल दर्द से कराह रहा था, खून बह रहा था, लेकिन अस्पताल प्रशासन का रवैया पूरी तरह बेरहम और असंवेदनशील रहा।
समय बेहद कीमती था, इसलिए लोगों ने बहस में उलझने के बजाय घायल को तुरंत जिला अस्पताल रुद्रपुर पहुंचाया, जहां उसका उपचार शुरू किया गया।
यह घटना सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों और मोटर वाहन अधिनियम पर भी बड़ा सवाल है, जिसमें कहा गया है कि आपात स्थिति में किसी भी अस्पताल को घायल का प्राथमिक इलाज करने से मना करने का अधिकार नहीं है।
इसके बावजूद अस्पताल खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ा रहा है।
स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। सवाल उठ रहे हैं कि अगर 100 मीटर दूर अस्पताल ने इलाज से मना कर दिया होता और थोड़ी और देर हो जाती, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता? क्या निजी अस्पताल सिर्फ मुनाफे की मशीन बनकर रह गए हैं?
इस संबंध में सीएमओ डा. केके अग्रवाल ने बताया कि हादसे में घायल गंभीर मरीज के इलाज के लिए कोई भी निजी अस्पताल ऐसे मना नहीं कर सकता है।इस संबंध में अभी कोई शिकायत नहीं आई है।शिकायत आने पर अस्पताल को चेतावनी दी जाएगी
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