IVF से जुड़वां बच्चे हुए, मां-बाप से शक्ल न मिली तो कराया DNA टेस्ट, रिजल्ट देख हिल गई फैमिली

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IVF case Gurugram: हरियाणा के गुरुग्राम के रहने वाले कपल ने राजधानी दिल्ली के द्वारका इलाके में स्थित आईवीएफ (IVF) सेंटर पर बच्चों की अदला-बदली का आरोप लगाया है. पीड़ित कपल राहुल और मीनू राठौर ने बच्चियों की शक्ल परिवार के किसी भी सदस्य से न मिलने पर जब डीएनए टेस्ट करवाया, तो रिपोर्ट देखकर उनके होश उड़ गए.

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गुरुग्राम में एक दंपत्ति ने IVF सेंटर पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया है. (

‘हमारे बच्चे कहां हैं? इन दो मासूम बच्चों के माता-पिता कहां हैं?’ गुरुग्राम के रहने वाले राहुल राठौर और उनकी पत्नी मीनू राठौर पिछले पांच महीनों से इसी सवाल का जवाब तलाश रहे हैं. दंपति का दावा है कि IVF यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन तकनीक के जरिए पैदा हुई उनकी जुड़वां बच्चियां बायोलॉज‍िकली उनकी संतान नहीं हैं. उनका आरोप है कि दिल्ली के एक IVF सेंटर में गंभीर गड़बड़ी हुई है. दंपति ने अस्पताल प्रशासन पर बच्चों की अदला-बदली, मामले को दबाने की कोशिश, करोड़ों रुपये का ऑफर देने और धमकाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं. पूरा मामला समझते हैं. 

इंड‍िया टुडे से जुड़े अंशुल सि‍ंह की रि‍पोर्ट के मुताबि‍क, दंपति ने दिसंबर 2024 में दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित SCI IVF हॉस्प‍िटल में इलाज शुरू कराया था. दंपति  का कहना है कि उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि IVF प्रक्रिया में केवल राहुल के स्पर्म और मीनू के एग्स का इस्तेमाल किया जाएगा.

इलाज सफल रहा और 5 जनवरी 2026 को मीनू ने द्वारका के एक निजी अस्पताल में जुड़वां बच्चियों को जन्म दिया. परिवार में खुशियां थीं. लंबे इंतज़ार और IVF ट्रीटमेंट के बाद माता-पिता बनने का सपना पूरा हुआ था. 

मामला कैसे खुला? 

सब खुश थे लेकिन कुछ समय बाद परिवार के कुछ लोगों ने बच्चियों की शक्ल-सूरत को लेकर सवाल उठाने शुरू किए. राहुल और मीनू का कहना है कि बच्चियों की शक्ल परिवार के किसी भी सदस्य से मेल नहीं खा रही थीं. शुरुआत में उन्होंने इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया, लेकिन बाद में उन्होंने DNA टेस्ट कराने का फैसला किया. 

दंपति ने 8 जनवरी 2026 को दो अलग-अलग निजी लैब में DNA टेस्ट के लिए सैंपल दिए. 10 और 14 जनवरी 2026 को DNA रिपोर्ट में ये सामने आया कि बच्चियों का DNA न तो मां से मैच कर रहा था और न ही पिता से. यहीं से मामला गंभीर हो गया.अस्पताल पर क्या आरोप हैं?

राहुल और मीनू का आरोप है कि DNA रिपोर्ट सामने आने के बाद उन्होंने IVF सेंटर और डिलीवरी कराने वाले अस्पताल से संपर्क किया. लेकिन उनकी शिकायत को गंभीरता से लेने के बजाय उन पर ही सवाल उठाए गए. दंपति का दावा है कि जब उन्होंने लिखित जवाब मांगा तो उन्हें चुप रहने के लिए करोड़ों रुपए का प्रस्ताव दिया गया. जब उन्होंने समझौता करने से इनकार कर दिया तो उन्हें धमकियां मिलने लगीं.

मीनू राठौर का कहना है कि उनका मकसद किसी को फंसाना नहीं है. वो सिर्फ अपने बायोलॉजि‍कल बच्चों को ढूंढना चाहती हैं. उनका कहना है कि वे उन दोनों बच्चियों से भी भावनात्मक रूप से जुड़ चुकी हैं, जिन्हें उन्होंने जन्म दिया है. लेकिन साथ ही वो ये भी जानना चाहती हैं कि उनका बायोलॉजि‍कल बच्चा कहां है.

क्या बच्चों की अदला-बदली हुई है? यही सवाल इस पूरे मामले के सेंटर में है. राहुल राठौर का आरोप है कि या तो IVF प्रक्रिया के दौरान भ्रूण बदल गया, या फिर जन्म के बाद बच्चों की अदला-बदली हुई. उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में यहां तक कहा कि उन्हें चाइल्ड ट्रैफिकिंग की आशंका है. हालांकि, अभी तक किसी जांच एजेंसी ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है. पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की जांच जारी है.पुलिस जांच कर रही 

17 जनवरी 2026 को दंपति ने पुलिस से शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई. फ‍िर उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) से शिकायत की. लेकिन उन्हें कहीं से कोई जवाब नहीं मिला.

मार्च 2026 दंपति अदालत पहुंचे. 23 मार्च 2026 को दिल्ली की मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट ने FIR दर्ज करने का आदेश दिया. कोर्ट ने चाइल्ड ट्रैफ‍िक‍िंग और अपहरण जैसी संभावनाओं की जांच की जरूरत बताई. फ‍िर 30 मार्च 2026 को साकेत कोर्ट ने भी FIR दर्ज कर जांच शुरू करने का निर्देश दिया. SCI IVF हॉस्पि‍टल ने कोर्ट के आदेश को चुनौती दी. लेक‍िन 5 जून 2026 को साकेत कोर्ट ने अस्पताल की याचिका खारिज कर दी और कहा कि रिकॉर्ड में अनियमितताएं पाई गईं हैं, इसलिए पुलिस जांच जरूरी है.

कोर्ट के आदेश पर ग्रेटर कैलाश थाने में ART (Assisted Reproductive Technology) Act, 2021 और धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज हुआ. लेक‍िन दंपति का आरोप है कि FIR दर्ज होने के दो महीने बाद भी जांच में कोई खास प्रोग्रेस नहीं हुई.  दंपति की क्या मांगें हैं?

  • IVF सेंटर के CCTV फुटेज तुरंत जब्त किए जाएं. 
  •  इलेक्ट्रॉनिक डेटाबेस और सर्वर लॉग की साइबर जांच हो.
  • एम्ब्रियो ट्रांसफर और स्टोरेज रिकॉर्ड का फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए. 
  • ये पता लगाया जाए कि किस मरीज का भ्रूण किस तारीख को इस्तेमाल किया गया. 
  • संभावित रूप से जुड़े अन्य परिवारों की भी पहचान की जाए.

पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई न होने का आरोप लगाते हुए राहुल और मीनू ने सोशल मीडिया का सहारा लिया. दोनों ने अपनी बच्चियों के साथ वीडियो बनाकर लोगों से मदद की अपील की. वीडियो में उन्होंने उन परिवारों से भी संपर्क करने की कोशिश की है, जिन्होंने 2025 में उसी IVF सेंटर में इलाज कराया था या जिनके बच्चों का जन्म जनवरी 2026 के आसपास हुआ था. राहुल का कहना है कि संभव है किसी अन्य परिवार के पास उनका बायोलॉजि‍कल बच्चा हो और उनके पास किसी दूसरे परिवार का बच्चा.

रिपोर्ट के मुताबिक, सर गंगा राम अस्पताल के सेंटर ऑफ आईवीएफ एंड ह्यूमन रिप्रोडक्शन की डायरेक्टर डॉ. आभा मजूमदार ने बताया क‍ि अगर मां का एग और प‍िता का स्पर्म यूज हुआ है तो वो एब्रि‍यो मदर-फादर से मैच करेगा.