हल्द्वानी मे सत्ताधारी दल के ये चेहरे हैं तैयार,इनको है पार्टी के सिम्बल का इंतजार

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हल्द्वानी निगम की सीट आरक्षित होने की प्रबल संभावना

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हल्द्वानी skt. com
पूरे प्रदेश भर में निकाय चुनाव की तैयारी शुरू हो गई है 2 सितंबर से पहले चुनाव प्रक्रिया संपन्न होनी है इसलिए संभवतः अगस्त में उत्तराखंड में निकाय चुनाव संपन्न कराए जाएंगे ।
इन चुनाव की सुबुगाहट के साथ ही विभिन्न राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों में हल्द्वानी के मेयर के लिए आरक्षण की संभावनाओं पर चर्चा गरम है जानकारी यहां तक आई है कि पिछले दो चुनाव में हल्द्वानी और देहरादून अनारक्षित रही है प्रदेश की कुल नौ निगमो में सिर्फ में से चार स्थानों पर आरक्षण की व्यवस्था रहेगी अगर वर्मा आयोग की सिफारिश से सरकार मान लेती है तो पांचवी जगह भी आरक्षण भी हो सकता है ।वर्मा आयोग ने ओबीसी को एक जगह की स्थान पर दो जगह लागू करने की सिफारिश की है जिससे 9 में से पांच जगह आरक्षण हो सकता है चार जगह अनारक्षित रह सकते हैं।

हल्द्वानी और देहरादून प्रदेश के दो सबसे बड़े निगम हैं यह दोनों वर्ष 2013 और वर्ष 2018 में आनारक्षित रहे हैं। निकाय चुनाव की आरक्षण की पद्धति के अनुसार एसी की एक सीट, महिला की तीन सीटें तथा ओबीसी की एक सीट आरक्षित रहती है इस बार यह वर्मा आयोग की सिफारिश मान लेने के बाद ओबीसी दो भी हो सकती हैं हालांकि सरकार यह सिफारिश मानने के लिए बाध्य नहीं है।।

ऐसे में यह पूरे संकेत मिल रहे हैं कि हल्द्वानी नगर निगम की सीट इस बार अनारक्षित नहीं रह पाएगी इस सीट को महिला अथवा एसी के लिए आरक्षित किया जा सकता है। अब ऐसे में अगर हल्द्वानी सीट आरक्षित की जाएगी तो सबसे प्रबल संभावना इस बात की है कि यह महिला जाति के लिए आरक्षित हो जाए। इसमें वह महिला एसी ,महिला ओबीसी अथवा महिला सामान्य भी बनाई जा सकती है अगर प्रदेश भर में हल्द्वानी में एससी की जनसंख्या सबसे अधिक होगी तो यह एससी के लिए भी आरक्षित हो सकती है यह बात हम तथ्यों के आधार पर इसलिए भी कह रहे हैं कि हल्द्वानी और देहरादून के अलावा अन्य सभी निगम कभी न कभी आरक्षित रहे है।

जिनमें अगर बात की जाए तो हरिद्वार एक बार सामान्य और एक बार महिला हो चुकी है कोटद्वार भी महिला के लिए आरक्षित हो चुकी है काशीपुर दो बार आरक्षित रह चुकी है इसमें एक बार ओबीसी एक बार ओबीसी महिला रुद्रपुर भी एक बार एसी महिला और एक बार एसी भी रह चुकी है। वही ऋषिकेश भी अपने गठन के साथ ही महिला सामान्य के लिए आरक्षित रह चुकी है रुड़की अभी एक बार अनारक्षित रह चुकी है उसके भी आरक्षित होने के आसार हैं।


अब कुल मिलाकर यह देखा जाए तो देहरादून हल्द्वानी और रुड़की ही अब तक अनारक्षित रहे हैं इसमें संभावना यह भी है कि रुड़की तो एक ही बार अनारक्षित रही है जबकि हल्द्वानी और देहरादून दो-दो बार अनारक्षित रह चुके हैं इसलिए इन दोनों के आरक्षित होने की ज्यादा संभावनाएं हैं।


अब हम यहां पर महिला के लिए आरक्षित होने पर चर्चा करते हुए सत्ताधारी पार्टी के संभावित उम्मीदवारों के बारे में कुछ नाम पर चर्चा कर रहे हैं इनमें कुछ नाम बढ़ भी सकते हैं और कुछ नाम घट भी सकते हैं।

महिला आरक्षित होने पर अपना-अपना दावा करने वाली महिला नेत्रियों में प्रमुख रूप से पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सुमित्रा प्रसाद पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष रेनू अधिकारी तथा वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष बेला तोलिया प्रमुख रूप से शामिल है। इसके अलावा शांति भट्ट ,विजयलक्ष्मी चौहान प्रतिभा जोशी, कल्पना बोरा समेत कई नाम हैं।

इन महिलाओं में महिला सामान्य होने पर सभी दावेदार हैं जिनमें बेला तोलिया, रेनू अधिकारी, सुमित्रा प्रसाद तथा शांति भट्ट का अपना राजनीतिक प्रभाव भी है तथा यह अभी तक कहीं ना कहीं जनप्रतिनिधि तौर पर कार्य कर चुके हैं और अपनी स्वयं के बल पर भी राजनीति कर रही है।

बात वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष बेला तोलिया से शुरू करते हैं तो अभी उनका जिला पंचायत का कार्यकाल 2 दिसंबर तक है उन्हें इस पद पर चुनाव लड़ने के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ेगा। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी सुमित्रा प्रसाद एक ऐसी सर्व सुलभ उम्मीदवार हैं जो की हर पद के लिए उम्मीदवारी कर सकती है वह अनारक्षित होने पर भी उम्मीदवारी कर सकती है महिला होने पर भी उम्मीदवारी कर सकती हैं महिला एसी होने पर भी उम्मीदवारी कर सकती है जबकि अन्य दावेदार सिर्फ महिला सामान्य और अनारक्षित होने पर ही दावेदारी कर सकती है। सुमित्रा प्रसाद पूर्व में जिला पंचायत अध्यक्ष रहने के साथ उनके क्षेत्र के तीन वार्ड अभी नगर निगम में शामिल है ।।

वैसे ही रेनू अधिकारी नगर पालिका की अध्यक्ष रह चुकी है तो हल्द्वानी विधानसभा क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा नगर निगम में आता है वही बेला तोलिया पूर्व में बीडीसी सदस्य रह चुकी है उनकी पूरी क्षेत्र पंचायत भी नगर निगम में समाहित है पूर्व प्रमुख शांति भट्ट भी जिला पंचायत सदस्य के साथ ही ब्लॉक प्रमुख रह चुकी हैं उनका जिला पंचायत का पूरा क्षेत्र तथा क्षेत्र पंचायत का पूरा हिस्सा भी नगर निगम में समाहित है ऐसे में इन तीनों का अपना जनाधार भी है।

वहीं प्रतिभा जोशी भी पार्षद का चुनाव भी लड़ चुकी हैं। उनका भी वार्ड निगम मैं ही है। विजयलक्ष्मी चौहान और कल्पना बोरा भारतीय जनता पार्टी के संगठन की राजनीति कर रही हैं जबकि अभी तक वह जनप्रतिनिधि नहीं बनी है।

हल्द्वानी नगर निगम अगर एससी के लिए आरक्षित होता है तो इसके लिए भी कई दावेदार हैं जिनमें से मुख्य रूप से जिनका नाम आ रहा है उनमें दिनेश आर्य मोहन पाल, समीर आर्य भुवन चंद्र आर्य समेत कई नाम है।

जिनमे दिनेश आर्य पूर्व में जिला पंचायत अध्यक्ष रहने के साथ वर्तमान में वह राज्य सरकार में राज्य मंत्री के बतौर दर्जाधारी है समीर आर्य अनुसूचित मोर्चे के प्रदेश अध्यक्ष है। इसके ही अजय राजौर दर्जा राज्य मंत्री हैं।9 जबकि भुवन आर्य अनुसूचित मोर्चे के जिलाध्यक्षहै। मोहन पाल एक बड़ा नाम हो सकता है क्योंकि वह भारतीय जनता पार्टी के एससी मोर्चे के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रह चुके हैं इसके साथ ही वह बहुजन समाजवादी पार्टी से भीमताल विधानसभा चुनाव भी अनारक्षित सीट से लड़ चुके हैं। वह बसपा ओर भाजपा में आते जाते रहे हैं इसका उन्हें नफा और नुकसान दोनों हो सकता है ।

आज हम हल्द्वानी सीट के अनारक्षित नहीं रहने पर महिला और एससी के लिए आरक्षित होने पर संभावित दावेदारों के नाम की चर्चा कर रहे हैं किसके नाम पर पार्टी सहमत होती है तथा पार्टी उनके जीतने की योग्यता को किस तरह से भापती है आने वाला समय बताएगा।

आगामी अंकों में हम अनारक्षित रहने पर सत्ताधारी और विपक्ष के उम्मीदवारों की भी की भी विवेचना कर आलेख प्रस्तुत करेंगे के अलावा इसी सीक्वेंस में सीट महिला होने पर मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के संभावित उम्मीदवारों की योग्यता का भी विवरण प्रस्तुत करेंगे

हल्द्वानी और देहरादून प्रदेश के दो सबसे बड़े निगम हैं यह दोनों वर्ष 2013 और वर्ष 2018 में आनारक्षित रहे हैं। निकाय चुनाव की आरक्षण की पद्धति के अनुसार एसी की एक सीट, महिला की तीन सीटें तथा ओबीसी की एक सीट आरक्षित रहती है इस बार यह वर्मा आयोग की सिफारिश मान लेने के बाद ओबीसी दो भी हो सकती हैं हालांकि सरकार यह सिफारिश मानने के लिए बाध्य नहीं है।।

ऐसे में यह पूरे संकेत मिल रहे हैं कि हल्द्वानी नगर निगम की सीट इस बार अनारक्षित नहीं रह पाएगी इस सीट को महिला अथवा एसी के लिए आरक्षित किया जा सकता है। अब ऐसे में अगर हल्द्वानी सीट आरक्षित की जाएगी तो सबसे प्रबल संभावना इस बात की है कि यह महिला जाति के लिए आरक्षित हो जाए। इसमें वह महिला एसी ,महिला ओबीसी अथवा महिला सामान्य भी बनाई जा सकती है अगर प्रदेश भर में हल्द्वानी में एससी की जनसंख्या सबसे अधिक होगी तो यह एससी के लिए भी आरक्षित हो सकती है यह बात हम तथ्यों के आधार पर इसलिए भी कह रहे हैं कि हल्द्वानी और देहरादून के अलावा अन्य सभी निगम कभी न कभी आरक्षित रहे है।

जिनमें अगर बात की जाए तो हरिद्वार एक बार सामान्य और एक बार महिला हो चुकी है कोटद्वार भी महिला के लिए आरक्षित हो चुकी है काशीपुर दो बार आरक्षित रह चुकी है इसमें एक बार ओबीसी एक बार ओबीसी महिला रुद्रपुर भी एक बार एसी महिला और एक बार एसी भी रह चुकी है। वही ऋषिकेश भी अपने गठन के साथ ही महिला सामान्य के लिए आरक्षित रह चुकी है रुड़की अभी एक बार अनारक्षित रह चुकी है उसके भी आरक्षित होने के आसार हैं।
अब कुल मिलाकर यह देखा जाए तो देहरादून हल्द्वानी और रुड़की ही अब तक अनारक्षित रहे हैं इसमें संभावना यह भी है कि रुड़की तो एक ही बार अनारक्षित रही है जबकि हल्द्वानी और देहरादून दो-दो बार अनारक्षित रह चुके हैं इसलिए इन दोनों के आरक्षित होने की ज्यादा संभावनाएं हैं।
अब हम यहां पर महिला के लिए आरक्षित होने पर चर्चा करते हुए सत्ताधारी पार्टी के संभावित उम्मीदवारों के बारे में कुछ नाम पर चर्चा कर रहे हैं इनमें कुछ नाम बढ़ भी सकते हैं और कुछ नाम घट भी सकते हैं। महिला आरक्षित होने पर अपना-अपना दावा करने वाली महिला नेत्रियों में प्रमुख रूप से पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सुमित्रा प्रसाद पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष रेनू अधिकारी तथा वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष बेला तोलिया प्रमुख रूप से शामिल है। इसके अलावा शांति भट्ट ,विजयलक्ष्मी चौहान प्रतिभा जोशी, कल्पना बोरा समेत कई नाम हैं।

इन महिलाओं में महिला सामान्य होने पर सभी दावेदार हैं जिनमें बेला तोलिया, रेनू अधिकारी, सुमित्रा प्रसाद तथा शांति भट्ट का अपना राजनीतिक प्रभाव भी है तथा यह अभी तक कहीं ना कहीं जनप्रतिनिधि तौर पर कार्य कर चुके हैं और अपनी स्वयं के बल पर भी राजनीति कर रही है।

बात वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष बेला तोलिया से शुरू करते हैं तो अभी उनका जिला पंचायत का कार्यकाल 2 दिसंबर तक है उन्हें इस पद पर चुनाव लड़ने के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ेगा। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी सुमित्रा प्रसाद एक ऐसी सर्व सुलभ उम्मीदवार हैं जो की हर पद के लिए उम्मीदवारी कर सकती है वह अनारक्षित होने पर भी उम्मीदवारी कर सकती है महिला होने पर भी उम्मीदवारी कर सकती हैं महिला एसी होने पर भी उम्मीदवारी कर सकती है जबकि अन्य दावेदार सिर्फ महिला सामान्य और अनारक्षित होने पर ही दावेदारी कर सकती है। सुमित्रा प्रसाद पूर्व में जिला पंचायत अध्यक्ष रहने के साथ उनके क्षेत्र के तीन वार्ड अभी नगर निगम में शामिल है ।वैसे ही रेनू अधिकारी नगर पालिका की अध्यक्ष रह चुकी है तो हल्द्वानी विधानसभा क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा नगर निगम में आता है वही बेला तोलिया पूर्व में बीडीसी सदस्य रह चुकी है उनकी पूरी क्षेत्र पंचायत भी नगर निगम में समाहित है पूर्व प्रमुख शांति भट्ट भी जिला पंचायत सदस्य के साथ ही ब्लॉक प्रमुख रह चुकी हैं उनका जिला पंचायत का पूरा क्षेत्र तथा क्षेत्र पंचायत का पूरा हिस्सा भी नगर निगम में समाहित है ऐसे में इन तीनों का अपना जनाधार भी है। वहींप्रतिभा जोशी भी पार्षद का चुनाव भी लड़ चुकी हैं। उनका भी वार्ड निगम मैं ही है। विजयलक्ष्मी चौहान और कल्पना बोरा भारतीय जनता पार्टी के संगठन की राजनीति कर रही हैं जबकि अभी तक वह जनप्रतिनिधि नहीं बनी है।

हल्द्वानी नगर निगम अगर एससी के लिए आरक्षित होता है तो इसके लिए भी कई दावेदार हैं जिनमें से मुख्य रूप से जिनका नाम आ रहा है उनमें दिनेश आर्य मोहन पाल, समीर आर्य भुवन चंद्र आर्य समेत कई नाम है जिनमे दिनेश आर्य पूर्व में जिला पंचायत अध्यक्ष रहने के साथ वर्तमान में वह राज्य सरकार में राज्य मंत्री के बतौर दर्जाधारी है समीर आर्य अनुसूचित मोर्चे के प्रदेश अध्यक्ष है जबकि भुवन आर्य अनुसूचित मोर्चे के जिलाध्यक्षहै। मोहन पाल एक बड़ा नाम हो सकता है क्योंकि वह भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रह चुके हैं इसके साथ ही वह बहुजन समाजवादी पार्टी से भीमताल विधानसभा चुनाव भी अनारक्षित सीट से लड़ चुके हैं। वह बसपा ओर भाजपा में असते जस्ते रहे हैं इसका उन्हें नफा और नुकसान दोनों हो सकता है ।आज हम हल्द्वानी सीट के अनारक्षित नहीं रहने पर महिला और एससी के लिए आरक्षित होने पर संभावित दावेदारों के नाम की चर्चा कर रहे हैं किसके नाम पर पार्टी सहमत होती है तथा पार्टी उनके जीतने की योग्यता को किस तरह से भापती है आने वाला समय बताएगा। आगामी अंकों में हम अनारक्षित रहने पर सत्ताधारी और विपक्ष के उम्मीदवारों की भी की भी विवेचना कर आलेख प्रस्तुत करेंगे के अलावा इसी सीक्वेंस में सीट महिला होने पर मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के संभावित उम्मीदवारों की योग्यता का भी विवरण प्रस्तुत करेंगे