BJP में जल्द होगा बड़ा बदलाव? राज्य में भाजपा कार्यकारी अध्यक्ष की रेस में ये नाम सबसे आगे, राजनीति में बढ़ी हलचल

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भाजपा की राष्ट्रीय टीम के गठन के बाद अब संगठन में भी संभावित बदलाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष से सक्रिय राजनीतिक गतिविधियों से दूर रहने के बीच पार्टी के भीतर कार्यकारी…

रायपुरः भाजपा की राष्ट्रीय टीम के गठन के बाद अब छत्तीसगढ़ संगठन में भी संभावित बदलाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण सिंह देव के स्वास्थ्य कारणों से सक्रिय राजनीतिक गतिविधियों से दूर रहने के बीच पार्टी के भीतर कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। हालांकि, अभी तक पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

सूत्रों के मुताबिक, संगठन के नियमित कामकाज, आगामी बैठकों और पार्टी की गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए केंद्रीय नेतृत्व किसी वरिष्ठ नेता को अतिरिक्त जिम्मेदारी देने पर विचार कर सकता है। किरण सिंह देव फिलहाल उत्तर प्रदेश में हुए सड़क हादसे के बाद उपचार और स्वास्थ्य लाभ के दौर से गुजर रहे हैं। उनकी वापसी में समय लगने की स्थिति को देखते हुए संगठनात्मक व्यवस्था को लेकर विकल्पों पर मंथन की चर्चा है।

कौन हो सकता है चेहरा?

संभावित कार्यकारी अध्यक्ष को लेकर जिन नामों की चर्चा राजनीतिक गलियारों में है, उनमें राजनांदगांव सांसद संतोष पांडेय का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां संभाल चुके संतोष पांडेय को प्रदेश भाजपा के कामकाज का अनुभव भी है। सांसद होने के कारण केंद्रीय नेतृत्व के साथ उनका समन्वय भी एक महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है।

दूसरी ओर, भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक शिवरतन शर्मा का नाम भी चर्चा में है। लंबे समय तक संगठन और मैदानी राजनीति में सक्रिय रहे शिवरतन शर्मा की कार्यकर्ताओं के बीच पकड़ को उनकी संभावित दावेदारी की बड़ी ताकत माना जा रहा है।

महासमुंद सांसद रूपकुमारी चौधरी का नाम भी पहले संभावित चेहरों में शामिल बताया जा रहा था, लेकिन राष्ट्रीय संगठन में उन्हें महिला मोर्चा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने के बाद प्रदेश संगठन की इस संभावित भूमिका के लिए उनकी दावेदारी फिलहाल कमजोर मानी जा रही है।

क्षेत्रीय समीकरण भी रहेगा अहम

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छत्तीसगढ़ में भाजपा के संगठनात्मक फैसले में केवल वरिष्ठता ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव बस्तर क्षेत्र से आते हैं। ऐसे में यदि संगठन की अस्थायी कमान मैदानी इलाके के किसी अनुभवी नेता को मिलती है, तो इसे प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों के बीच संतुलन बनाने की कवायद के तौर पर देखा जा सकता है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आदिवासी समाज से आते हैं, जबकि प्रदेश अध्यक्ष की मौजूदा भूमिका सामान्य वर्ग के नेता के पास है। ऐसे में अगला संगठनात्मक फैसला लेते समय पार्टी नेतृत्व क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और सामाजिक संतुलन को भी ध्यान में रख सकता है।

किरण सिंह देव की आगे क्या भूमिका?

इसी बीच भाजपा के भीतर किरण सिंह देव की भविष्य की भूमिका को लेकर भी अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं। एक चर्चा यह है कि स्वास्थ्य लाभ के बाद उन्हें संगठन से इतर सरकार में जिम्मेदारी दी जा सकती है। मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल की स्थिति में उनका नाम सामने आने की अटकलें भी राजनीतिक हलकों में हैं।

हालांकि, यह अभी पूरी तरह संभावनाओं और चर्चाओं तक सीमित है। किसी भी बदलाव पर अंतिम फैसला भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा। यदि भविष्य में किरण सिंह देव को सरकार में जिम्मेदारी मिलती है, तो संगठन में स्थायी तौर पर किसी नए चेहरे को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी देने का रास्ता भी खुल सकता है।

प्रदेश प्रभारी पर भी नजर

छत्तीसगढ़ भाजपा में सिर्फ प्रदेश संगठन ही नहीं, बल्कि प्रदेश प्रभारी के पद को लेकर भी जल्द फैसला होने की उम्मीद जताई जा रही है। नितिन नबीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद छत्तीसगढ़ के प्रभारी पद पर नए चेहरे की नियुक्ति जरूरी हो गई है।

राष्ट्रीय टीम के गठन के बाद अब पार्टी नेतृत्व की नजर छत्तीसगढ़ संगठन पर भी है। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रदेश प्रभारी और संगठनात्मक जिम्मेदारियों को लेकर एक साथ बड़े फैसले सामने आ सकते हैं।

फिलहाल भाजपा के भीतर संभावित नामों को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। कार्यकारी अध्यक्ष कौन होगा, प्रदेश प्रभारी के रूप में किसे जिम्मेदारी मिलेगी और किरण सिंह देव की आगे की भूमिका क्या होगी – इन सभी सवालों का जवाब अब भाजपा हाईकमान के फैसले से ही स्पष्ट होगा।

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