PM मोदी के उत्तराधिकारी पर सबसे बड़ा अपडेट! RSS का सीक्रेट सर्वे लीक, सालों के सस्पेंस से उठा पर्दा

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भारतीय राजनीति के गलियारों में इन दिनों एक ऐसा सवाल गूँज रहा है जिसने सत्ता के शिखर पर हलचल तेज कर दी है। 2024 के चुनावों के बाद अब सबकी नजरें 2029 के उस महामुकाबले पर टिकी हैं, जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तराधिकारी के रूप में दो दिग्गज नाम सबसे ऊपर उभरकर सामने आ रहे हैं।

एक तरफ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का चर्चित ‘बुलडोजर मॉडल’ है, तो दूसरी तरफ केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का ‘एक्सप्रेसवे और इंफ्रास्ट्रक्चर’ वाला धुआंधार विकास। दिल्ली के लुटियंस जोन से लेकर नागपुर के रेशीमबाग तक, हर तरफ बस एक ही चर्चा गर्म है कि आखिर संघ और जनता की पहली पसंद कौन बनने वाला है?

RSS का कथित ‘गुप्त सर्वे’ और दिल्ली की हलचल

सियासी गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने भविष्य की रणनीति तय करने के लिए एक आंतरिक सर्वे कराया है। हालांकि, संघ की ओर से इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों का दावा है कि इस ‘सीक्रेट रिपोर्ट’ में 2029 के संभावित चेहरों की लोकप्रियता को बारीकी से आंका गया है। खबर है कि इस सर्वे में जनता की राय दो स्पष्ट हिस्सों में बंटी नजर आ रही है। जहाँ युवा और कट्टर हिंदुत्व समर्थक वर्ग योगी आदित्यनाथ के सख्त शासन के मुरीद हैं, वहीं मध्यम वर्ग और व्यापारी तबका नितिन गडकरी की विकासवादी छवि और उनके काम करने के बेबाक अंदाज को प्रधानमंत्री पद के लिए सबसे उपयुक्त मान रहा है।

योगी का ‘बुलडोजर मॉडल’ बनाम गडकरी का ‘विकास पथ’

योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और राजनीतिक रूप से जटिल राज्य में ‘लॉ एंड ऑर्डर’ की जो मिसाल पेश की है, उसने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर एक ‘मजबूत नेता’ के रूप में स्थापित कर दिया है। उनके समर्थकों का मानना है कि देश को एक ऐसे प्रधानमंत्री की जरूरत है जो बिना डरे कड़े फैसले ले सके। दूसरी ओर, नितिन गडकरी को भाजपा का ‘विकास पुरुष’ कहा जाता है। बिना किसी विवाद में पड़े विपक्षी दलों के बीच भी अपनी स्वीकार्यता बनाए रखने वाले गडकरी की सबसे बड़ी ताकत उनका ‘परफॉर्मेंस’ है। गडकरी का विजन भारत को हाईटेक सड़कों के जरिए जोड़ने का है, जिसे देश की जनता ने जमीन पर उतरते हुए देखा है।

भाजपा के भीतर ‘शीतयुद्ध’ की सुगबुगाहट?

क्या भाजपा के भीतर नेतृत्व को लेकर कोई गुप्त खींचतान चल रही है? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के भीतर एक ‘साइलेंट वॉर’ जैसी स्थिति बन रही है। पार्टी का एक खेमा चाहता है कि भाजपा अपने वैचारिक एजेंडे यानी हिंदुत्व पर और भी मजबूती से आगे बढ़े, जिसके लिए योगी आदित्यनाथ से बेहतर कोई दूसरा चेहरा नहीं हो सकता। वहीं, दूसरा खेमा ‘सर्वसमावेशी’ राजनीति और आर्थिक प्रगति को प्राथमिकता देते हुए नितिन गडकरी को आगे रखना चाहता है। हाल के दिनों में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में हुए बदलावों और बड़े नेताओं के बयानों को विशेषज्ञ इसी ‘शीतयुद्ध’ के चश्मे से देख रहे हैं।

सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग: कौन है नंबर 1?

अगर सोशल मीडिया ट्रेंड्स पर नजर डालें, तो योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता किसी सुपरस्टार से कम नहीं दिखती। उनकी रैलियों में उमड़ने वाली भारी भीड़ और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उनका दबदबा उन्हें इस रेस में काफी आगे रखता है। लेकिन नितिन गडकरी की सादगी और उनके काम की तारीफ करने वाले ‘साइलेंट वोटर्स’ की तादाद भी छोटी नहीं है। ‘मूड ऑफ द नेशन’ जैसे हालिया सर्वे भी इशारा करते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी के बाद अमित शाह, योगी आदित्यनाथ और नितिन गडकरी के बीच कांटे की टक्कर बनी हुई है।

2029 का रास्ता: विकास या विरासत?

2029 की चुनावी रेस अभी भले ही दूर नजर आती हो, लेकिन इसकी बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी ‘ब्रांड इमेज’ को बरकरार रखने की है। क्या पार्टी योगी की ‘विरासत और अनुशासन’ को चुनेगी या गडकरी के ‘विकास और दूरदर्शिता’ पर दांव लगाएगी? आरएसएस के नागपुर मुख्यालय से लेकर दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय मार्ग स्थित भाजपा दफ्तर तक, रणनीति बनाने वाले माहिर खिलाड़ी इस पहेली को सुलझाने में जुटे हैं। फिलहाल, जनता खामोश है, लेकिन ‘बुलडोजर’ और ‘हाईवे’ के बीच छिड़ी यह जंग आने वाले समय में भारतीय राजनीति की दिशा और दशा दोनों तय करने वाली है।