भूख मिटाने के लिए बेटियों को बेच रहे हैं लोग, भारत के पड़ोसी से आया डरा देने वाला रिपोर्ट; देख UN के भी उड़े होश
Afghanistan: घोर प्रोविंस में हालात खास तौर पर बहुत खराब हैं. हर सुबह, सैकड़ों लोग काम की तलाश में सड़क किनारे खड़े होते हैं. लेकिन, ज़्यादातर को काम नहीं मिल पाता है.
Afghanistan: अफ़गानिस्तान में गरीबी और भुखमरी का संकट खतरनाक लेवल पर पहुँच गया है. हालात इतने खराब हैं कि कई परिवार अपने बच्चों को बेचने पर मजबूर हैं. यूनाइटेड नेशंस के मुताबिक, देश में लगभग 4.7 मिलियन लोग भुखमरी के कगार पर हैं. यह अफ़गानिस्तान की कुल आबादी का 10% से ज़्यादा है.
घोर प्रोविंस में हालात खास तौर पर बहुत खराब हैं. हर सुबह, सैकड़ों लोग काम की तलाश में सड़क किनारे खड़े होते हैं. लेकिन, ज़्यादातर को काम नहीं मिल पाता है. BBC की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 45 साल के जुमा खान ने कहा कि उन्हें पिछले डेढ़ महीने में सिर्फ़ तीन दिन काम मिला है. उन्होंने कहा कि उनके बच्चे लगातार तीन रात भूखे सोए. उन्हें आटा खरीदने के लिए पड़ोसी से पैसे उधार लेने पड़े.
बासी रोटी खाने को मजबूर
मज़दूर रबानी ने कहा कि जब उन्हें पता चला कि उनके बच्चे दो दिन से भूखे हैं, तो उन्हें लगा कि जीने का कोई मतलब नहीं है. इस बीच, बुज़ुर्ग ख्वाजा अहमद ने रोते हुए कहा कि उनकी उम्र की वजह से उन्हें कोई काम नहीं देता और उनका परिवार भूखा मर रहा है. जब आस-पास की बेकरी में बासी रोटी बांटी जाती है, तो लोग उसे खरीदने के लिए दौड़ पड़ते हैं. एक मज़दूर को काम देने आए आदमी का दर्जनों लोग पीछा करते हैं.
गांवों में हालात और भी खराब हैं. अब्दुल रशीद अज़ीमी ने कहा कि वह अपनी 7 साल की जुड़वां बेटियों को बेचने को तैयार हैं. उन्होंने रोते हुए कहा कि उनके पास उन्हें खिलाने के लिए काफ़ी खाना नहीं है. उनकी पत्नी ने कहा कि परिवार कभी-कभी सिर्फ़ रोटी और गर्म पानी पर गुज़ारा करता है.
5 साल की बेटी को बेचा
BBC की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सईद अहमद नाम के एक पिता ने अपनी 5 साल की बेटी शाइका को उसके इलाज के लिए एक रिश्तेदार को बेच दिया. लड़की को अपेंडिसाइटिस और लिवर की बीमारी थी. वह इलाज का खर्च नहीं उठा सकता था. सईद ने कहा कि वह अपनी बेटी को 200,000 अफ़गानियों में बेचने के लिए राज़ी हो गया. अभी इलाज के लिए कुछ पैसे लिए गए हैं, और 5 साल बाद लड़की को किसी रिश्तेदार के घर भेज दिया जाएगा.
अफ़गानिस्तान में संकट किस वजह से है?
पहले, अफ़गानिस्तान में लाखों लोगों को विदेश से खाने की मदद मिलती थी. उन्हें आटा, तेल, दालें और बच्चों के लिए खाने का सामान दिया जाता था. लेकिन अब, अमेरिका समेत कई देशों ने मदद में काफ़ी कमी कर दी है. यूनाइटेड नेशंस के मुताबिक, 2025 के मुकाबले इस साल विदेशी मदद में 70% की कमी आई है. सूखे, बेरोज़गारी और महंगाई ने हालात और खराब कर दिए हैं.
अस्पतालों में कुपोषित बच्चों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है. कई नए जन्मे बच्चों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है. डॉक्टरों का कहना है कि गरीबी और दवाओं की कमी बच्चों की मौत के मामलों में बढ़ोतरी की वजह बन रही है. कई परिवार इलाज का खर्च नहीं उठा सकते, जिससे उन्हें बीमार बच्चों को अस्पताल से घर ले जाना पड़ता है. डॉक्टरों और नर्सों का कहना है कि हर दिन कई बच्चे मर रहे हैं, और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं.
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