मंगेतर के पीठ-पीछे 5 लड़कों से चल रहा था चक्कर, चैट पर भेजती थीं अश्लील तस्वीरें, पर्दाफाश होते ही खेला ‘बेचारी लड़की’ वाला खेल..

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“एक महिला जो पैसों के लिए किसी भोले-भाले पुरुष को शादी के चक्कर में फंसाती है और खुद अपने मंगेतर के नाक के नीचे दूसरे लड़कों से अश्लील बातें करती है, फिर पर्दाफाश होते ही लड़का शादी से इनकार कर देता है लेकिन लड़की उसको ब्लैकमेल करने के लिए ‘बेचारी’ वाला दांव-पेंच खेलती है और झूठा केस दर्ज करवा देती है”, यह सब सुनने में किसी फ़िल्म की तरह लगता है लेकिन ये एक असल ज़िन्दगी की दास्तां है।

जिसमें अमेरिका के रहने वाले मिलिंद Borkar को पुणे के मोरवाडी पिंपरी इलाक़े में रहने वाली 38 वर्षीय Pallavi Chandrakant गायकवाड़ द्वारा फंसाया गया। बाद में इनको और इनके परिवार को गंभीर रूप से प्रताड़ित किया गयाl

इस बीच ऐसी कई खबरें सामने आई हैं जहां महिला ‘लड़की’ होने का फायदा उठाती हैं और झूठे केस दर्ज करवा देती हैं l ऐसे में निर्दोष पुरुषों के लिए यह एक गंभीर विषय बनता जा रहा है, जहां वो न ही ज़वाब दे सकते हैं और न ही अपनी आवाज़ उठा सकते हैं।

दरअसल, Mumbai निवासी मिलिंद Borkar ने पल्लवी चंद्रकांत गायकवाड़ के मामले ने गायकवाड़ परिवार पर FIR दर्ज करने के बाद तथ्यों का अधिक से अधिक खुलासा किया है।

जांच के बाद, वर्सोवा पुलिस द्वारा गायकवाड़ परिवार के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई है और पल्लवी के भाई प्रतीक चंद्रकांत गायकवाड़, जो कथित तौर पर भारत से बाहर हैं, उनको वर्सोवा पुलिस द्वारा फरार और वांटेड अपराधी बताया गया है।

दर्ज की गई FIR के अनुसार, मिलिंद ने पल्लवी के साथ अपना अरेंज मैरिज प्लान रद्द कर दिया था जब इन्होंने पल्लवी को 4 से 5 पुरुषों के साथ अपनी कई अश्लील तस्वीरें और वीडियो साझा करते हुए पाया और पल्लवी के जीवन के कई काले सच का भी पता लगाया।

सच्चाई जानने के बाद मिलिंद ने पल्लवी को इस तरह के पापपूर्ण कार्यों में शामिल न होने और अच्छे कर्म करके एक बेहतर इंसान बनने की सलाह दी.. पल्लवी के काले सच को जानने के बावजूद, उसके भाई Pratik Chandrakant Gaikwad और मामा Sanjeev सोनवणे ने ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया और मिलिंद के परिवार को 6 महीने तक शादी करने और फिर तलाक लेने की धमकी दी और कहा कि मिलिंद पर झूठे मामले दर्ज करके उसका जीवन और करियर बर्बाद कर देंगे।

इन धमकियों के बाद, सबूतों और अपराध की गंभीर प्रकृति को देखते हुए, मुंबई की अंधेरी के अदालत ने वर्सोवा पुलिस को गायकवाड़ परिवार के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया।

आरोप पत्र पिंपरी मोरवाडी के निवासी पल्लवी chandrakant गायकवाड़, भाई प्रतीक चंद्रकांत गायकवाड़, पिता चंद्रकांत गुलाब गायकवाड़ और पुणे विश्वविद्यालय के पुस्तकालय से सेवानिवृत्त कर्मचारी और पुणे के औंध के निवासी संजीव शांतिलाल सोनावने के खिलाफ इक्स्टॉर्शन ब्लैक मेलिंग और क्रिमिनल इंटिमिडेशन के आरोप दायर किए गए है।

पिंपरी पुलिस स्टेशन में मिलिंद के खिलाफ लगाए गए आरोपों में, साक्ष्य तथ्य यह भी बताते हैं कि मिलिंद पिंपरी के तत्कालीन पुलिस आयुक्त कृष्ण प्रकाशजी के पास पहुंचे और उनके खिलाफ दर्ज मामले को झूठा साबित करने के लिए सभी तथ्य और सबूत पेश किए।

सबूतों की समीक्षा करते हुए, आयुक्त इस बात से सहमत हुए के ये झूठा केस है और इस मामले में उचित  कार्यवाही की जाएगी। यह भी बताया गया है कि झूठी FIR दर्ज करने वाले अधिकारी और पल्लवी की शिकायत में शामिल एक अन्य अधिकारी को कई मामलों में कदाचार करते पाए जाने के बाद निलंबित कर दिया गया था।

मिलिंद ने अपने बयान में दावा किया है कि सच्चाई जानने और सभी ऑडियो/वीडियो और अन्य सबूत उपलब्ध कराने के बावजूद, मुंबई पुलिस इस मामले में किसी भी तरह की जांच करने को तैयार नहीं थी और ख़ामोश थी क्योंकि शिकायत एक महिला के खिलाफ थी इस डर से के पल्लवी शायद उन्हें भी झूठे केस में फँसा सकती है।

मिलिंद के अनुसार, इस तरह का पक्षपातपूर्ण व्यवहार पुलिस का ग़लत व्यवहार है और एक पीड़ित पुरुष पर अपराध और अन्याय को केवल इसलिए बढ़ाता है क्योंकि अपराधी एक महिला है। यह संविधान के अनुच्छेद 14 के खिलाफ एक प्रथा हैl

नतीजतन, पुलिस का यह पक्षपातपूर्ण रवैया पुरुषों को उनके मौलिक अधिकारों से वंचित करता है, न्याय में देरी करता है व पीड़ा को बढ़ाता है, और कई टाइम सबूतों को ख़त्म कर देता है जिससे न्याय मिलना मुश्किल हो सकता है जबकि एक आपराधिक दिमाग वाली महिला एक पुरुष के जीवन को नष्ट करने के लिए पुलिस के इस तरह के रवैये का फायदा उठाती है।

नि:संदेह यह व्यवहार एक अपराधी महिला को पुरुष को परेशान करने के लिए लाभ उठाने का कारण बनता है। false prosecution और झूठा मुकदमा चलाना एक गंभीर अपराध है।

इसका कारण बनने के लिए भारतीय कानूनी प्रणाली बहुत त्रुटिपूर्ण है और इसे पुलिस डिपार्टमेंट के स्टार से ठीक किया जाना चाहिए, अन्यथा भारत की भावी पीढ़ी बहुत अधिक दांव पर है, जिससे आगे चलकर बेकसूर मिलिंद की तरह ही पुरुषों को गंभीर आरोपों में फंसाया व प्रताड़ित कर, उनकी ज़िंदगी और इज़्ज़त के साथ खिलवाड़ होगा. वही सच में क्राइम से पीड़ित महिलाओं को समय से न्याय मिलना कठिन होगा क्योंकि उनके केस इन झूठे केस में दबकर रह जाएगी।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि जैसे महिलाओं के लिए आयोग बना है वैसे पुरूषों के लिए पुरूष आयोग का गठन नहीं किया जा सकता है।  

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