मां-बेटे की उम्र में 15 साल का अंतर’, चुनाव आयोग की गलती का खामियाजा भुगत रहे लोग; नोटिस ने बढ़ाई टेंशन

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चुनाव आयोग की पुरानी गलतियों के कारण दिल्ली के नागरिकों को मतदाता सूची में उम्र और जन्मतिथि की गड़बड़ी पर …और पढ़ें

मां-बेटे की उम्र में सिर्फ 15 साल का अंतर। AI जनरेटेड
मां-बेटे की उम्र में सिर्फ 15 साल का अंतर। AI जनरेटेड

दिल्ली। वर्ष 2002 में चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) किया था। उस दौरान चुनाव आयोग ने एसआईआर में एक महिला की उम्र 9 वर्ष कम करके दर्ज की थी। कम की गई उस उम्र का अंजाम महिला का बेटा इस एसआईआर में भुगत रहा है।

दिल्ली। वर्ष 2002 में चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) किया था। उस दौरान चुनाव आयोग ने एसआईआर में एक महिला की उम्र 9 वर्ष कम करके दर्ज की थी। कम की गई उस उम्र का अंजाम महिला का बेटा इस एसआईआर में भुगत रहा है।

चुनाव आयोग ने महिला के बेटे को नोटिस जारी करके पूछा है कि यह कैसे संभव है। मां व बेटे की उम्र में सिर्फ 15 वर्ष का अंतर है।

बेटे-मां की उम्र में 15 साल का अंतर

अरशद अपने परिवार के साथ ब्रह्मपुरी में रहते हैं। उनके माता-पिता की मौत हाे चुकी है। वर्ष 2002 में उनकी मां ने एसआईआर में भाग लिया था। युवक का कहना मौजूदा वक्त में चल रहे एसआईआर में उन्होंने अपनी मां की जानकारी साझा की है। कुछ दिनों पहले उनके पास नोटिस आया कि उनकी मां और उनकी उम्र में 15 वर्ष का अंतर है।

उन्होंने मां के कागजात मांगे, जिससे यह पता चल सके कि दोनों की उम्र में कितनी उम्र का फर्क है। युवक का कहना है कि वर्ष 1994 से पहले उनकी मां का पहचान पत्र बना था। उनके पास पासपोर्ट भी नहीं था।

मां की मौत हो गई

वर्ष 2020 तक आधार कार्ड भी नहीं आया था। युवक का कहना है कि पहचान पत्र के अनुसार, वर्ष 2002 में उनकी मां की उम्र 35 वर्ष थी। एसआईआर होने के कुछ वर्ष बाद उनकी मां की मौत हो गई।

युवक ने खुद की उम्र साबित करने के लिए अपनी जन्मपत्री नोटिस के जवाब में लगाई है। युवक ने 2002 की मतदाता सूची निकाली तो पता चला चुनाव आयोग ने मां की उम्र करीब 9 वर्ष कम करके रिकॉर्ड में दर्ज की हुई है। जिसकी वजह से अब उन्हें परेशानी हो रही है। जबकि उनके पहचान पत्र में उम्र ठीक थी।

चुनाव आयोग ने पूछा ऐसा कैसे हो सकता है

नूर ए इलाही इलाके में बाबू खान नाम के एक व्यक्ति रहते हैं। उन्होंने दो निकाह किए हुए हैं। दोनों पत्नियों से उन्हें दो बेटे हैं। दोनों बेटों की उम्र में नौ माह से कम का अंतर है। दोनो बेटों ने एसआईआर फार्म में अपने पिता की जानकारी दी थी।

चुनाव आयोग ने दोनों युवकों को नोटिस जारी करके पूछा है यह कैसे संभव है कि एक ही व्यक्ति के 9 माह से कम समय में दो बच्चे हो जाएं। दोनों युवकों ने अपनी मां के निकाह नामा की फोटो कापी नोटिस के जवाब में लगाई है, लेकिन वह उर्दू भाषा में है। बीएलओ को उर्दू आती नहीं है। युवकों के पिता ने निर्वाचन अधिकारियों के सामने पेश होकर बताया कि उनके दोनों बच्चों की मां अगल-अलग है।

नोटिस के जवाब के बाद नाम जुड़ेगा या नहीं

मतदाताओं को नोटिस दिए जा रहे हैं। मतदाताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह बनी हुई है कि वह नोटिस का जवाब चुनाव आयोग को दे रहे हैं। बीएलओ उनसे कागजात भी ले रहे हैं और वेबसाइट पर अपलोड भी कर रहे हैं। लेकिन उपभोक्ता को इसका जवाब नहीं मिल रहा है कि नोटिस का उत्तर देने के बाद उनका नाम मतदाता सूची में रहेगा या हटेगा।

नोटिस का जवाब देने के बाद उपभोक्ता को चुनाव आयोग की तरफ से कोई ऐसा प्रमाण (मोबाइल पर मैसेज व लिखित) में जवाब नहीं मिल रहा है, जिससे यह सुबूत रहे कि उसने जवाब दाखिल किया किया है। इस मामले में जिला निवार्चन कार्यालय के अधिकारियों का कहना है कि चुनाव आयोग ही इसपर कुछ बता सकता है।

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