महंत नरेंद्र गिरी ने की आत्महत्या,12 पेज का लिखा सुसाइड नोट

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इलाहाबाद एसकेटी डॉटकॉम

सनातन धर्म के सबसे बड़े संगठन अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बाघमबारी मटके संचालक नरेंद्र गिरी ने इलाहाबाद स्थित अपने मठ में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उन्होंने 12 पेज के एक सुसाइड नोट में किसी शिष्य का नाम लिखा है जो काफी समय से उन्हें परेशान कर रहा था जिसकी वजह से उन्होंने यह कदम उठाया है।

उन्होंने 12 पेज के सुसाइड नोट में लिखा है कि मठ की गद्दी किसे सौंपी जाए और किसे क्या दिया जाए। इसके अलावा उन्होंने दो अन्य लोगों के नाम भी लिखे हैं इलाहाबाद में ही लेटे हुए हनुमान मंदिर के संचालक हैं। जानकारी के मुताबिक वह अपने मठ में फांसी से लटके हुए मिले। उन्होंने अपने सुसाइड नोट में यह मंदिर के संचालक एवं उसके बेटे संदीप गिरी का भी इसमें जिक्र किया है। पुलिस के फिलहाल उनके शिष्य आनंद गिरि एवं संदीप गिरी तथा उनके पिता को हिरासत में ले लिया है। पुलिस के अनुसार इस नोट को उन्होंने एक तरह से वसीयत के रूप में लिखा है उसमें उन्होंने अपना मार्मिक बयान में लिकह है कि सम्मान नहीं मिलने की वजह से ही वह दुखी हैं।

उनके शिष्य आनंद गिरि जोकि हरिद्वार में थे उन्होंने एक टीवी चैनल को बताया कि उनके गुरु किसी ने हत्या की है मेरे गुरु आप हत्या नहीं कर सकते हैं वह प्रयागराज के लिए निकल रहे हैं कुछ लोगों का इस षड्यंत्र में पूरा हाथ हो सकता है उन्हीं लोगों ने पहले मेरे और मेरे गुरु के बीच मतभेद कराया जिसके कारण मठ से मेरा निष्कासन भी हुआ। लेकिन मैंने इस विवाद को दूर कर दिया तथा अपने गुरु से माफी मांग ली थी। कुछ लोग मटकी भूमि को बेचना चाहते थे जिसका उसने विरोध किया था मेरे विरोध के कारण ही मटकी भूमि बिक नहीं पाई इसीलिए इन लोगों ने मेरे तथा मेरे गुरु के बीच मतभेद करा दिया

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