पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर ताजा अपडेट ; जानिए भारत में कब तक स्थिर रहेंगे दाम

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वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में तनाव के बावजूद 13 अप्रैल 2026 को भारत के प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रहीं। सरकार के निर्यात शुल्क बढ़ाने और कंपनियों द्वारा लागत वहन करने से फिलहाल राहत बनी हुई है।

पेट्रोल पंप पर मोटरसाइकिल और स्कूटर में ईंधन भरवाते लोग भारत में तेल की कीमतों के संदर्भ में।
भारत के एक महानगर में स्थित पेट्रोल पंप

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों का स्थिर रहना आम उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल राहत भरी खबर है। 13 अप्रैल 2026 को देश के प्रमुख शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में ईंधन के दामों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव जारी है।

मध्य पूर्व क्षेत्र, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के आसपास बढ़ते तनाव ने वैश्विक कच्चे तेल के दामों को प्रभावित किया है। इसके बावजूद भारत में तेल विपणन कंपनियां फिलहाल इन बढ़ती लागतों का भार खुद उठा रही हैं, ताकि आम जनता पर अचानक कीमतों का बोझ न पड़े। सरकार ने भी इस स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर निर्यात शुल्क बढ़ाने का कदम उठाया है, जिससे घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके और महंगाई पर नियंत्रण बना रहे।

इसके पहले केंद्र सरकार द्वारा ₹10 प्रति लीटर की एक्साइज ड्यूटी में कटौती की गई थी, जिसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को राहत देना था। हालांकि, वर्तमान स्थिति में तेल कंपनियां पूरी राहत सीधे उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचा पा रही हैं, बल्कि बढ़ती लागत को आंशिक रूप से खुद वहन कर रही हैं।

अगर प्रमुख शहरों में मौजूदा कीमतों की बात करें, तो दिल्ली में पेट्रोल ₹94.77 प्रति लीटर और डीजल ₹87.67 प्रति लीटर पर स्थिर है। मुंबई में यह दरें अपेक्षाकृत अधिक हैं, जहां पेट्रोल ₹103.54 और डीजल ₹90.03 प्रति लीटर बिक रहा है। कोलकाता में पेट्रोल ₹105.45 और डीजल ₹92.02 प्रति लीटर पर है, जबकि चेन्नई में पेट्रोल ₹101.06 और डीजल ₹92.61 प्रति लीटर दर्ज किया गया है। दक्षिण भारत के अन्य शहरों में भी कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, हैदराबाद में पेट्रोल ₹107.50 और डीजल ₹95.70 प्रति लीटर, जबकि बेंगलुरु में पेट्रोल ₹102.92 और डीजल ₹90.99 प्रति लीटर पर बिक रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि तेल विपणन कंपनियों द्वारा वैश्विक मूल्य दबाव को अस्थायी रूप से सहने और सरकार के कर संबंधी उपायों के चलते फिलहाल कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। हालांकि, यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो घरेलू स्तर पर ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी लगभग तय मानी जा रही है। निजी क्षेत्र के कुछ ईंधन विक्रेताओं द्वारा पहले ही सीमित स्तर पर कीमतों में वृद्धि शुरू करने के संकेत भी मिले हैं।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह स्पष्ट है कि मौजूदा स्थिरता एक अस्थायी राहत है। वैश्विक परिस्थितियों और बाजार के दबाव को देखते हुए आने वाले समय में ईंधन की कीमतों में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, जो सीधे तौर पर आम जनता और देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगा।