जागर लगाने के बाद बसंती बिष्ट नहीं कहीं यह बात

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हल्द्वानी एसकेटी डॉट कॉम

जोहार सांस्कृतिक एवं वेलफेयर सोसाइटी के तत्वाधान में आयोजित दो दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम में उत्तराखंड की मशहूर जागर सम्राट बसंती बिष्ट ने अपनी जोरदार प्रस्तुति दी. उन्होंने कहा कि जाकर एक बहुत पुरानी विधा है इसे संरक्षण करने की आज पहले से अधिक आवश्यकता है युवाओं को जागर के शब्दों और उच्चारण को अच्छी तरह समझना होगा तभी उसके वास्तविक अर्थ को वह समझ पाएंगे

जागर से देवताओं का वंदन किया जाता है उन्हें आमंत्रित किया जाता है तो वह मनुष्य में अवतरित होकर अपनी देववाणी से सभी को समृद्ध और खुशहाल रहने का आशीर्वाद देते हैं जागर सदियों पुरानी वह विधा है जिसके माध्यम से किसी भी प्रकार के दुख और अनिष्ट के बारे में देवताओं से पूछा जाता था और उन्हीं के मार्गदर्शन में उस दुख और कष्ट का निवारण होता था.

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आज भी आधुनिक चिकित्सा युग में कई ऐसी चीजें हैं जो अभी भी परिपूर्ण नहीं है और वह सब पुरातन समय की गाथा पर निर्धारित हैं इनका हल निकालने के लिए दीप टाउनशिप आज आज पूछा जाता है देवता ही प्रकृति के सबसे नजदीक है और प्रकृति से बढ़िया उपचार कहीं नहीं होता है

बसंती बिष्ट के जागर को लोगों ने बड़े तन्मयता से सुना और अनुभव किया जागर सम्राटकी

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