भदोरिया दिवस के अवसर पर शहीद हुए सैनिकों की याद कर युद्ध में भागीदारी कर चुके गिरीश चंद्र जोशी ने सुनाया ऐसा वृतांत जिससे खड़े हो गए रोंगटे (देखें वीडियो )

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हल्द्वानी एसकेटी डॉट कॉम

17 कुमाऊं रेजिमेंट ने 10 दिसंबर को भदोरिया दिवस मनाया इस अवसर पर इस युद्ध में शहीद हुए जवानों और अधिकारियों को श्रद्धांजलि दी गई

भदोरिया दिवस को याद करते हुए इस युद्ध में शामिल रहे गिरीश चंद्र जोशी ने बताया कि कैसे उन्हें विषम परिस्थितियों में युद्ध लड़ना पड़ा जबकि पाकिस्तान में ऊंचाई वाले स्थान पर था बांग्लादेश बॉर्डर पर जब मुक्ति वाहिनी के साथ मिलकर भारतीय सेना को युद्ध करने का आदेश मिला तो पाकिस्तान की ओर से ऊंचाई पर से गोले बरसाए गए जिसके बावजूद भारतीय सेना ने  ब्रिगेडियर मनकोटिया के नेतृत्व में युद्ध लड़ा पाकिस्तानी जोकि याहिया खान जिंदाबाद और इंदिरा गांधी मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए आगे बढ़ रही थी तो उन्हें रोक दिया.

1962 65 और 71 के युद्ध में भागीदारी कर चुके सैनिक गिरीश चंद्र जोशी ने जो वृतांत सुनाया उससे रोंगटे खड़े हो गए आप भी देखें वीडियो

गिरीश चंद जोशी जी ने वृतांत सुनाया तो उस समय रोंगटे खड़े हो गए . कुमाऊं रेजिमेंट की 17 बटालियन 1972 में पूर्ण रूप से कुमाऊं रेजिमेंट बन गई. गिरीश चंद्र जोशी ने बताया कि जब उन्हें आदेश मिला कि भदोरिया को विजय करना  है तभी यह युद्ध जीता जा सकता है इसी के मद्देनजर हमारी बटालियन ने बिना किसी विशेष मदद के पूरी ताकत के साथ युद्ध लड़ कर 10 दिसंबर को भदोरिया को विजय कर लिया जिसके बाद पाकिस्तान के हौसले पस्त हो गए इसीलिए 10 दिसंबर को भदोरिया विजय दिवस मनाया जाता है.

गिरीश चंद्र जोशी ने बताया कि 16 दिसंबर को जब कुमाऊं रेजीमेंट आगे बढ़ रही थी तो पाकिस्तान की ओर से एक आधा किलो मीटर लंबे पुल को ध्वस्त कर दिया इस दौरान आदेश आया कि पाकिस्तान ने आत्मसमर्पण कर दिया है इसके बाद उनके चार बड़े-बड़े टैंक सफेद झंडे लेकर आ रहे हैं और उन्होंने अपने हाथ ऊपर करते हुए कहा कि हम आत्मसमर्पण कर रहे हैं जिसके बाद  हमने उन टांगों को अपने कब्जे में ले लिया पाकिस्तान के 90 हजार से अधिक सैनिकों ने इस युद्ध में आत्मसमर्पण किया उन्होंने कहा कि देश के लिए उन्होंने 62 65 और 71 का युद्ध लड़ा.

भदोरिया दिवस के अवसर पर आयोजित आरटीओ रोड के एक बैंकट हॉल में इस दौरान शहीद हुए सैनिकों को याद किया गया  भारत के 55 तथा पाकिस्तान के 85 से अधिक इस दौरान भदोरिया पर विजय के दौरान शहीद हुए  जिसकी वजह से वह आज अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं इस अवसर पर कर्नल भंडारी, नरेंद्र बिष्ट देवेंद्र सिंह मेहरा 17 कुमाऊं रेजीमेंट के समेत 50 से अधिक सैनिक मौजूद रहे

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