मीडिया सेंटर का सपना साकार होता इससे पहले स्वयं ही चल दिए गिरिजा

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हलद्वानी skt. com

अपने सपनों के मीडिया सेंटर को साकार होते देखने से पहले ही दुनिया को अलविदा कह गए नैनीताल के जिला सूचना अधिकारी गिरिजा शंकर जोशी। उन्होंने जितना प्रयास किया यह तो हर मीडिया कर्मी के जेहन में है।

अब जब भी गिरिजा के सपनों पर पंख लगेंगे तो पत्रकारों और अधिकारियों की एक ही मांग होनी चाहिए कि हल्द्वानी में बन रहे नए मीडिया सेंटर का नाम उनके नाम पर रखकर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दी जाए।

गिरिजा शंकर जोशी पद से पहले काम को तवज्जो देने वाले अधिकारी थे। यही वजह है कि हर कोई उनके जाने का गम नहीं भुला पा रहा है। सहज, मुस्कुराहट भरे व्यवहार और असाधारण कार्यनिष्ठा के लिए पहचाने जाने वाले जोशी जी ने इस मीडिया सेंटर के लिए जमीन तलाशने से लेकर शिलान्यास तक अथक मेहनत की थी।

स्व. जोशी की सोच केवल एक सरकारी भवन बनाने तक सीमित नहीं थी। वे अक्सर कहते थे – शहर बहुत फैल गया है, मीडिया सेंटर थोड़ा बड़ा होना चाहिए। उसमें गेस्ट हाउस भी होना चाहिए ताकि बाहर से आने वाले पत्रकारों के ठहरने की सुविधा हो। ब्लाॅक के पास मिली नई जगह उनकी ही दूरदर्शी सोच और लगातार प्रयासों का परिणाम है, जिसका शिलान्यास भी हो चुका है।

नैनीताल मंडल मुख्यालय होने के कारण पूरे कुमाऊं की महत्वपूर्ण खबरों के समन्वय में उनकी अहम भूमिका रहती थी। आपदा हो या कानून-व्यवस्था की स्थिति, वे दिन-रात उपलब्ध रहते थे। सहयोगियों के अनुसार, हमने कभी उन्हें किसी काम के लिए बहाना बनाते नहीं सुना। सरकारी सेवा में कई अधिकारी आते हैं, लेकिन कुछ लोग पद से नहीं, व्यवहार और कार्यकुशलता से याद रह जाते हैं। गिरिजा शंकर जोशी उन्हीं में से एक थे।

ऐसे में प्रशासन से मांग है कि उनके सपने को उनके नाम के साथ ही साकार किया जाए और इसे स्व. गिरिजा शंकर जोशी मीडिया सेंटर, हल्द्वानी के नाम से जाना जाए। जिला सूचना अधिकारी के निधन की सूचना मिलते ही सांसद अजय भट्ट समेत तमाम अधिकारी और पत्रकार उनके आवास पर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की। नैनीताल के जिला सूचना अधिकारी गिरिजा शंकर जोशी के आकस्मिक निधन पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गहरा दुःख व्यक्त किया । मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिजनों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी ने भी जिला सूचना अधिकारी श्री गिरिजा शंकर जोशी के आकस्मिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। रानीबाग चित्रशिला घाट में अंतिम संस्कार किया गया।

कर्म ही पहचान है

कहते हैं इंसान के कर्म ही इंसान के वजूद और उसकी चर्चा को सार्थक बनाते हैं। उन्हीं में से एक थे नैनीताल जिला सूचना अधिकारी गिरिजा शंकर जोशी। आज जब वो हमारे बीच नहीं हैं, तो ये पंक्ति और भी सार्थक लगती है। गिरिजा शंकर जोशी जी को लोग उनके पद से नहीं, उनके व्यवहार से जानते थे। वो कुर्सी पर बैठने वाले अधिकारी नहीं थे, दिलों में बैठने वाले इंसान थे। पत्रकारों के लिए वो एक सूचना अधिकारी से बढ़कर बड़े भाई, सच्चे साथी और सच्चे मार्गदर्शक थे। किसी पत्रकार का फोन कभी व्यस्त नहीं मिला, किसी की समस्या को उन्होंने कभी छोटा नहीं समझा। हर पत्रकार को एक ही नजर से देखना उनकी सबसे बड़ी पहचान थी। शायद यही वजह है कि आज नैनीताल जिले के हर पत्रकार की आंख नम है। प्रशासन में रहकर भी उन्होंने कभी प्रशासनिक दीवार खड़ी नहीं की। जिलाधिकारी कार्यालय से लेकर मीडिया सेंटर तक, हर कोई उनके हंसमुख स्वभाव का कायल था। उनका ठहाका, उनका कंधे पर हाथ रखकर अरे हो जाएगा कहना, अब हमेशा के लिए खामोश हो गया। पिथौरागढ़, चंपावत और फिर नैनीताल में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने जो कर्म किए, वही आज उनकी चर्चा बन गए हैं, जो उनके कर्मों की जीवित निशानी हैं। शायद कर्तव्य के प्रति समर्पण की इससे बड़ी मिसाल नहीं हो सकती। कर्म करते-करते ही कर्मयोगी चला गया। आज उनका किराए का छोटा सा आशियाना बीके पुरम में लोगों से भरा था। जिसको खबर मिली, वह उनके इस आशियाने की ओर दौड़ पड़ा। जिलाधिकारी, एसएसपी, एसडीएम से लेकर सांसद तक, सबकी आंखों में एक ही दर्द था हमने एक अच्छा इंसान खो दिया। गिरिजा जी, आप भले ही चले गए, लेकिन आपके कर्म, आपका व्यवहार और आपकी मुस्कान हमेशा नैनीताल के पत्रकार जगत के साथ-साथ जो भी आपका चिर-परिचित रहा होगा, उनके दिल में जिंदा रहेगी।

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