हल्द्वानी बेस अस्पताल में डायलिसिस व्यवस्था बदहाल, मरीजों की बढ़ी परेशानी

सोबन सिंह जीना बेस अस्पताल में डायलिसिस व्यवस्था को लेकर मरीजों और तीमारदारों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। किडनी के गंभीर मरीजों के लिए नियमित डायलिसिस बेहद जरूरी है। ऐसे में सरकारी अस्पताल की डायलिसिस सुविधा में तकनीकी खराबी और अन्य व्यवस्थागत दिक्कतों के चलते मरीजों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
हल्द्वानी बेस अस्पताल में डायलिसिस व्यवस्था बदहाल
मरीजों के अनुसार अस्पताल की डायलिसिस यूनिट में मशीनों के खराब होने और रखरखाव की कमी के चलते कई बार निर्धारित स्लॉट प्रभावित हो जाते हैं। इससे पहले से तय डायलिसिस शेड्यूल में बदलाव करना पड़ता है। कुमाऊं क्षेत्र के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह स्थिति और अधिक गंभीर है, क्योंकि वे महंगे निजी अस्पतालों में उपचार कराने में सक्षम नहीं हैं।
मशीनों की खराबी से स्लॉट प्रभावित
बताया जा रहा है कि पीपीपी मोड पर संचालित डायलिसिस विंग में समय-समय पर तकनीकी दिक्कतें सामने आती हैं। मशीनों के खराब होने पर मरीजों के निर्धारित स्लॉट रद्द या आगे बढ़ने की स्थिति बनती है। डायलिसिस पर निर्भर मरीजों के लिए समय पर उपचार नहीं मिलना गंभीर चिंता का विषय है।
लंबी वेटिंग से बढ़ रही परेशानी
मरीजों की संख्या के मुकाबले उपलब्ध डायलिसिस मशीनों और स्लॉट को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मरीजों को अपनी बारी के लिए इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में कई मरीजों और उनके परिजनों को वैकल्पिक व्यवस्था तलाशनी पड़ती है।
निजी सेंटरों का खर्च उठाना मुश्किल
सरकारी सुविधा प्रभावित होने पर मरीजों को मजबूरी में निजी डायलिसिस सेंटरों का रुख करना पड़ता है। निजी अस्पतालों में उपचार का खर्च गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए भारी पड़ता है। मरीजों के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से डायलिसिस मशीनों की नियमित मेंटेनेंस, पर्याप्त तकनीकी स्टाफ और सुचारु स्लॉट व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
मरीजों और तीमारदारों का कहना है कि डायलिसिस जैसी आवश्यक चिकित्सा सेवा में किसी भी तरह की अनियमितता मरीजों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बन सकती है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेकर व्यवस्था में सुधार की मांग की है
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