पत्रकार हिमांशु ठाकुर पर मुकदमा या सच्चाई दबाने की कोशिश? उठे बड़े सवाल,पढे खबर

काशीपुर के शोसल मीडिया पत्रकार हिमांशु ठाकुर पर पुलिस द्वारा दर्ज किया गया मुकदमा पिछले 24 घंटे से काफी सुर्खियों में हैं,इसकी एक वजह है कि जिसने मुकदमा लिखवाया है,फोन भी उसी ने किया और पैसा देने की पैशकश भी उसी ने की है, जबकि जिसके खिलाफ मुकदमा लिखा गया है, उनसे एक बार भी पैसे का जिक्र तक नहीं किया है, फिर मुकदमा उस मित्र पुलिस ने दर्ज किया है,जो रंगदारी के मामले में पिछले दिनों खुद पत्रकारों को मैनेज करती घूम रही थी,ताकि साहब की कुर्सी बच जाए। जरुरत पड़ी तो इसके सबूत खबरों के माध्यम से दिखाए जायेंगे।
अरे आत्महत्या से पहले सुखवंत ने क्या कुछ नहीं कहा था,उसकी आडियो इसकी गवाह और सबूत दोनों है।
इधर काशीपुर के शोसल मीडिया पत्रकार की जिस आडियो रिकार्डिंग को सबूत मानकर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है,उसकी सच्चाई सबसे समाने है। महिला खुद पत्रकार को फोन करती है, आडियो में यह बात महिला ने खुद कबूल भी की है, फिर पैसा देने की बात कर रही है,जबिक पत्रकार ने एक बार भी पैसे को लेकर कोई भी बात नहीं की है,
जबकि उसी महिला पर पूर्व एक व्यक्ति से रंगदारी का आरोप कैमरे पर एक पीड़ित ने लगाए हैं,जिसकी खबर हिमांशु ठाकुर ने प्रकाशित की है,उस महिला के खिलाफ ईमानदार पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है,और उसी महिला द्वारा सच्चाई को उजागर करने वाले पत्रकार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
यह एक तरह से सीधे सच्चाई को उजागर कर जनता की आवाज उठाने वाले कलमकारों का दमन की कार्यवाही मानी जि रही,जिसे लेकर पत्रकारों में भारी रोष है
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