धनतेरस पर चांदी का सिक्का खरीद रहे हैं? जानें किस देवी-देवता की आकृति वाला सिक्का माना जाता है शुभ
धनतेरस पर चांदी का सिक्का खरीदना उन परिवारों की पहली पसंद होता है जो कम बजट में शगुन की खरीद करना चाहते हैं। सिक्का छोटा होता है, संभालकर रखने में आसान होता है और दिवाली की पूजा में भी काम आता है। बाजार में चांदी के सिक्कों पर कई तरह की आकृतियां बनी मिलती हैं और अक्सर खरीदार दुविधा में पड़ जाते हैं कि कौन सी आकृति वाला सिक्का लेना शुभ रहेगा। आइए जानते हैं कि परंपरा में किन आकृतियों को विशेष महत्व दिया गया है।
सिक्कों पर शुभ मानी जाने वाली प्रमुख आकृतियां
सबसे अधिक प्रचलित और लोकप्रिय आकृति मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की युगल आकृति है। मान्यता में मां लक्ष्मी धन और समृद्धि की देवी मानी जाती हैं, वहीं गणेश जी को विघ्नहर्ता और शुभ आरंभ का देवता माना जाता है, इसलिए दोनों की साथ वाली आकृति वाला सिक्का सबसे ज्यादा खरीदा जाता है। दूसरी लोकप्रिय आकृति कमल पर विराजमान अकेली मां लक्ष्मी की है, जिसे खासतौर पर धन की कामना से जोड़ा जाता है। तीसरी आकृति भगवान कुबेर की है, जिन्हें परंपरा में देवताओं का कोषाध्यक्ष और धन का रक्षक माना गया है। इनके अलावा कुछ सिक्कों पर लक्ष्मी चरण, कलश, ॐ या स्वस्तिक जैसे शुभ चिह्न भी बने मिलते हैं, जो कई परिवारों की पसंद होते हैं।
यह समझना जरूरी है कि आकृति का चुनाव श्रद्धा और परिवार की अपनी परंपरा पर निर्भर करता है। किसी एक आकृति को ही एकमात्र सही बताने वाला कोई कड़ा नियम परंपरा में नहीं माना जाता है। कई परिवार वही आकृति चुनते हैं जो उनके घर की पूजा परंपरा से मेल खाती है, जबकि कुछ लोग कुंडली या कुल देवता के अनुसार भी चुनाव करते हैं। इसलिए दुकान पर जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय अपनी आस्था के अनुसार शांति से चुनाव करना ही ठीक माना गया है।
आकृति के साथ चांदी की असली जांच भी जरूरी
आकृति चाहे जो चुनें, सिक्के की चांदी असली और शुद्ध हो, यह जांचना उतना ही जरूरी है। खरीदते समय सिक्के पर बने शुद्धता के अंक देखें, सामान्यतः 999 शुद्धता अंकित सिक्के को अच्छा माना जाता है। संभव हो तो हॉलमार्क वाला सिक्का ही लें और दुकान से वजन तौलवाकर पक्का बिल जरूर लें, ताकि बाद में किसी तरह की दिक्कत न हो। पैकिंग सील बंद हो और सिक्के पर खरोंच या धब्बे न हों, यह भी देख लें। भाव को लेकर किसी वादे या अनुमान पर भरोसा न करें, खरीद का आधार शगुन और श्रद्धा ही रखें।
सिक्के के वजन को लेकर भी खरीदारों के मन में सवाल रहता है। बाजार में एक ग्राम से लेकर पचास ग्राम तक के सिक्के मिलते हैं और परंपरा में वजन को लेकर कोई बंधन नहीं माना गया है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार छोटा सिक्का लेना उतना ही शुभ माना जाता है जितना बड़ा सिक्का, क्योंकि शगुन भाव से जुड़ा होता है, ग्राम से नहीं। कई परिवार हर साल एक छोटा सिक्का खरीदकर पूजा के सिक्कों का छोटा संग्रह बनाते हैं, जिसे घर की परंपरा के रूप में आगे बढ़ाया जाता है। सिक्का खरीदकर उसे दिवाली की पूजा में रखा जाता है और फिर पूरे साल तिजोरी या पूजा स्थान पर सम्मान के साथ रखा जाता है।
यह लेख पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं और शास्त्रों में वर्णित धारणाओं पर आधारित है।
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