खून पर डाका! इंसानी खून बेचकर 19 लाख डकार गया सरकारी अकाउंटेंट, विभाग में हड़कंप

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embezzled 19 lakh by selling donated blood
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स्वास्थ्य विभाग को रक्तदान में मिले खून को बेचकर उसकी राशि गबन करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक में कार्यरत लेखाकार ने ही खून

झज्जर: स्वास्थ्य विभाग को रक्तदान में मिले खून को बेचकर उसकी राशि गबन करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक में कार्यरत लेखाकार ने ही खून के बदले निजी अस्पतालों से मिलने वाली राशि को अपने खाते में जमा कराकर यह घोटाला किया है। उस पर पिछले तीन साल में 19 लाख 14 हजार 800 रुपये के गबन का आरोप है। विभाग ने इस गड़बड़ी की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है।

जानकारी के अनुसार निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को सरकारी ब्लड बैंक से रक्त उपलब्ध कराने के बदले निर्धारित सरकारी शुल्क लिया जाता है। यह राशि सरकारी खाते में जमा की जानी थी लेकिन आरोप है कि लेखाकार अखिल ने पिछले तीन वर्षों में एकत्रित राशि का बड़ा हिस्सा बैंक में जमा नहीं कराया। जांच में सामने आया कि वर्ष 2023-24 में प्राप्त 10 लाख 97 हजार 700 रुपये में से केवल 82 हजार 500 रुपये जमा हुए, जबकि 10 लाख 15 हजार 200 रुपये जमा नहीं कराए गए। वर्ष 2024-25 में प्राप्त 7 लाख 34 हजार 700 रुपये में से 2 लाख 37 हजार 600 रुपये जमा हुए और 4 लाख 97 हजार 100 रुपये की राशि गायब मिली।

वहीं, वर्ष 2025-26 में प्राप्त 5 लाख 90 हजार 600 रुपये में से केवल 1 लाख 88 हजार 100 रुपये जमा किए गए और शेष राशि बैंक खाते में नहीं पहुंची। एक अन्य खाते की भी जांच जारी है। वहीं, आरोपी अखिल ने कहा कि वह बाहर हैं। कुछ देर में बात करेंगे लेकिन उन्होंने कॉल नहीं उठाया और बात करने से बचते रहे। अखिल ने 16 सितंबर 2019 को एनएचएम में लेखाकार के रूप में कार्यभार संभाला था। ऐसे में विभाग ने उसके पूरे कार्यकाल का विशेष ऑडिट कराने की सिफारिश की है। जांच समिति ने आशंका जताई है कि रिकॉर्ड की जांच में आगे और भी अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।

जांच समिति ने संबंधित बैंक खातों की स्टेटमेंट और रसीद पुस्तकों का मिलान किया जिसमें राशि जमा करने और प्राप्त राशि के बीच अंतर मिला। संदेह होने पर पिछले वर्षों के रिकॉर्ड भी खंगाले, जिसके बाद तीन वर्षों में करीब 19 लाख से अधिक के गबन का खुलासा हुआ। समिति ने वित्तीय रिकॉर्ड और कैशबुक प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे लेकिन उसने रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया।  

चार्ज बदलने के बाद खुला मामला

रिपोर्ट के अनुसार 6 मई 2025 को उप सिविल सर्जन (एड्स) ने ब्लड बैंक से राशि संग्रहण का कार्य अखिल से लेकर डाटा मैनेजर-कम-अकाउंटेंट राजीव को सौंपने के आदेश जारी किए थे। आरोप है कि अखिल ने चार्ज देने में आनाकानी की और हटाने के बाद भी मार्च 2026 तक राशि संग्रह का कार्य करता रहा। मार्च 2026 में वित्तीय वर्ष की क्लोजिंग के दौरान रिकॉर्ड और बैंक लेनदेन की जांच में अनियमितताएं सामने आईं।