भाजपा का नया कदम -राज्यपाल से चुनावी मैदान में लौटने वाले बुजुर्ग नेता

भारत में राज्यपाल बनने के बाद सक्रिय राजनीति में लौटने की परंपरा को जारी रखते हुए, भाजपा ने 73 वर्षीय पूर्व राज्यपाल कुम्मनम राजशेखरन को चुनावी मैदान में उतारा है। राजशेखरन, जो मिजोरम के पूर्व राज्यपाल रह चुके हैं, अरानमुला सीट से चुनाव लड़ेंगे। उनकी सादगी और समर्पण ने उन्हें भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण चेहरा बना दिया है। इस कदम से भाजपा के अन्य बुजुर्ग नेताओं को भी चुनाव में उतरने का प्रोत्साहन मिलेगा। जानें इस दिलचस्प राजनीतिक सफर के बारे में।
| Apr 3, 2026, 09:08 IST
राज्यपाल से सक्रिय राजनीति में वापसी
भारत में राज्यपाल बनने के बाद सक्रिय राजनीति में लौटना कोई नई बात नहीं है। यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। कई नेता, जैसे सुशील कुमार शिंदे और मोतीलाल वोरा, राज्यपाल रहने के बाद मुख्यमंत्री या केंद्रीय मंत्री बने हैं। भाजपा ने भी उत्तर प्रदेश में बेबीरानी मौर्य और तमिलनाडु में तमिलिसाई सौंद्रयराजन को चुनावी मैदान में उतारा है। लेकिन अगर भाजपा का कोई बुजुर्ग नेता, जो राज्यपाल रह चुका है, चुनाव लड़ने का अवसर पाता है, तो यह भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं के लिए एक सकारात्मक संकेत होगा। वास्तव में, भाजपा ने एक अनौपचारिक नियम बना रखा है कि 75 वर्ष की आयु के बाद नेताओं को रिटायर कर दिया जाएगा, हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कुछ अन्य इस नियम से बाहर हैं। इस बार भाजपा केरल में पूर्व राज्यपाल कुम्मनम राजशेखरन को चुनाव में उतार रही है, जिनकी उम्र 73 वर्ष है।
कुम्मनम राजशेखरन का राजनीतिक सफर
कुम्मनम राजशेखरन मिजोरम के राज्यपाल रह चुके हैं और इस बार वे अरानमुला सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने जा रहे हैं। वे भाजपा के एक पुराने और समर्पित कार्यकर्ता हैं, जिन्होंने दक्षिण भारत, विशेषकर केरल की राजनीति में भाजपा का चेहरा बने। राजशेखरन, जो हिंदुत्व की विचारधारा और अपनी सादगी के लिए जाने जाते हैं, कभी सांसद या विधायक नहीं रहे। वे केरल में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। उनकी सादगी का आलम यह है कि इतने लंबे समय तक संघ प्रचारक और भाजपा के नेता रहने के बावजूद उनकी कुल संपत्ति केवल एक लाख रुपए है। पिछली बार चुनाव में उन्होंने 10 लाख की संपत्ति बताई थी, जिसमें नौ लाख की कमी आई है। फिर भी, 73 वर्ष की आयु में और राज्यपाल रहकर, वे चुनावी मैदान में हैं। इससे भाजपा के अन्य बुजुर्ग नेताओं को यह आश्वासन मिलता है कि यदि आवश्यकता पड़ी, तो पार्टी उन्हें भी चुनाव में उतार सकती है।
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