अंकिता भंडारी केस से जुड़ी बड़ी खबर: भाजपा का पूर्व विधायक गिरफ्त में, 14 दिन की जेल; जानिए काला कारनामा
उत्तराखंड के अंकिता भंडारी केस से जुड़ी बड़ी खबर सामने आ रही है। भाजपा के पूर्व विधायक को इस मामले में 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया है।
Dehradun: उत्तराखंड समेत पूरे देश को हिलाकर रख देने वाले अंकिता भंडारी हत्याकांड में बड़ा अपडेट सामने आया है। इस मामले में भारतीय जनता पार्टी के एक पूर्व विधायक सुरेश कुमार राठौर को 14 दिन के लिये न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। भाजपा विधायक पर कई आरोप हैं।
देहरादून पुलिस ने भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर को गिरफ्तार कर लिया है। उनके खिलाफ अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े एक कथित ऑडियो क्लिप को लेकर मामला दर्ज किया गया था। आरोप है कि ऑडियो क्लिप में उन्होंने भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का नाम वर्ष 2022 के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड से जोड़ते हुए बयान दिए थे। इसी मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में लिया।
भाजपा नेताओं ने लगाया बदनाम करने का आरोप
भाजपा के प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम ने आरोप लगाया था कि अंकिता भंडारी मामले को लेकर सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर से जुड़े कुछ ऑडियो और वीडियो सोशल मीडिया पर जानबूझकर वायरल किए जा रहे हैं। उनका कहना था कि इन सामग्रियों का उद्देश्य उन्हें और अन्य भाजपा नेताओं को बदनाम करना है।
दुष्यंत गौतम के अनुसार, वायरल किए गए ऑडियो-वीडियो के माध्यम से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया। इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके आधार पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी।
हाई कोर्ट में पहुंचा था मामला
इस पूरे प्रकरण को लेकर सुरेश राठौर ने अपने खिलाफ दर्ज विभिन्न प्राथमिकी को चुनौती देते हुए उत्तराखंड हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनके खिलाफ देहरादून और हरिद्वार जिलों में कुल चार अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई थीं।
राठौर का कहना था कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं और राजनीतिक कारणों से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने अदालत से सभी प्राथमिकी रद्द करने की मांग की थी।
दो एफआईआर रद्द, दो में जांच जारी
हाल ही में उत्तराखंड हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान चार में से दो एफआईआर को रद्द कर दिया था। हालांकि अदालत ने बाकी दो मामलों में पुलिस जांच जारी रखने की अनुमति दी थी।
हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया था कि दो शिकायतों में लगाए गए आरोपों की विस्तृत जांच आवश्यक है। अदालत ने माना कि प्रथम दृष्टया इन मामलों में संज्ञेय अपराध के तत्व दिखाई देते हैं, इसलिए जांच को रोका नहीं जा सकता।
दुष्यंत गौतम और आरती गौर ने दर्ज कराई थी शिकायत
मामले में शिकायतकर्ता दुष्यंत कुमार गौतम और आरती गौर थे। दोनों ने आरोप लगाया था कि सोशल मीडिया पर प्रसारित की गई सामग्री उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने और सार्वजनिक छवि धूमिल करने के उद्देश्य से तैयार की गई थी।
आरती गौर की शिकायत के आधार पर देहरादून के नेहरू कॉलोनी थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी, जबकि दुष्यंत गौतम की शिकायत पर डालनवाला थाने में मामला दर्ज किया गया था।
हाई कोर्ट ने जांच को बताया जरूरी
जस्टिस राकेश थपलियाल की एकल पीठ ने दोनों शिकायतों को गंभीर मानते हुए एफआईआर रद्द करने से इनकार कर दिया था। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि किसी व्यक्ति को सोशल मीडिया के माध्यम से किसी जघन्य अपराध से जोड़ना और उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना गंभीर मामला है।
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