सबने कर दी क्रॉस वोटिंग, मिल गए 0 वोट’ भाजपा के साथ नागौर में हो गया बहुत बड़ा खेला
बहुमत से कुछ ही दूरी पर होने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी द्वारा चुपचाप सरकार या सत्ता बना लेने की खबरें तो आपने अक्सर पढ़ी और सुनी होंगी। राजस्थान में भी हाल ही में अजमेर और पाली जिलों में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला था। लेकिन जयपुर से लगभग 250 किलोमीटर दूर नागौर जिले की मुंडवा नगरपालिका में चुनावी तस्वीर एकदम उलट ही नजर आई, जहाँ भाजपा के साथ एक बहुत बड़ा राजनीतिक ‘खेला’ हो गया।
मुंडवा नगरपालिका चुनाव: सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद मुँह की खानी पड़ी
जिले की मुंडवा नगरपालिका में सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद भाजपा न सिर्फ अपना चेयरमैन बनाने में पूरी तरह नाकामयाब साबित हुई, बल्कि पार्टी को भारी राजनीतिक शर्मिंदगी का सामना भी करना पड़ा। यहाँ हालात यह रहे कि भाजपा के सभी पार्षदों ने मिलकर क्रॉस वोटिंग कर दी, जिसके चलते भगवा दल के आधिकारिक चेयरमैन उम्मीदवार को एक भी वोट नहीं मिला और वे शून्य (0) पर सिमट गए।
मुंडवा नगरपालिका में सोमवार को हुए चेयरमैन पद के चुनाव में कांग्रेस और हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) ने बाजी अपने नाम कर ली। कुल 25 सीटों वाली इस नगरपालिका का चुनाव बेहद दिलचस्प और रोमांचक रहा। हैरानी की बात यह है कि भाजपा के शून्य पर सिमटने के बाद कांग्रेस और आरएलपी के इस गठबंधन को महज एक ही वोट के अंतर से शानदार जीत हासिल हुई।
कांग्रेस-आरएलपी की साझा उम्मीदवार की जीत और बागी का कड़ा मुकाबला
मुंडवा में कांग्रेस और आरएलपी की साझा उम्मीदवार अलका देवी कंडोई ने कुल 13 वोट हासिल करके चेयरमैन पद का चुनाव जीत लिया। वहीं दूसरी तरफ, निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उतरे घनश्याम सदावत बेहद रोमांचक मुकाबले में महज एक वोट से चुनाव हार गए, जिन्हें कुल 12 पार्षदों के वोट मिले। आपको बता दें कि घनश्याम सदावत पहले भाजपा के ही नेता थे, लेकिन जब पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो उन्होंने बगावत का बिगुल फूंकते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया था।
भाजपा शून्य पर, जानिए क्या रहा पूरा सीटों का गणित?
मुंडवा नगरपालिका में कुल 25 वार्ड हैं। चुनाव परिणामों के दौरान भाजपा ने सबसे ज्यादा 10 वार्डों में जीत हासिल करके चेयरमैन पद पर अपनी दावेदारी सबसे मजबूत कर ली थी। इसके अलावा आरएलपी के 7 और कांग्रेस के 3 उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी, जबकि बाकी के 5 वार्डों पर निर्दलीय प्रत्याशी जीते थे।
चुनाव से पहले कांग्रेस और आरएलपी ने आपस में हाथ मिला लिया और आरएलपी की उम्मीदवार अलका देवी को अपना साझा उम्मीदवार घोषित कर दिया। आरएलपी के 7 और कांग्रेस के 3 पार्षदों को मिलाकर उनके पास कुल 10 वोट पक्के थे। हालांकि, जब नतीजे आए तो अलका देवी को कुल 13 वोट मिले। इसका साफ मतलब यह था कि निर्दलीय या खुद भाजपा के पार्षदों में से कम से कम तीन लोगों ने क्रॉस वोटिंग करके अलका देवी के पक्ष में मतदान किया था।
निर्दलीय उम्मीदवार घनश्याम सदावत ने दी कड़ी टक्कर
भारतीय जनता पार्टी खुद भले ही इस रेस से पूरी तरह बाहर हो गई थी, लेकिन भाजपा के ही बागी और निर्दलीय उम्मीदवार घनश्याम सदावत ने कांग्रेस-आरएलपी गठबंधन को कड़ी टक्कर दे डाली। घनश्याम कुल 12 वोट हासिल करने में कामयाब रहे, लेकिन जीत से सिर्फ एक कदम दूर यानी महज एक वोट से चुनाव हार गए।
सदावत इससे पहले भी पार्षद का चुनाव जीत चुके हैं और उन्हें भाजपा की वरिष्ठ नेता डॉ. ज्योति मिर्धा का बेहद करीबी माना जाता है। इसके बावजूद पार्टी ने इस चुनाव में उन्हें टिकट नहीं दिया था। भाजपा ने उनकी जगह गीता देवी को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया था, लेकिन क्रॉस वोटिंग के इस बड़े खेल के चलते वह एक भी वोट हासिल नहीं कर पाईं।
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