दुष्यंत गौतम की नियुक्ति के बाद फिर गरमाया Ankita bhandari case, पुलिस ने गिनाए जांच से सजा तक के कदम,फ़िर……..

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भाजपा नेता दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड (Ankita bhandari case) एक बार फिर सुर्खियों में है। अंकिता के माता-पिता इस नियुक्ति का विरोध करते हुए दिल्ली के इंडिया गेट पर धरने पर बैठ गए।

दुष्यंत गौतम की नियुक्ति के बाद फिर गरमाया अंकिता भंडारी हत्याकांड

दिल्ली पुलिस ने गुरुवार तड़के धरने पर बैठे अंकिता के माता-पिता को हिरासत में ले लिया। हालांकि दो घंटे बाद उन्हें छोड़ दिया गया। इस घटनाक्रम के बाद मामला और गरमा गया। अंकिता के पिता ने केंद्र सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए दुष्यंत गौतम की नियुक्ति रद्द करने की मांग की और ऐसा नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी। उत्तराखंड में भी कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

पुलिस ने गिनाए जांच से सजा तक के कदम

इसी बीच गुरुवार को पुलिस मुख्यालय, देहरादून में अपर पुलिस महानिदेशक (अपराध एवं कानून व्यवस्था) डॉ. वी. मुरुगेशन ने प्रेस वार्ता कर अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच और न्यायिक कार्रवाई का ब्योरा दिया। उन्होंने बताया कि घटना सामने आने के 24 घंटे के भीतर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया था। एसआईटी ने 88 दिनों में जांच पूरी कर करीब 500 पन्नों का आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया था।

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2025 में मिली अंकिता के आरोपियों को सजा

ऋषिकेश के निकट वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करने वाली 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की सितंबर 2022 में हत्या कर दी गई थी। इस मामले में रिजॉर्ट संचालक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया गया था। मामले की जांच के बाद अदालत ने 30 मई 2025 को तीनों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई। तीनों दोषी फिलहाल जेल में हैं।

हालांकि, मामले में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर अंकिता के परिवार की ओर से लगातार सवाल उठाए जाते रहे हैं। परिवार की मांग है कि जब तक मामले में कथित वीआईपी एंगल को लेकर चल रही सीबीआई जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर रोक लगाई जाए। बता दें 14 अक्टूबर को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने भी अंकिता के माता-पिता से मुलाकात कर उनकी मांगों का समर्थन दिया था।

CM धामी के निर्देश पर गठित हुई थी SIT: मुरुगेशन

पुलिस मुख्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान एडीजी डॉ. वी. मुरुगेशन ने बताया कि घटना की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर तत्काल विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया था। डीआईजी स्तर की महिला आईपीएस अधिकारी को एसआईटी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

उन्होंने बताया कि जांच के दौरान डिजिटल, तकनीकी, फॉरेंसिक और भौतिक साक्ष्य जुटाए गए। आरोपियों से पूछताछ की गई और गवाहों के बयानों तथा फॉरेंसिक रिपोर्ट सहित अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया। एसआईटी ने 88 दिनों में जांच पूरी कर लगभग 500 पन्नों का आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया।

अभियोजन की पैरवी के बाद तीनों दोषियों को हुई थी उम्रकैद

एडीजी के अनुसार, मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत किए और प्रभावी पैरवी की। इसके बाद कोटद्वार स्थित अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने 30 मई 2025 को पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी ठहराते हुए आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई। पुलिस ने प्रेस वार्ता में गिरफ्तारी से लेकर जांच, आरोपपत्र और अदालत के फैसले तक की कार्रवाई का विवरण साझा किया। हालांकि, मौजूदा विवाद का केंद्र अब मामले में कथित VIP एंगल की जांच और अंकिता के परिवार की ओर से उठाए जा रहे सवाल हैं।

नियुक्ति के बाद उत्तराखंड में भी कांग्रेस का विरोध

दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद उत्तराखंड कांग्रेस ने भी विरोध प्रदर्शन किया। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए इसे उत्तराखंड की भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बताया। कांग्रेस नेताओं ने अंकिता के परिवार को न्याय दिलाने और मामले से जुड़े सभी सवालों के जवाब देने की मांग की।

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