आया राम-गया राम’ हे राम: 9 घंटे में 3 बार बदली पार्टी! भारतीय राजनीति की वो सबसे बड़ी बगावत

ADVERTISEMENTS
ख़बर शेयर करें

politician

वैसे, राजनीतिक दलों में इस तरह की बगावत और उठापटक कोई नई बात नहीं है. भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में बगावत की कई बड़ी और दिलचस्प राजनीतिक घटनाएं पहले भी दर्ज हो चुकी हैं. दिल्ली से सटे हरियाणा राज्य में सालों पहले ‘आया राम गया राम’ बगावत और दलबदल का एक ऐसा ही अनोखा मामला सामने आया था, जो आज के दौर में एक मशहूर मुहावरे में तब्दील हो चुका है. आइए आपको बताते हैं कि आखिर क्या था यह पूरा दिलचस्प माजरा.

पश्चिम बंगाल में जहां भारतीय जनता पार्टी की सरकार बन गई है, वहीं ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) का इस वक्त बुरा हाल नजर आ रहा है. टीएमसी के भीतर एक बहुत बड़ी टूट हो चुकी है. आलम यह है कि पिछले विधानसभा चुनाव में 80 सीटें जीतने वाली ममता बनर्जी के 50 से ज्यादा विधायक खुली बगावत कर चुके हैं, और बाकी बचे विधायक भी इसी राह पर चलते दिख रहे हैं. राजनीतिक गलियारों में तो यहां तक कयास लगाए जा रहे हैं कि एक दिन ऐसा भी आ सकता है जब ममता बनर्जी खुद टीएमसी से इस्तीफा दे देंगी.

वैसे, राजनीतिक दलों में इस तरह की बगावत और उठापटक कोई नई बात नहीं है. भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में बगावत की कई बड़ी और दिलचस्प राजनीतिक घटनाएं पहले भी दर्ज हो चुकी हैं. दिल्ली से सटे हरियाणा राज्य में सालों पहले ‘आया राम गया राम’ बगावत और दलबदल का एक ऐसा ही अनोखा मामला सामने आया था, जो आज के दौर में एक मशहूर मुहावरे में तब्दील हो चुका है. आइए आपको बताते हैं कि आखिर क्या था यह पूरा दिलचस्प माजरा.

जब हरियाणा के पहले ही चुनाव में बन गया इतिहास

दरअसल, यह पूरी कहानी साल 1960 के दशक की है और इस मशहूर मुहावरे के असली नायक हरियाणा के उस दौर के एक विधायक गया लाल हैं. पंजाब से अलग होने के बाद हरियाणा एक नए राज्य के रूप में 1 नवंबर, 1966 को देश के नक्शे पर अस्तित्व में आया था. इसके महज एक साल के भीतर यानी वर्ष 1967 में राज्य का पहला विधानसभा चुनाव आयोजित किया गया. इस ऐतिहासिक चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. कांग्रेस ने बंपर वोटिंग के दम पर तब कुल 81 सीटों में से 48 सीटों पर जीत का परचम लहराया था.

हरियाणा के इसी पहले विधानसभा चुनाव 1967 में एक निर्दलीय उम्मीदवार गया लाल ने भी हसनपुर विधानसभा सीट से चुनाव जीता था. यहां तक तो सबकुछ बिल्कुल सामान्य और ठीक चल रहा था, लेकिन उस समय किसी को इस बात का अंदाजा नहीं था कि यही गया लाल आगे चलकर देश की ऐसी राजनीतिक हस्ती बन जाएंगे, जिनके नाम पर हमेशा के लिए एक मुहावरा अमर हो जाएगा.

बागियों ने कुछ ही दिनों में गिरा दी कांग्रेस की सरकार

चूंकि चुनाव में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत मिला था, इसलिए पार्टी के विधायक दल के नेता चुने गए भगवत दयाल शर्मा ने 10 मार्च 1967 को हरियाणा के पहले मुख्यमंत्री के रूप में पद की शपथ ली. लेकिन उस दौर में भी कांग्रेस के भीतर कई अलग-अलग गुट सक्रिय थे और नेताओं के बीच आपसी टांग खिंचाई का दौर लगातार चल रहा था. यही वजह रही कि भगवत दयाल शर्मा की सरकार सूबे में ज्यादा दिनों तक टिक नहीं सकी.

पार्टी के भीतर चल रही अनबन और तीखे विरोध के चलते कांग्रेस के कई विधायक अचानक बागी हो गए. इस सियासी उठापटक के दौरान कांग्रेस के इन बागी विधायकों ने कुछ निर्दलीय विधायकों को अपने साथ मिलाया और एक नया राजनीतिक मोर्चा खड़ा कर दिया. इस कदम ने मुख्यमंत्री भगवत दयाल शर्मा और कांग्रेस आलाकमान दोनों की मुश्किलें बेहद बढ़ा दीं. कांग्रेस पार्टी किसी भी तरह अपनी सरकार को बचाने की हरसंभव कवायद में जुट गई.

सिर्फ 9 घंटे के भीतर बदल डाला 3 बार पाला

हरियाणा में एक तरफ जहां भगवत दयाल शर्मा की सरकार को गिराने और दूसरी तरफ नया सियासी समीकरण बनाने की जोड़-तोड़ चल रही थी, इसी बीच हसनपुर से विधायक गया लाल ने कुछ ऐसा किया जिसने सबको चौंका दिया. गया लाल ने एक ही दिन में, महज 9 घंटे के भीतर कई बार अपना राजनीतिक पाला बदला और धड़ाधड़ पार्टियां ज्वाइन कीं.

इन 9 घंटों के दौरान गया लाल पहले एक गुट में शामिल हुए, फिर थोड़ी ही देर बाद वहां से निकलकर दूसरे विरोधी गुट में चले गए. इतना ही नहीं, जब 9 घंटे का समय खत्म होने में कुछ ही वक्त बचा था, तो उन्होंने एक बार फिर पलटी मारी और अपने पहले वाले गुट में वापस लौट आए. महज 9 घंटे में 3 बार पाला बदलने की इस अकल्पनीय घटना से हरियाणा की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया.

ऐसे पड़ा भारतीय राजनीति का सबसे मशहूर नाम ‘आया राम-गया राम’

हरियाणा के इस दिलचस्प राजनीतिक घटनाक्रम के बीच 24 मार्च, 1967 को संयुक्त विधायक दल के नेता राव बीरेंद्र सिंह हरियाणा के नए मुख्यमंत्री बन गए. जब विधायक गया लाल घूम-फिरकर फिर से उनके गुट में वापस लौटे, तो चंडीगढ़ में एक बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री राव बीरेंद्र सिंह ने मजाकिया लहजे में पत्रकारों से कहा कि ‘गया राम अब आया राम है.’

राव बीरेंद्र सिंह के मुंह से निकला यह जुमला देखते ही देखते हर तरफ फैल गया और गया लाल का नाम हमेशा के लिए ‘आया राम गया राम’ पड़ गया. बाद के सालों में यह नाम एक मुहावरे के रूप में भारतीय राजनीति में पूरी तरह प्रसिद्ध हो गया.

जब देश की संसद में भी गूंजा यह नाम

यह मामला सिर्फ हरियाणा तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि उस दौर में तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री वाई बी. चव्हाण ने भी देश की संसद में बकायदा इस शब्द का इस्तेमाल किया था. कुछ ही सालों के भीतर यह ‘आया राम गया राम’ का मुहावरा पूरे देश की जुबान पर चढ़ गया और बेहद लोकप्रिय हो गया. आज के दौर में भी जब कभी भारतीय राजनीति में दलबदल, पाला बदलने या विधायकों की बगावत की बात आती है, तो ‘आया राम गया राम’ का जिक्र अनिवार्य रूप से किया जाता है.