उम्मीद की किरण बन दिखी SDRF, आयोजनों से लेकर हादसों तक सदैव तत्पर

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उत्तराखंड में पिछले कुछ समय में आपदा के समय SDRF ने कई प्रशंसनीय कार्य कर लोगों की जान बचाई है। खास तौर पर मॉनसून जैसे पर्वतीय इलाकों के लिए बेहद संवेदनशील मौसम में SDRF उम्मीद की एक नई किरण बन कर सामने आती है। चारधाम यात्रा से लेकर हेमकुंड और कांवड़ यात्रा तक SDRF ने हर आयोजन में अपनी तत्परता से उत्तराखंड के सुरक्षित होने का बड़ा संदेश पूरे देश में दिया है। राज्य में धार्मिक पर्यटन को सुगम व सुरक्षित बनाये जाने के दृष्टिगत रिधिम अग्रवाल, पुलिस उपमहानिरीक्षक, SDRF के दिशानिर्देशन व मणिकांत मिश्रा, सेनानायक SDRF के नेतृत्व में राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF- एसडीआरएफ) की विशेषज्ञ टीमें सम्पूर्ण राज्य में 38 अतिसंवेदनशील स्थानों पर डिप्लॉय की गईं है।


अभी चार धाम यात्रा में श्रद्धालुओं के सैलाब को संभालने के बाद अब सावन के महीने में कांवड़ मेला, हरिद्वार में हर की पौड़ी पर गंगाजल लेने व स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा में SDRF रेस्क्यू टीमें आवश्यक रेस्क्यू उपकरणों व राफ्ट के साथ संवेदनशील स्थानों जैसे कांगड़ा घाट, बैरागी घाट के साथ ही ढालवाला, ऋषिकेश व नीलकंठ में भी तैनात दिख रहीं हैं।

रेस्क्यू ऑपरेशनों में SDRF उन्नत किस्म के उपकरणों के साथ उतर रही है। साथ ही SDRF जवानों द्वारा ड्रोन के माध्यम से भी संवेदनशील स्थानों की निगरानी की जा रही है। इसके अतिरिक्त गढ़वाल मण्डल में चारधाम व हेमकुंड साहिब यात्रा रूट में एसडीआरएफ की 28 सब टीमों को तैनात किया गया है। जिनके द्वारा आठों पहर इन धार्मिक यात्राओं को सफल व सुरक्षित बनाने में अपना अमूल्य योगदान दिया जा रहा है।
प्रदेश में भारी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन पर एसडीआरएफ द्वारा ऑफ लाईन व ऑन लाईन रजिस्ट्रेशन के दायित्व का भी कुशलतापूर्वक निर्वहन किया जा रहा है। गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ व बद्रीनाथ मंदिर परिसर में देश के अलग-अलग प्रदेशों से आये श्रद्धालुओं को मदद

पहुँचाने के साथ ही दर्शनाभिलाषी दिव्यांग, बुजुर्ग, महिलाओं व बच्चों को भीड़-भाड़ में सुगम दर्शन हेतु विशेष सहयोग प्रदान किया जा रहा है। बेहद ऊंंचाई पर स्थित केदारनाथ धाम में अनेकों श्रद्धालु सांस लेने व अन्य समस्याओं के कारण अचानक अस्वस्थ महसूस करते हैं। ऐसे में एसडीआरएफ टीम द्वारा अस्वस्थ श्रद्धालुओं को प्राथमिक उपचार देने के साथ ही कई मील पैदल चलकर स्ट्रेचर के माध्यम से अस्पताल व हायर सेंटर रेफर होने की स्थिति में हैलीपैड तक पहुँचाया जा रहा है। एसडीआरएफ के इन मानवीय कार्यों की प्रशंसा देश भर से आये श्रद्धालुओं,स्थानीय जनता व प्रशासन द्वारा मुक्तकंठ से की जा रही है।

पर्यटन सीजन में पर्यटकों की भारी आमद से जनित चुनौतियों का सामना करने में भी एसडीआरएफ टीम द्वारा अपनी कार्यदक्षता सिद्ध की जा रही है। अनेकों बार देश-विदेश से आने वाले पर्यटक, ट्रैकर एवं पर्वतारोही उच्च हिमालय क्षेत्रों एवं ट्रैक रुट में फंस जाते हैं। ऐसी किसी भी अकस्मात स्थिति से निपटने हेतु एसडीआरएफ कि दक्ष एवं विशेषज्ञ माउन्ट्रेनिरिंग टीम को सहस्त्रधारा हेलीपेड, देहरादून में अलर्ट पर रखा गया है। एसडीआरएफ की ऊर्जावान उपस्थिति ने पर्यटक सीजन के दौरान खोज एवं बचाव कार्यों में संजीवनी का कार्य किया है।


मानसून सीजन में राज्य की तीव्र प्रवाह एवम संकरी घाटियों से गुजरती जीवनदायिनी नदियों में कई पर्यटकों व स्थानीय नागरिकों के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटनाएं होती रहती है। इन दुर्घटनाओं के न्यूनीकरण हेतु डीजीपी अशोक कुमार द्वारा एसडीआरएफ में फ्लड रेस्क्यू टीम की कार्यक्षमता को बढ़ाने के लिये एक सम्पूर्ण कम्पनी का गठन करने हेतु निर्देशित किया गया। वर्तमान में नव गठित फ्लड कम्पनी किसी भी प्रकार की जलीय आपदा से निपटने हेतु प्रदेश की 08 संवेदनशील स्थानों में व्यवस्थापित है।


एसडीआरएफ द्वारा रेस्क्यू कार्यों के साथ-साथ जनजागरुकता एवं प्रशिक्षण अभियानों के माध्यम से मानव / आपदा क्षति न्यूनिकरण को गति प्रदान की जा रही है। वर्ष 2022 मे एसडीआरएफ द्वारा प्रदेश भर में 950 स्कूली छात्र-छात्राओ / एनसीसी कैडेटस , 201 स्वयं सेवी संस्थाओं के सदस्य /आपदा मित्रो, 63 सेना/अर्धसैनिक बल के कार्मिको, 27 अन्य विभाग के कार्मिकों के साथ साथ 550 चौकी / थाना पुलिस कर्मियों को भी आपदा के सम्बन्ध में प्रशिक्षित व जागरुक किया गया तथा समय-समय पर प्रदेश भर में आयेजित मॉक ड्रिल भी की गई। जिसका उद्देश्य आपदा के प्रति संवेदनशील प्रदेश में आपदा के दौरान प्रथम प्रक्रिया एवं अनुरूप सामंजस्य स्थापित करना है।

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