उत्तराखंड में आई आपदा से प्रभावित क्षेत्रों और योजनाओं का निरीक्षण करने पहुंची 7 सदस्यों की केंद्रीय टीम,जानिए जिले में कितने लाख करोड़ का हुआ नुकसान

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राज्य में गत दिवस पूर्व जिस प्रकार से बारिश अपना कहर बरपाया था उसकी वजह से जो आप दा सामने आई थी इसको लेकरसात सदस्यीय केंद्रीय टीम पिछले दिनोंं उत्तराखंड में आई आपदा से प्रभावित क्षेत्रों और योजनाओं का निरीक्षण करने के लिए पहुंची। इस दौरान समीक्षा बैठक में डीएम ने बताया कि प्राथमिक आंकलन में 243 करोड़ की क्षति का अनुमान है।संयुक्त सचिव गृह संजीव जिंदल के नेतृत्व में टीम ने आपदा प्रभावित तल्ला रामगढ़ क्षेत्र का हवाई निरीक्षण कर क्षति का जायजा लिया। इस दौरान अधिकारियों ने प्रभावितों से बातचीत भी की। इसके बाद टीम ने कलसिया नाला, क्षतिग्रस्त गौलापुल के साथ ही इंदिरा नगर द्वितीय, बिंदुखत्ता में गौला नदी से हुए नुकसान का जायजा लिया। इसके बाद उन्होंने राज्य के अधिकारियों के साथ सर्किट हाउस में समीक्षा बैठक की।जनपद में 243 करोड़ की क्षति

समीक्षा बैठक में डीएम धीराज सिंह गर्ब्याल ने बताया कि जनपद में प्राथमिक आकलन के हिसाब 242 करोड़ 96 लाख की क्षति का अनुमान है। यह आंकड़ा और बढ़ने की संभावना है। बताया कि लोनिवि के 93 मोटर मार्ग और तीन पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। विभाग ने प्राथमिक आकलन कर 37.29 करोड़ का नुकसान बताया है। इसी तरह राष्ट्रीय राजमार्ग में 34.50 करोड़, पीएमजीएसवाई के 63 मार्ग क्षतिग्रस्त हुए हैंइनमें 28.56 करोड़ का नुकसान हुआ है। पेयजल निगम की ओर से 4.46 करोड़, सिंचाई विभाग की ओर से 47 करोड़, लघु सिंचाई की 171 योजनाएं आपदा से प्रभावित हुई हैं। इसमें 5.79 करोड़ की क्षति हुई है। बाढ़ से नलकूप विभाग के 20 पंपों में सिल्ट आने से खराब हो गए, जिससे 90.20 लाख की क्षति हुई है। स्वास्थ्य विभाग के 12 अस्पताल और आवासीय भवनों को एक करोड़ 19 लाख की क्षति हुई है।

135 किमी बिजली लाइन क्षतिग्रस्त, 133 ट्रांसफार्मर हुए खराब
ऊर्जा निगम के अधिकारियों ने बताया कि 133 ट्रांसफार्मर और 135 किमी बिजली लाइन क्षतिग्रस्त हुई हैं। इसके अलावा 648 बिजली पोल ध्वस्त हुए हैं। प्राथमिक तौर पर 5.72 करोड़ के नुकसान का आकलन है। कृषि विभाग की ओर से 4.60 करोड़ की क्षति, उद्यान विभाग की ओर से 3.60 करोड़, मत्स्य विभाग ने 2.20 करोड़ की क्षति का आकलन किया है।वहीं ग्राम विकास की 910 परिसंपत्तियों को क्षति पहुंची हैं। 15.52 करोड़ की क्षति का आकलन किया गया है। स्वजल को 80 लाख की क्षति, पंचायती राज विभाग की ग्राम पंचायत भवनों, खडं़जा नाली को 4.90 करोड़ की क्षति हुई है। इसी तरह पूर्ति विभाग के छह गोदामों में तीन करोड़ का नुकसान हुआ है। सहकारिता विभाग ने 22 लाख का आकलन किया है।

56 विद्यालयों को हुआ नुकसान

शिक्षा विभाग ने 56 विद्यालयों में 2 करोड़ 50 लाख का क्षति का आकलन किया है। बाल विकास विभाग ने 39 परिसंपत्तियों में 80 लाख की क्षति, डेयरी में 35 लाख क्षति का प्राथमिक आकलन किया है। वन विभाग ने एक करोड़ 40 लाख क्षति का प्राथमिक आकलन प्रस्तुत किया है। वहीं, मेयर जोगेंद्र रौतेला ने क्षतिग्रस्त गौलापुल की मरम्मत के दौरान यातायात के लिए वैकल्पिक व्यवस्था का सुझाव भी दिया।

संयुक्त सचिव (गृह) संजीव जिंदल ने बिजली, पेयजल, सड़क, संचार व्यवस्थाओं को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त करने के निर्देश दिए। छोटे क्षतिग्रस्त कार्यों को एडीआरएफ के मानकों के अनुसार तत्काल करना होगा। बड़े कार्य स्वीकृति के बाद शुरू किए जाएंगे। डीएम ने बताया कि जनपद में पेयजल, बिजली और सड़कें भी यातायात के लिए सुचारु कर दी हैं।

आपदा प्रभावित क्षेत्रों में खाद्यान्न व अन्य आवश्यक सामग्री भेजने के साथ वितरण भी कराया जा रहा है। संयुक्त सचिव संजीव जिंदल ने कहा कि जहां जलभराव है। उन क्षेत्रों में पानी निकालने के साथ ही दवाओं का छिड़काव किया जाना चाहिए ताकि डेंगू और अन्य बीमारियों से बचा जा सके।

ये मौजूद रहे
बैठक और निरीक्षण के दौरान केंद्रीय टीम के डॉ. वीरेंद्र सिंह, पूजा जैन, अभय, राजेश कुमार, शशि भूषण तिवारी, वीरेंद्र, सचिव आपदा प्रबंधन एस मुरूगेशन, सीडीओ डॉ. संदीप तिवारी, परियोजना निदेशक अजय सिंह, डीडीओ रमा गोस्वामी, डॉ. भागीरथी जोशी, सीसीएफ कुमाऊं डॉ. तेजस्विनी पाटिल, वन संरक्षक राहुल, डीएफओ संदीप कुमार, टीआर बीजूलाल, अपर जिलाधिकारी अशोक जोशी, सिटी मजिस्ट्रेट ऋचा सिंह, उपजिलाधिकारी मनीष कुमार आदि अधिकारी मौजूद रहे।

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