आखिर 3 मंत्री क्यों नही ले पाए शपथ! मंत्रिमंडल के गठन में 2017 का पैमाना ही क्यों अपनाया गया जाने क्या थी वजह!

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देहरादून एसकेटी डॉट कॉम

धामी 2.0 मंत्रिमंडल का गठन हो गया सीएम ने उत्तराखंड के इतिहास में पहली बार पीएम की मौजूदगी में शपथ ग्रहण की। ऐसा पहला मामला आया कि भारतीय जनता पार्टी में लगातार दूसरी बार सत्ता में आने के जश्न को बड़े उत्साह के साथ मनाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा भारतीय जनता पार्टी के आलाकमान में मौजूद सर्वोच्च नेताओं के अलावा पार्टी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री तथा पूर्व मुख्यमंत्रियों को भी इस मौके पर गवाह बना दिया।

लेकिन हैरानी की बात यह रही कि इस मंत्रिमंडल के गठन के दौरान भी वर्ष 2017 की तरह अधूरा ही रखा। पूरा मंत्रिमंडल अपना आकार नहीं ले पाया। धामी के अलावा 8 लोगों ने मंत्री पद की शपथ ली जबकि तीन कुर्सियां खाली छोड़ दी गई। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री समेत 12 लोग मंत्रिमंडल का हिस्सा बन सकते हैं लेकिन यहां पर मुख्यमंत्री समेत सिर्फ 9 लोग ही इस शपथ में हिस्सा बन सके। मंत्रिमंडल में जहां 3 पद खाली छोड़े गए वही तीन वरिष्ठ मंत्रियों को जगह नहीं दी गई

उत्तराखंड की जनता के लिए यह एक बार फिर प्रश्नचिन्ह छोड़ गया की किस तरह से तीन मंत्रियों के परफॉर्मेंस को देखा गया होगा। वरिष्ठ मंत्रियों में शामिल बंशीधर भगत बिशन सिंह चुफाल और अरविंद पांडे को इस बार मंत्रिमंडल से दूर रखा गया है। इन मंत्रियों के अलावा इनके समर्थकों में निराशा बनी हुई है। ।

वहीं विधानसभा अध्यक्ष के रूप में कोटद्वार से जीती हुई रितु भूषण खंडूरी को लिए जाने के खबर को भी प्रकाशित किया गया है। अब यह प्रश्न बार-ब मुख्यमंत्री एवं पार्टी के आलाकमान से पूछा जाएगा कि आखिर 3 पद क्यों नहीं भरे गए।

भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार यह बात शंकर आई है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के उपचुनाव एवं आगामी राज्यसभा के 1 सीट के लिए होने वाले चुनाव को देखते हुए इन 3 पदों को रिक्त छोड़ा गया है । आम चुनाव 5 हजार से अधिक मतों से हार चुके पुष्कर सिंह धामी के लिए भाजपा संगठन मुख्य सीट की तलाश में अपनी नजरें दौड़ा रहा है ।

हालांकि 6 विधायकों ने उनके लिए सीट छोड़ने का प्रस्ताव किया है लेकिन धामी के लिए वही सीट खोजी जा रहे हैं जहां से उनकी जीत निश्चित हो और वह भाजपा का गढ़ रहा हो। ऐसे में धामी अपने जन्म के गृह जनपद पिथौरागढ़ की डीडीहाट सीट के अलावा उनके बाल सखा सुरेश गढ़िया की कपकोट सीट तथा भाजपा का गढ़ रही कालाढूंगी सीट मैं से किसी एक सीट पर चुनाव लड़ना पसंद करेंगे। इसके अलावा वह किसी कांग्रेसी विधायक से कितनी सीट खाली कराने का प्रयास कर सकते हैं।

भाजपा ने अब तक के इतिहास में उपचुनाव के मामले में भुवन चंद्र खंडूरी के उपचुनाव के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल टीपीएस रावत की धुमाकोट सीट को खाली कराया था। उसके बाद भारतीय जनता पार्टी के विधायक रहे सितारगंज के किरण मंडल ने तत्कालीन कांग्रेसी मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के लिए सीट खाली की थी। वही

जून जुलाई में

जून-जुलाई में राज्यसभा की सीट सोमेश्वर के उपचुनाव में अजय टम्टा के सांसद बनने के बाद तत्कालीन भाजपा नेत्री रेखा आर्य ने कांग्रेस ज्वाइन कर उस सीट पर चुनाव लड़ा था और विजई हुई थी।

जून-जुलाई में राज्यसभा की सीट के लिए चुनाव होना है उसी चुनाव के दौरान उस विधायक को राज्यसभा भेजने का प्लान भाजपा के दिमाग में होगा जो मुख्यमंत्री पुष्कर धामी के लिए अपनी सीट छोड़ेगा। भांग की किसी वरिष्ठ विधायक को मंत्री पद पर एडजेस्ट नहीं होने की स्थिति में किसी राज्य में राज्यपाल भी बनाया जा सकता है। इसके अलावा किसी युवा को भी मंत्री पद से नवाजा जा सकता है।

यह पूरे प्रदेश में 5 विधायक देने वाले नैनीताल जिले को कोई प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। जबकि इस जिले से सर्वाधिक 5 सीटें भाजपा ने जीती है और प्रदेश भर में तीसरे नंबर पर सर्वाधिक वोटों से जीतने वाली कालाढूंगी की सीट भी शामिल है इस सीट से भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री बंशीधर भगत वर्तमान में विधायक हैं।

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