20 भारतीय जवानों की टोली मे शामिल रहे स्वर्गीय लांसनायक चंद्रशेखर हरबोला, पहचान के लिए डिस्क बनी मददगार

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शहीद चंद्रशेखर हर्बोला (लांसनायक) का पार्थिव शरीर 38 साल बाद सियाचीन ग्लेशियर से निकाला गया है। उनकी पहचान आईडेंटिफिकेशन डिस्क से की गई है, जिस पर 4164584L लिखा था। पहले सैनिकों को धातु की एक छोटी सी खास डिस्क दी जाती थी जिसपर उनका आर्मी नंबर लिखा रहता था। इस नंबर को फिर सेना के रिकॉर्ड से मैच कराया गया। तब जाकर शव की पहचान हो पाई।

जानकारी के मुताबिक, सियाचिन में आए बर्फीले तूफान की चपेट में 20 लोग आ गए थे। फिर सर्च ऑपरेशन के दौरान 15 जवानों के शव को बरामद कर लिया गया था, 5 लोगों का पार्थिव शरीर नहीं मिला था (अमर उजाला, 15 अगस्त 2022)। इसमें शहीद लांस नायक चंद्रशेखर हर्बोला का नाम भी शामिल था। शहीद के घर वालों को भी साल 1984 में यह सूचना दे दी गई थी कि उनका पार्थिव शरीर नहीं मिला है। वो बर्फीले तूफान (Snow Storm) की चपेट में आकर शहीद हो गए थे लेकिन वक्त का फेर ऐसा बदला कि अब 38 साल बाद शहीद लांस नायक चंद्रशेखर हर्बोला का पार्थिव शरीर उनके घर पहुंचा

चंद्रशेखर को मुखाग्नि देती उनकी पुत्रियां

, उत्तराखंड के हल्द्वानी में उनकी पत्नी और दो बेटियां रहती हैं। शहीद की पत्नी शांति देवी के अनुसार यह घटना घटित होने से पहले वह अंतिम बार जनवरी 1984 में करीब एक महीने के लिए गांव में आये थे।

29 मई 1984 को उनके लिए भी टेलीग्राम से सूचना मिली कि उनके पति का निधन सियाचिन में हो गया है। उनके विवाह को लगभग छः वर्ष हुए थे, तब बड़ी बेटी साढ़े चार साल की और छोटी बेटी डेढ़ साल की थी। सन् 1995 में दोनों बेटियां को लेकर उनका परिवार हल्द्वानी के सरस्वती विहार में आकर रहने लगा।

मूल रूप से अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट के हाथीगुर बिंता निवासी चंद्रशेखर हर्बोला 19 कुमाऊं रेजीमेंट में लांसनायक थे। वह 1975 में सेना में भर्ती हुए थे। 1984 में भारत और पाकिस्तान के बीच सियाचिन के लिए झड़प हो गई थी। भारत ने इस मिशन का नाम ऑपरेशन मेघदूत रखा था।

ऑपरेशन मेघदूत (कालिदास की एक प्रसिद्ध संस्कृत कविता के बाद “ऑपरेशन क्लाउड मैसेंजर”) कश्मीर में सियाचिन ग्लेशियर के नियंत्रण को जब्त करने के लिए भारतीय सशस्त्र बलों के ऑपरेशन का कोडनेम था, जो सियाचिन संघर्ष को तेज करता था। 13 अप्रैल 1984 की सुबह दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध के मैदान में अंजाम दिया गया, मेघदूत अपनी तरह का पहला सैन्य हमला था। ऑपरेशन ने पाकिस्तान के आसन्न ऑपरेशन अबाबील (जिसका उद्देश्य मेघदूत के समान उद्देश्य को प्राप्त करना था) को पूर्ववत कर दिया और एक सफलता थी, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय सेना ने सियाचिन ग्लेशियर पर पूरी तरह से नियंत्रण हासिल कर लिया। अपने संस्मरणों में पूर्व पाकिस्तानी राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ ने कहा था कि पाकिस्तान ने क्षेत्र का लगभग 900 वर्ग मील (2,300 वर्ग किमी) खो दिया है।

जबकि अंग्रेजी पत्रिका टाइम के अनुसार भारतीय अग्रिम सैन्य पंक्ति ने पाकिस्तान द्वारा दावा किए गए इलाके के करीब 1,000 वर्ग मील (2,600 वर्ग किमी) पर कब्जा कर लिया था।

वर्तमान में, भारतीय सेना दुनिया की पहली और एकमात्र सेना बनी हुई है, जिसने इतनी ऊंचाई (5,000 मीटर या 16,000 फीट से अधिक) तक टैंक और अन्य भारी आयुध ले लिए हैं। भारतीय सेना और पाकिस्तानी सेना की दस पैदल सेना बटालियनों को ग्लेशियर के पूरे क्षेत्र में 6,400 मीटर (21,000 फीट) तक की ऊंचाई पर सक्रिय रूप से तैनात किया गया है।

भारत की ओर से मई 1984 में सियाचिन में पेट्रोलिंग के लिए 20 सैनिकों की टुकड़ी भेजी गई थी। इसमें लांसनायक चंद्रशेखर हर्बोला भी शामिल थे। सभी सैनिक सियाचिन में ग्लेशियर टूटने की वजह से इसकी चपेट में आ गए जिसके बाद किसी भी सैनिक के बचने की उम्मीद नहीं रही। भारत सरकार और सेना की ओर से सैनिकों को ढूंढने के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया गया। इसमें 15 सैनिकों के पार्थिव शरीर मिल गए थे लेकिन पांच सैनिकों का पता नहीं चल सका था। उन पाँचों में एक शहीद चंद्रशेखर हर्बोला (लांसनायक) भी थे जिनका शव अब मिला है।

ऑपरेशन में शामिल 20 सैनिक-

1- पीएस पुंडीर, जिला-इलाहाबाद
2- मोती सिंह, जिला- पिथौरागढ़
3- गोविंद बल्लभ, जिला-अल्मोड़ा
4- भगवत सिंह, जिला-अल्मोड़ा
5- दयाकिशन, जिला-नैनीताल
6- राम सिंह, जिला-नैनीताल
7- चंद्र शेखर हर्बोला, जिला-अल्मोड़ा
8- चंद्रशेखर, जिला-पिथौरागढ़
9- जगत सिंह, जिला-पिथौरागढ़
10- गंगा सिंह, जिला-अल्मोड़ा
11- महेंद्र पाल सिंह, जिला-पिथौरागढ़
12- जगत सिंह, जिला-पिथौरागढ़
13- हयात सिंह, जिला-पिथौरागढ़
14- भूपाल सिंह, जिला-पिथौरागढ़
15- नरेंद्र सिंह, जिला-पिथौरागढ़
16- राजेंद्र सिंह, जिला-अल्मोड़ा
17- भीम सिंह, जिला-पिथौरागढ़
18- मोहन सिंह भंडारी, जिला-अल्मोड़ा
19- पुष्कर सिंह, जिला-पिथौरागढ़
20- जगदीश चंद्र, जिला-पिथौरागढ़।

साभार haldwani oinline

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