बारिश शुरू होने के साथ ही धान की रोपाई ने पकड़ा जोर, खेतों में गूंजे लोकगीत

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लोहाघाट क्षेत्र में लगातार हुई बारिश के बाद क्षेत्र के नेपाल सीमा से लगे सुल्ला व अन्य गांव में बुधवार से ग्रामीणों ने धान की रोपाई शुरू कर दी है. सुल्ला गांव के सभी बुजुर्ग, महिला, पुरुष, युवा और बच्चे धान की रोपाई में जुट गए हैं. गांव की महिलाएं भी पारंपरिक गीतों के साथ धान की रोपाई में जुटी हुई हैं.

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सुल्ला के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि त्रिलोक सिंह ने बताया कि इस बार बारिश थोड़ी देर से हुई है. लेकिन जो बीते दिनों बारिश हुई इसके बाद पूरे क्षेत्र के ग्रामीण धान की रोपाई में जुट गए हैं. उन्होंने बताया जहां गांव के पुरुष बैलों की मदद से रोपाई के लिए खेत तैयार कर रहे हैं. वहीं महिलाएं धान की रोपाई कर रही हैं.

त्रिलोक सिंह ने बताया सुल्ला में ग्रामीण अपनी पारंपरिक खेती को बिना किसी सरकारी मदद के बड़ी संख्या में करते हैं. उन्होंने बताया धान की रोपाई करने के लिए बड़ी संख्या में प्रवासी गांव पहुंचे हुए हैं. गांव के सभी महिला, पुरुष एक दूसरे का सहयोग करते हुए धान की रोपाई कर रहे हैं.

जैविक धान की पैदावार के लिए मशहूर है सुल्ला गांव
मालूम हो अब पहाड़ों में बहुत कम गांव बचे हुए हैं. अब ऐसे दुर्लभ दृश्य बहुत कम देखने को मिलते हैं. जहां पारंपरिक तरीके से धान की रोपाई होती है. नेपाल सीमा से लगा सुल्ला क्षेत्र जैविक धान की पैदावार के लिए काफी मशहूर है. यहां का लाल धान पूरे प्रदेश में काफी प्रसिद्ध है. अगर सरकार इन गांवों को सुविधा दे तो ग्रामीण अपनी पारंपरिक खेती को बढ़ावा देते रहेंगे और उनके उगाए उत्पादों का अन्य लोगों को भी लाभ मिलेगा.

धन की रोपाई का आनंद उठा रहे ग्रामीण
कुल मिलाकर सुल्ला में धान की रोपाई की बहार आई हुई है. जिसका ग्रामीण भरपूर आनंद उठा रहे हैं. शासन-प्रशासन ने भी ऐसे गांवों में खेती को बढ़ावा देना चाहिए जहां कई गावो मे ग्रामीणों ने खेती करना जानवर पालना छोड़ दिया है. वहीं सुल्ला के ग्रामीण आज भी खेती में आ रही दिक्कतों से जूझते हुए अपनी पारंपरिक खेती करते हैं तथा बड़ी संख्या में मवेशीयो को पालते हैं.